मिर्गी के इलाज के साथ जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता : राज्यपाल

० आशा पटेल ० 
जयपुर। मिर्गी रोग पर शहर में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ईकॉन 2023 शुरू हो गई। राज्यपाल कलराज मिश्र और गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. सुधीर भंडारी ने कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में देशभर के सीनियर एक्सपर्ट्स ने मिर्गी के इलाज और उसके मैनेजमेंट के बारे में जानकारी दी। इस दौरान राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि इस तरह की संगोष्ठियों में जानकारी के आदान प्रदान से चिकित्सा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलती हैं। इस बीमारी की भ्रांतियां बहुत हैं इसीलिए इसके इलाज के साथ जागरूकता को बढ़ाना भी बेहद आवश्यक है।

 कई मरीजों की तो पहचान तक नहीं हो पाती। एक तरफ हम चांद तक पहुंच गए हैं जबकि मिर्गी जैसी बीमारी की भ्रांतियों के कारण अब भी इसका इलाज सभी लोगों तक नहीं पहुंच पाता। इस दौरान राज्यपाल ने संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का वाचन भी किया। गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. सुधीर भंडारी ने कहा कि 70 प्रतिशत मिर्गी के मरीज नियमित रूप से दवा लेकर इस बीमारी को नियंत्रित कर सकते हैं। अब ऐसा उपचार आ गया है जिसकी लागत भी कम है जिसके कारण ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इसका इलाज मिल रहा है।

ईकॉन - 2023 के ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. आरके सुरेका ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में देश विदेश से 600 से अधिक एक्सपर्ट्स भाग ले रहे हैं। इंडियन एपिलेप्सी सोसायटी और इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन की ओर से इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अंजनी कुमार, ट्रेजरार डॉ. सुरेश गुप्ता और डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश, चाइना, हांगकांग, आयरलैंड, कनाडा, श्रीलंका, पाकिस्तान समेत अन्य देशों से विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

कोच्चिन के डॉ. केपी विनयन ने बताया कि अगर बच्चे को एक साल की उम्र से पहले मिर्गी का दौरा आता है तो उसके दिमाग का विकास रुक सकता है या धीरे हो सकता है। मिर्गी से बच्चे के ब्रेन फंक्शन प्रभावित हो जाते हैं जिससे वह लेट बैठना, चलना, बोलना सीख पता है। अगर बच्चा किसी भी तरह का असामान्य मूवमेंट करता है तो उसे डॉक्टर से चेक कराया जाना चाहिए। दुनियाभर में पैदा होने वाले कुल बच्चों में से एक प्रतिशत बच्चों को मिर्गी का दौरा आए सकता है। डिलिवरी के समय ऑक्सीजन की कमी, पैदा होने के बाद ना रोने से या जेनेटिकल कारणों से बच्चे को मिर्गी हो सकती है। अगर दौरे अधिक आते हैं तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

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