कृष्णा महावर के चित्रों में ‘इंडिगो’ और ‘मत्स्य गंधा’ में दिखे जीवन के रंग

० आशा पटेल ० 
जयपुर। जयपुर के चर्चित चित्रकार एवं इंस्टालेशन कलाकार कृष्णा महावर की एक्रेलिक और ऑइल कलर्स के माध्यम से बनाई गई 45 पेन्टिंग्स की सोलो एग्जीबिशन कलानेरी आर्ट गैलरी में आयोजित की गई। 28 फरवरी तक चलने वाली इस एग्जीबिशन का उद्घाटन देश में दिव्यांग क्रिकेट टीम की कन्विनर और समाज सेवी निर्मला रावत, आर्किटेक्ट शीतल कुमार अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि तथा जाने-माने स्क्लप्टर  हिम्मत शाह, गेस्ट ऑफ ऑनर ने किया। यहां प्रदर्शित की जाने वाली पेंटिंग्स में कृष्णा ने व्यक्ति के दैनंदिन में आसपास घटने वाली घटनाओं का चित्रण किया है।
‘चेनलिंग द कॉमन अनकॉमन’ इस एग्जीबिशन में कृष्णा की बनाई 50 ऑइल पेंटिंग्स डिस्प्ले हुई हैं जो उनकी दो चित्र श्रृंखलाओं - ‘मत्स्यगंधा’ तथा ‘इंडिगो पीपल’ पर आधारित हैं। ये उनकी 26वीं सोलो एग्जीबिशन है। गैलरी ओनर और इस एग्जीबिशन की क्यूरेटर सौम्या विजय शर्मा ने बताया कि चित्र श्रृंखला ‘इंडिगो पीपुल’ मानवीय भावनाआंे और उनकी उपस्थिति पर आधारित है । कृष्णा ने बताया कि जिन्हें मैं देखती हूं, मिलती हूं और जिनके बारे में एकांत में सोचती हूं और समझने की कोशिश करती हूं ऐसे कई व्यक्तियों से मैं मिलती हूं जिन्हें में इंडिगो पीपुल की श्रेणी में रख सकती हूं।
दरअसल ‘इंडिगो’ व्यक्ति वे व्यक्ति होते हैं जो भावुक और संवेदनशील होते है, जो यह जानते हैं कि हमारे जीवन में आध्यात्मिकता और सत्यता बहुत आवश्यक है। इंडिगो व्यक्तियों को अपनी निजता का एहसास बहुत मजबूती से होता है । हम सभी को जीवन में खुशियां चाहिए , हम शांति और सार्थकता के साथ रहना चाहते हैं, प्रेम करना और पाना चाहते हैं, इंडिगो व्यक्ति इन सभी बातों के लिए सजग होते हैं और वे जीवन जीने के नवीन तरीकों पर जोर देते हैं इंडिगो व्यक्तियों को पता होता है 
कि हमारे सिस्टम में कुछ तो रूढ़िवादिता है और वे इसे बदलने के लिए ही अपने पथ पर अग्रसर है। यह लोग क्रिएटिव और इनोवेटिव होते हैं । मुझे खुशी है कि मेरे आसपास ऐसे बहुत से व्यक्ति हैं जिन्हें इंडिगो की वर्ग में रख सकती हूं। मेरी वर्तमान चित्र श्रृंखला को मैंने ऐसे ही व्यक्तियों को समर्पित किया है जिसमें आंशिक कल्पना और आंशिक यथार्थ अवलोकन द्वारा ऐसे व्यक्तियों का चित्रण किया है जिन्हें देखकर भावुक हुआ जा सके, प्रसन्न हुआ जा सके।

मत्स्यगंधा श्रृंखला महिला तथा मछली को एक दुसरे की पूरक के रूप में चित्रित हैl मछली समृद्धि, सौभाग्य की प्रतीक मानी जाती है। दोनो की शारीरिक क्षमताएं तथा गुण समान मानते हुए उन्हें एक दुसरे का पूरक दर्शाते हुए ऑइल मध्यम में संयोजित किया है। तकनीक की बात करूं तो तेल रंगों में उन व्यक्तियों को अवास्तविक गहरे रंगों में चित्रित करने की कोशिश की है ताकि उनके आंतरिक भाव प्रकट हो सके और कैनवस पर किसी भी एक जगह से तीव्र रोशनी का एक स्रोत देना मुझे पसंद है

 जो चित्र में एक आकर्षण उत्पन्न करता है व भावनाओं को और सशक्त करने में काम आता है। तीव्र काल्पनिक छाया, प्रकाश मुझे लुभाते है। सेमी-रीयलिस्टिक शैली द्वारा बच्चो, महिलाओं और अन्य मानवीय आकृतियों को संयोजित करने की कोशिश करती हूं।अधिकांशतः बड़े आकार के चित्र बनाना मुझे पसंद है।

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