अग्रसेन अभिभावक संघ द्वारा पुस्तक एवं वर्दी दान अभियान

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : अग्रसेन अभिभावक संघ ने "अग्रसेन अभिभावक संघ पुस्तक मेला" का आयोजन पीतम पुरा में किया। यह पहल पुस्तक और वर्दी दान अभियान के रूप में आयोजित की गई। अग्रसेन अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें और वर्दियां खरीदने के लिए डाले जा रहे दबाव और शोषण के खिलाफ कदम उठाया है। इस आयोजन से अभिभावकों को एक व्यावहारिक विकल्प प्रदान किया है, जिससे वे जागरूक निर्णय ले सकें और इस आर्थिक शोषण के चक्र से बाहर निकल सकें।
इस कार्यक्रम में लगभग 150 अभिभावकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कई परिवारों ने प्रयुक्त पुस्तकों और वर्दियों का दान कर जरूरतमंद परिवारों की मदद की। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संघ ने "नो प्लास्टिक" नीति पर जोर दिया और सभी प्रतिभागियों को पुन: उपयोग योग्य थैले लाने के लिए प्रोत्साहित किया। पुस्तक और वर्दी दान अभियान के माध्यम से समुदाय को आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों के दान, संग्रहण और विनिमय के लिए एक मंच प्रदान किया। इस पहल ने न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद की, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी, सामुदायिक जुड़ाव और पर्यावरणीय सतर्कता को बढ़ावा देने की संघ की प्रतिबद्धता को भी उजागर किया।
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता ने कहा "यह पहल सुरक्षित और सतत वातावरण बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। 'नो प्लास्टिक' और विनिमय प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और अपशिष्ट को कम करने का एक उत्कृष्ट तरीका है। वैसे तो हमारी एसोसिएशन इस प्रकार बुक्स एक्सचेंज को सालों से कई स्कूलों में करवाते आ रहे हैं परन्तु इस बड़े स्तर की पहल को उदाहरण स्वरूप लेकर अन्य स्कूलों के अभिभावकों को इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित करूंगी।"

महेश मिश्रा, राष्ट्रीय युवा चेतना मंच भारत के राष्ट्रीय महासचिव और फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के सचिव, ने कहा कि वर्षों से निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाकर और अभिभावकों को महंगी किताबें और वर्दियां खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस पहल की शुरुआत हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि जैसे पावन अवसर पर हुई, जिससे पीड़ित परिवारों को आशा और राहत मिली है।
उन्होंने दिल्ली के सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने-अपने स्कूलों में इसी तरह की पहल करें और दिल्ली सरकार के हालिया आदेश का समर्थन करें, ताकि बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकें और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। 

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