मुशावरत की दावत ए इफ्तार में राजनीतिक,सामाजिक नेताओं और पत्रकारों की शिरकत

० संवाददाता द्वारा ० 
नई दिल्ली : रमजान की महानता इस तथ्य में है कि इस पाक महीने में क़ुरआन करीम नाज़िल हुआ, जो मानवता के लिए हिदायत और खुशहाली का एकमात्र रास्ता है। इसके अलावा हिदायत का कोई और मार्ग नहीं है। इसे छोड़कर हम न तो इस दुनिया में और न ही आख़िरत में कहीं भी मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। इन विचारों का इज़हार ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत के केंद्रीय कार्यालय में रोज़ा इफ्तार के अवसर पर अपने संबोधन में मौलाना डॉ. शीश मोहम्मद इदरीस तैमी ने किया। 

इससे पहले मुशावरत के अध्यक्ष फिरोज अहमद एडवोकेट ने उपस्थित महमानों का स्वागत किया। महफिल की शुरुआत मुशावरत के वरिष्ठ सदस्य और प्रमुख पत्रकार सैयद मंसूर आगा ने क़ुरआन करीम की सूरह अल-इखलास की तिलावत और उसका अनुवाद करके की। इफ्तार से पहले देश और कौम की भलाई के लिए सामूहिक दुआ की गई। अल्लाह से उन सभी के लिए हिदायत की दुआ की गई जो अपनी हरकतों और जुबान से समाज में फसाद,घृणा और नफरत का कारण बनते हैं।

मुशावरत की इफ्तार दावत में देश और कौम के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं, उलेमाओं और पत्रकारों की बड़ी संख्या ने भाग लिया। पूर्व सांसद सैयद अज़ीज़ पाशा, कुंवर दानिश अली, फ़िलिस्तीन के नाजिम-उल-अमूर अब्दुरज्जाक अबूजर,मुशावरत के पूर्व अध्यक्ष नवेद हमीद, इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के पूर्व अध्यक्ष सिराजुद्दीन क़ुरैशी, मुशावरत के महासचिव शेख मंज़ूर अहमद, मुशावरत के कार्यकारिणी सदस्य ऐजाज़ मक़बूल एडवोकेट, इंजीनियर सिकंदर हयात, फेस ग्रुप के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद, सुप्रीम कोर्ट के वकील जेड.के. फ़ैज़ान, प्रोफेसर बसीर अहमद ख़ान,

 आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. जावेद आलम ख़ान, मुशावरत यूनिट के अध्यक्ष डॉ. अदरीस क़ुरैशी, उपाध्यक्ष मौलाना निसार अहमद (दिल्ली मुस्लिम लीग के अध्यक्ष), उपाध्यक्ष इंजीनियर अबू सईद गदी, महासचिव डॉ. इक़बाल अहमद, सचिव रईस अहमद एडवोकेट और मुआइनुल हक़, वरिष्ठ पत्रकार मक़बूल रज़ा, डॉ. शुऐब रज़ा ख़ान, पूर्व सहायक आयुक्त रईस आज़म ख़ान, मिलत टाइम्स के संपादक शम्स तबरेज़, हिंदुस्तान एक्सप्रेस के न्यूज़ एडिटर ए.एन. शिब्ली, भारत एक्सप्रेस के ख़ालिद रज़ा ख़ान, एनडीटीवी के अतहरुद्दीन मुन्ने भारती, ज़ी सलाम के अफसर आलम, वरिष्ठ पत्रकार रोमान हाशमी, टीवी 6 के डॉ. मुज़फ्फर हुसैन ग़ज़ाली, सालार के अब्दुल बारी मसूद और प्रतिष्ठित लोग इसमें शामिल थे।

 ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत देश की मुस्लिम संगठनों की संघ है और वर्तमान में देश के मुसलमानों में कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी चिंताएँ पाई जाती हैं। मुशावरत की इस दावत की मेज़ पर वक्फ संशोधन विधेयक, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारण और सांप्रदायिक राजनीति में नए उबाल, बहाने बनाकर दंगे करवाने और उल्टे पीड़ितों को पुलिस द्वारा तंग करने जैसे मुद्दे छाए हुए थे।

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