15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर तक बढ़ा


नयी दिल्ली -  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 30 नवम्बर, 2019 तक बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है। इससे वित्त आयोग सुधार कार्यक्रमों को देखते हुए वित्तीय अनुमानों के लिए विभिन्न तुलना योग्य अनुमानों पर विचार कर सकेगा।


राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 280 की धारा (1) तथा वित्त आयोग (विविध प्रावधान) अधिनियम, 1951 का उपयोग करते हुए 27 नवम्बर, 2017 को 15वें आयोग का गठन किया। आयोग को अपने कार्य क्षेत्र के आधार पर 1 अप्रैल, 2020 से प्रारंभ 5 वर्षों की अवधि के लिए 30 अक्टूबर, 2019 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी।


केंद्र सरकार द्वारा पिछले 4 वर्षों में किए गए प्रमुख वित्तीय/बजट सुधारों को ध्यान में रखते हुए आयोग का गठन किया गया है। इन सुधारों में योजना आयोग को समाप्त करना और उसकी जगह नीति आयोग लाना, गैर योजना तथा योजना व्यय के बीच भेद को समाप्त करना, बजट कैलेंडर एक महीना आगे बढ़ाना और पहली फरवरी को नया वित्त वर्ष प्रारंभ होने से पहले पूर्ण बजट पारित करना, जुलाई 2017 से वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू करना, उधारी तथा वित्तीय घाटा उपाय के साथ नया एफआरबीएम ढांचा बनाना शामिल है।


आयोग का कार्य क्षेत्र उपरोक्त वित्तीय/ बजट सुधारों को ध्यान में रखता है। केंद्र तथा राज्य सरकारों की व्यय और प्राप्तियों के निर्धारण कार्य के आधार पर आयोग द्वारा सिफारिशें करने में समय लगेगा क्योंकि प्रारंभ से अंत तक डाटा की निरंतरता और डाटा सेटों की जांच चुनौतिपूर्ण हो जाती है।        


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्पेशल ओलंपिक्स यूनिफाइड बास्केटबॉल 3x3 वर्ल्ड कप भारत ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

राजस्थान के सरकारी विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स हुए लामबंद

सांगानेर में सरकार की संवेदनहीनता से 87 कॉलोनियों पर संकट

इंडिया इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी एक्सपो में ईपीसीएच पवेलियन ने भारतीय शिल्प कौशल का किया प्रदर्शन

IFWJ के पत्रकारों का सिस्टम के विरुद्ध अनिश्चितकालीन धरना

पेंशनर सोसाइटी ने पेंशनर्स समस्या हल करने हेतु राज्यपाल से लगाई गुहार

श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्या धाम पटल पर गूंजी पर्यावरण चेतना,महिला कवित्रियों ने रचा हरित इतिहास