केन्द्र सरकार का बजट किसानों, युवाओं, गरीब एवं महिलाओं की अपेक्षाओं के साथ छलावा : कांग्रेस

० संवाददाता द्वारा ० 
 जयपुर | चाँदी, सोना के महँगा होने से प्रदेश के ज्वैलरी उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि घरेलू गैस पर सब्सिडी देने अथवा पेट्रोल, डीजल पर लग रही एक्साईज ड्यूटी में कमी करने वाली कोई घोषणा नहीं की गई जबकि देश में बढ़ती महँगाई के लिए पेट्रोल, डीजल की बढ़ी हुई दरें जिम्मेदार है । उन्होंने कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने का वादा करने वाली सरकार किसानों की ऊपज की लागत घटाने हेतु कोई निर्णय नहीं कर किसान विरोधी होने का प्रमाण दे रही है। 

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण द्वारा प्रस्तुत केन्द्र सरकार के बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि केन्द्र सरकार का बजट किसानों, युवाओं, गरीब एवं महिलाओं की अपेक्षाओं के साथ छलावा है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय बजट में महँगाई एवं बेरोजगारी जैसी विकराल समस्याओं को दूर करने हेतु कोई तात्कालिक उपाय नहीं किए गए है बल्कि 3 वर्ष से 25 वर्ष तक के विजन के अनुरूप घोषणाएं की गई है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत आय करदाताओं को नई टैक्स प्रणाली के तहत् 2.5 लाख रुपये तक की आय कर रहित थी जिसमें अब 50 हजार रुपये बढ़ाकर 3 लाख रुपये तक की आय को कर रहित घोषित किया गया है 

जो कि ऊँट के मुँह में जीरा बराबर है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है किंतु केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय बजट में केवल 50 स्थानों को पर्यटन हेतु विकसित करने का निर्णय लिया है जबकि कई प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है किंतु पर्यटन उद्योग को किसी प्रकार की कोई राहत अथवा छूट प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना का भी बजट घटा दिया गया है जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों के हितों पर कुठाराघात है । 

उन्होंने कहा कि 8वाँ वेतन आयोग अथवा पुरानी पेंशन स्कीम के संबंध में कोई घोषणा नहीं होने से कर्मचारी वर्ग निराश है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक राज्य के मध्य क्षेत्र को सिंचाई एवं पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु अपर भदरा प्रोजेक्ट के लिए 5300 करोड़ की राशि बजट में आवंटित की गई है किंतु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राजस्थान से किए गए वादे की अनदेखी करते हुए राजस्थान प्रदेश के ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है ।

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