कविता // जीवन की आधारशिला हैं बेटियां


कै० सुरेंद्र सिंह बिष्ट
मन मंदिर , घर मंदिर है तो,
उस मंदिर की मूर्ति हैं बेटियां,
स्वप्नो की संम्पूर्ण संसार हैं
जीवन की आधारशिला हैं बेटियां,
भारतीय संस्कृति की पहचान,
भारत मां की शान हैं बेटियां।।


बेटी नहीं होती तो,
देवी शक्ति नहीं होती,
वंदे मातरम् भी नहीं होता,
नहीं रानी झांसी होती,
कोई साक्षी मलिक नहीं,
नहीं पी बी सिंधु ही होती।।


हे दमनकारी मानव,
अहंकार में क्यों डूबा है,
कुदरत का कर अपमान,
कैसा तिरस्कार कर रहा है,
बेटी के जन्म पर मातम मना रहा,
बेटे के जन्म पर खुशियां बांट रहा है।।


भारत मां के झूठे नारे लगाने वालों,
सत्तर सालों से लगा रहे हो,
जो बची हुई हैं बेटियां,
उन पर क्यों जुल्म ढा रहे हो।
अब बेटी बचाओ और पढ़ाओ,
  के स्वर में स्वर मिला रहे हो।।


नारे बदलने से सोच कहां बदलती है,
अत्याचारों की अभी झड़ी लगी है।
बेटियां तो भारत मां की शान हैं।
बेटियों के पीछे ही भारत महान है।।


कभी ये भारत सोने की चिड़िया था,
सम्पूर्ण भारत देवभूमि देवतुल्य था।
बेटियां हैं तो जहान हैं,
वरना दुनियां फिर कब्रिस्तान है
बेटियां हैं तो भारत महान है,
बूटियों से मिला हमें भारत मां,
वंदे मातरम् का सम्मान है।
 वंदेमातरम जय भारत।


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