त्योहारों के मौसम में 85% उपभोक्ताओं की योजना पहले से ज्यादा खर्च करने की है

० योगेश भट्ट ० 
मुंबई : भारत के कुछ सबसे बड़े और सबसे जाने-माने ब्रांड को सशक्त बनाने वाले वाणिज्य के लिए आवश्यक इंटरनेट इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रदान करने वाली कंपनी, शॉपिफाई ने अपना 2022 फेस्टिव शॉपिंग आउटलुक जारी किया है। शॉपिफाई ने महामारी के बाद के समय में हमेशा बदलने वाले उपभोक्ता व्यवहार और खर्च के पैटर्न की गतिशीलता को समझने के लिए मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों के 1,000 भारतीय उपभोक्ताओं का सर्वेक्षण किया। प्रकाश पर्व दिवाली, भारत में सबसे अधिक मनाये जाने वाले त्‍योहारों में से एक है, जो व्यवसायों को अपनी बिक्री बढ़ाने का सबसे उपयुक्त समय प्रदान करता है। शॉपिफाई के 2022 फेस्टिव शॉपिंग आउटलुक ने उपभोक्ताओं में एक उल्लेखनीय बदलाव की पहचान की है। इसके अनुसार दिवाली से पहले तक की खरीदारी की इच्छा सूची में कैशलेस भुगतान, ऑनलाइन शॉपिंग और फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आवश्यक वस्तुओं पर डील्स सबसे ऊपर है।

भारती बालाकृष्णन, कंट्री हेड और डायरेक्टर, शॉपिफाई इंडिया ने कहा, “डिजिटल बदलाव यहाँ है और यह भारतीय उपभोक्ताओं को खरीदारी की अगली पीढ़ी की ओर ले जा रहा है। 2022 की दिवाली के मौके पर देश भर में खरीदारी का एक यादगार आयोजन होगा क्योंकि उपभोक्ता पहले से कहीं अधिक खर्च करते हैं और ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा का विकल्प चुनते हैं। ब्रांड्स के लिए, मार्केटप्लेस और अपनी वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन हिस्‍सा लेना अब एक ही बात है क्योंकि उपभोक्ता पड़ोस के स्टोर तक जाने से पहले ऑनलाइन ब्राउज़िंग करने के लिए शिफ्ट हो जाते हैं। और, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ अनिश्चितता के साथ, खरीदार इस बारे में अधिक सतर्क हैं कि वे कहां खर्च करते हैं, हालांकि, फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और आवश्यक वस्तुओं के मामले में डील्स और छूट तथा स्थानीय ब्रांड के समर्थन ने समग्र खर्च को बढ़ावा दिया है।”

फेस्टिव शॉपिंग आउटलुक ने दिवाली से पहले भारत के रिटेल सेक्‍टर को आकार देने वाले 10 ट्रेंड्स की भी पहचान की। उपभोक्ता त्योहार के खर्चों के लिए सीमा बढ़ा रहे हैं: बढ़ती खर्च क्षमता और महामारी के बाद अपनी जीवन शैली को बेहतर करने की एक नई आकांक्षा के साथ, भारतीय उपभोक्ता पिछले वर्षों की तुलना में अपनी उत्सव खरीदारी पर पहले के वर्षों की तुलना में अधिक खर्च करने की योजना बना रहे हैं। सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 85.82% उपभोक्ताओं ने पिछले वर्षों की तुलना में अधिक खर्च करने की इच्छा जताई।

ई-टेलर्स पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है: भारतीय रिटेल स्पेस में इस साल भी ऑफलाइन से ऑनलाइन शॉपिंग की ओर बढ़ता बदलाव देखा जा रहा है। 78.57% उपभोक्ताओं ने त्योहारी सीजन में महामारी से पहले की तुलना में अधिक ऑनलाइन खरीदारी करने की योजना बनाई है। उपभोक्ता की पसंद में बदलाव का श्रेय पार्टनर डिस्‍काउंट्स, एक्सक्लूसिव डील, आसान भुगतान विकल्पों और त्वरित डिलीवरी के साथ-साथ ऑनलाइन शॉपिंग द्वारा दी जाने वाली कहीं से भी खरीदारी की सुविधा को दिया जा सकता है। महानगरों में रहने वाले खरीदारों के अलावा, गैर-महानगरों के लोग भी त्योहारी खरीदारी को लेकर ई-टेलर्स पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।

. त्योहारों की बिक्री पर इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन राज करते हैं: त्योहारों पर दिए जाने वाले परंपरागत उपहार जैसे सूखे मेवे, मिठाई और चॉकलेट तो उपभोक्ताओं के पसंदीदा हैं ही, शॉपिफाई इंडिया के सर्वेक्षण में फैशन और एक्सेसरीज़ पर खर्च करने की योजना बनाने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके बाद उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स का नंबर आता है। 81.65% उपभोक्ता फैशन और एक्सेसरीज़ खरीदना पसंद करते हैं, इसके बाद 76.37% ड्राई फ्रूट्स, मिठाइयाँ और चॉकलेट खरीदते हैं, और 68.57% घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स पर खर्च करते हैं। यह बदलाव आधुनिक उपभोक्ताओं की आकांक्षाओं का संकेत है, जो त्योहारी सौदों को अपनी जीवन शैली को बेहतर बनाने के एक सही अवसर के रूप में देखते हैं।

 कैशलेस भुगतान न्‍यू नॉर्मल बन रहा है: सुरक्षित भुगतान गेटवे के जरिए कैशलेस भुगतान को भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहित करने के साथ, डिजिटल भुगतान विधियां जैसे यूपीआई, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग भारतीय उपभोक्ताओं के सबसे पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरे हैं। कैशलेस भुगतान की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, हाथोंहाथ नकद भुगतान धीरे-धीरे कम महत्वपूर्ण हो रहे हैं। यूपीआई सबसे पसंदीदा भुगतान पद्धति के रूप में उभरा है और 67.36% उपभोक्ता इसे चुनते हैं। इसके बाद क्रेडिट कार्ड 45.49%, नेट बैंकिंग 37.69% और रिवॉर्ड पॉइंट को पसंद करने वाले 38.68% हैं।

स्थानीय व्यापारियों के लिए त्योहारी सीजन की खरीदारी बड़ा व्यवसाय: 96.04% उपभोक्ताओं ने इस त्योहारी सीजन में स्थानीय विक्रेताओं/ब्रांड से खरीदारी करने में रुचि दिखाई। यह उस भरोसे और पसंद के बिल्कुल विपरीत है जिसे भारतीय उपभोक्ता पारंपरिक रूप से विदेशी ब्रांडों और उनके उत्पादों के लिए रखते हैं। इस परिवर्तन का एक प्रमुख कारण उपभोक्ताओं के लिए "वोकल फॉर लोकल" होने का सरकार का आह्वान हो सकता है। 6. उपभोक्ता की पसंद में आवश्यक वस्तुएं लक्जरी से आगे: वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव और महामारी से उत्पन्न अनिश्चितता के माहौल में, भारतीय उपभोक्ता इस साल खरीदारी के अपने बजट को बढ़ाने की योजना बनाने के बावजूद संभल कर खर्च कर रहे हैं। सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 25.71% लोगों ने इस साल विलासिता की वस्तुओं के बजाय आवश्यक वस्तुओं पर खर्च करने की योजना बनाई है।

 उपभोक्ता प्रतिधारण के लिए छूट और डील प्रमुख साधन के रूप में उभरे: ब्रांड नाम, उत्पाद रेंज और गुणवत्ता पर पारंपरिक तौर पर दिए जाने वाले ध्यान से आगे बढ़कर, 75.82% उपभोक्ताओं अब छूट और डील्स को किसी ब्रांड/विक्रेता के प्रति निष्ठावान बने रहने का प्रमुख कारण बताया है। ज्यादातर उपभोक्ता अपने पैसे का अधिकतम मूल्य देने वाले ब्रांड/विक्रेता के पास जाने की योजना बनाते हैं।

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