हिंगोनिया गौशाला की ईको फ्रेंडली दिवाली,गाय के गोबर से दीपो का उत्पादन

० आशा पटेल ० 
जयपुर - हिंगोनिया गौशाला गौसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है| गौशाला में 18,000 से ज्यादा गौवंश की देखभाल व रखरखाव किया जाता है| पर्यावरण संरक्षण के लिए भी हिंगोनिया द्वारा उचित कदम उठाये जाते है, इस बार ईको फ्रेंडली दिवाली के लिए गौ पुनर्वास केंद्र द्वारा गाय के गोबर से दीपो का उत्पादन किया जा रहा है| हिंदू धर्म में गाय के गोबर का विशेष महत्व है क्योंकि इसे पवित्र और शुभ माना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गाय के गोबर में मां लक्ष्मी का वास होता है और इसीलिए कहा जाता है, “गोमय वसते लक्ष्मी” | हिंगोनिया गौशाला ने नगर निगम ग्रेटर और हेरीटेज के साथ मिलकर पर्यावरण के अनुकूल कदम उठाया है |
गाय के गोबर से तैयार दीपक का पूजा में इस्तेमाल करना काफी शुभ माना जाता है साथ ही दीपक जलने के बाद इसका खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है जो हमारी वनस्पति और पर्यावरण के लिए बहुत ही लाभदायक है| हिंगोनिया गौशाला के कार्यक्रम समन्वयक रघुपति दास ने बताया है की नगर निगम ग्रेटर और हेरीटेज के साथ मिलकर जयपुर के 250 वार्डों में लगभग 2 लाख 50 हजार गोमय दीपक का वितरण किया जायेगा | साथ ही कार्तिक माह में विभिन्न मंदिरों में भी गोबर से बने दीपको का वितरण किया जा रहा है हमारा उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्थायी विकास को बढ़ावा देना है। गाय के गोबर से बने दीपक का उपयोग न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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