प्रदेश के हर जिले में हो बाल महोत्सव का आयोजन, प्रदेश को मिलेगी नई पहचान : बाघमार
० आशा पटेल ०
जयपुर। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मंजू बाघमार ने सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में डिजिटल बाल मेला की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जयपुर बाल महोत्सव का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, जहां उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान को समझने का अवसर मिलता है।
कोग्निवेरा के संस्थापक कमलेश शर्मा ने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि बच्चों का एक समृद्ध संसार है, जहां राजस्थान के हर जिले की संस्कृति जीवंत हो उठी है। उन्होंने कहा कि बच्चों ने अपने-अपने जिलों को जिस तरह प्रदर्शित किया है, उससे प्रदेश में पर्यटन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उन्होंने भविष्य में ऐसे आयोजनों को सहयोग देने की भी बात कही।
डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों के जीवन में बढ़ते खालीपन को दूर करना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज गैजेट का सही उपयोग कराना ही डिजिटल बाल मेला का मूल उद्देश्य है। इस अवसर पर पिंजरापोल गौशाला के अध्यक्ष प्रदीप बाहेती ने कहा कि गौशाला में इस तरह का आयोजन पहली बार हो रहा है
जयपुर। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मंजू बाघमार ने सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में डिजिटल बाल मेला की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जयपुर बाल महोत्सव का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, जहां उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान को समझने का अवसर मिलता है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 41 जिलों से आए बच्चों ने अपने-अपने जिले की विशेषताओं को जिस तरह प्रस्तुत किया है, वह सराहनीय है। बाघमार ने कहा कि राज्य के हर जिले में ऐसे बाल महोत्सव का आयोजन होना चाहिए। उन्होंने अपने गृह जिले नागौर में अगला बाल महोत्सव आयोजित करने का ऐलान भी किया।
मंत्री बाघमार ने कहा कि बाल महोत्सव जैसे आयोजन बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ता है और उनमें टीम भावना का विकास होता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें शिक्षा, संस्कार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही बाल श्रम के खिलाफ भी सरकार अभियान चला रही है।
कोग्निवेरा के संस्थापक कमलेश शर्मा ने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि बच्चों का एक समृद्ध संसार है, जहां राजस्थान के हर जिले की संस्कृति जीवंत हो उठी है। उन्होंने कहा कि बच्चों ने अपने-अपने जिलों को जिस तरह प्रदर्शित किया है, उससे प्रदेश में पर्यटन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उन्होंने भविष्य में ऐसे आयोजनों को सहयोग देने की भी बात कही।
डिजिटल बाल मेला की संस्थापक जान्हवी शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों के जीवन में बढ़ते खालीपन को दूर करना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आज गैजेट का सही उपयोग कराना ही डिजिटल बाल मेला का मूल उद्देश्य है। इस अवसर पर पिंजरापोल गौशाला के अध्यक्ष प्रदीप बाहेती ने कहा कि गौशाला में इस तरह का आयोजन पहली बार हो रहा है
और इससे बच्चों को गौ सेवा और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि गौ माता से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और बच्चों को इससे जोड़ना आवश्यक है। कार्यक्रम में फ्यूचर सोसायटी के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने अध्यक्षता की। इस अवसर पर अजय शर्मा, डॉ. अलका गौड़, डॉ. मीना शर्मा, दीपक शर्मा और आरजे कार्तिक सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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