राजस्थान के पंचायत राज एवं निकाय चुनावों को वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर रोका हुआ है : कांग्रेस
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर। राजस्थान की भाजपा सरकार प्रदेश के सर्वांगीर्ण विकास हेतु आवश्यक पंचायत राज एवं निकाय चुनावों को वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर लम्बे समय तक रोका रखा जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को विकास से वंचित होकर उठाना पड़ रहा है, 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी शेष है और इसी प्रकार 12 जिला परिषदें का कार्यकाल भी शेष है, इनमें से 52 पंचायत समिति और 6 जिला परिषदें का कार्यकाल दिसम्बर, 2026 तक होने के कारण इनके चुनाव 15 अप्रेल से पूर्व नहीं करवाये जा सकते हैं, इसलिये वन स्टेट-वन इलेक्शन अव्यवहारिक है।
जयपुर। राजस्थान की भाजपा सरकार प्रदेश के सर्वांगीर्ण विकास हेतु आवश्यक पंचायत राज एवं निकाय चुनावों को वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर लम्बे समय तक रोका रखा जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को विकास से वंचित होकर उठाना पड़ रहा है, 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी शेष है और इसी प्रकार 12 जिला परिषदें का कार्यकाल भी शेष है, इनमें से 52 पंचायत समिति और 6 जिला परिषदें का कार्यकाल दिसम्बर, 2026 तक होने के कारण इनके चुनाव 15 अप्रेल से पूर्व नहीं करवाये जा सकते हैं, इसलिये वन स्टेट-वन इलेक्शन अव्यवहारिक है।
राज्य सरकार ने पूर्व में 4 जुलाई, 2025 तक पंचायत समितियों एवं जिला परिषद् के वार्डों की पुनर्सीमांकन प्रक्रिया पूर्ण करने की तारीख दी थी, किन्तु इस समय सीमा को निकले हुये लम्बा समय बीत गया है। पंचायत राज विभाग ने 17 दिसम्बर, 2025 को दो सप्ताह में वार्डों के पुनर्सीमांकन हेतु आपत्तियां लेकर वार्डों की अंतिम सूची प्रकाशित करने हेतु परिपत्र जारी किया था, लेकिन आज 20 जनवरी, 2026 तक किसी भी जिले में जिला कलेक्टर द्वारा वार्डों की अंतिम सूची प्रकाशित नहीं हुई है,
जो साबित करती है कि भाजपा की प्रदेश सरकार एवं भाजपा नेता पंचायत राज एवं नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया को पूरी तरह से हाईजेक कर मनमानी कर रहे हैं। उक्त विचार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटसरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर । डोटासरा ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 के निर्वाचक नामावली की तैयारी हेतु कार्यक्रम एवं दिशा-निर्देश दिनांक 31 दिसम्बर, 2025 को जारी किये थे,
जिसके तहत् निर्वाचन नामावली के प्रपत्र-ए1 तैयार करने हेतु कार्यक्रम घोषित हुआ और प्रपत्र-ए1 को तैयार करने की अंतिम तिथि 14 जनवरी, 2026 ई सूची अपलोड करने की अंतिम तिथि 16 जनवरी, 2026 और ई सूची पर प्रोसेज करने की अंतिम तिथि 18 जनवरी, 2026 थी, संशोधित प्रपत्र-ए1 के प्रकाशन की अंतिम तिथि 25 जनवरी, 2026 है, किन्तु वार्डों की सीमांकन का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है,
ऐसे में निर्वाचक नामावली भी तैयार नहीं हो सकती है, क्योंकि भौतिक सत्यापन वार्ड के परिसीमन के अनुसार ही होना है और निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 24 जनवरी, 2026 तक पूर्ण किया जाना है, यह सभी कार्य दिनांक 27 जनवरी, 2026 तक आवश्यक रूप से पूर्ण करने के निर्देश चुनाव आयोग ने दिये, किन्तु राज्य की भाजपा सरकार द्वारा वार्डों की सूची का अंतिम सूची प्रकाशन नहीं किये जाने से यह प्रक्रिया भी पूर्ण होना मुश्किल है जो कि दर्शाता है कि राज्य सरकार की मंशा प्रदेश में पंचायत राज चुनावों को कराने की नहीं है और ना ही इस ओर राज्य सरकार द्वारा गंभीरता से कोई कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को मिलने वाला 3000 करोड़ रूपये का बजट इसलिये रोक दिया, क्योंकि प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव नहीं हुये हैं, इसीलिये आनन्-फानन् राज्य सरकार अब प्रदेश में पंचायत राज चुनाव इस बजट को लेने हेतु कराना चाहती है जबकि पूरी प्रक्रिया नियम विरूद्ध चल रही है और भाजपा के नेता जिनका इस प्रक्रिया से संबंध व सरोकार नहीं है, ऐसे नेता श्री राजेन्द्र राठौड़ और श्री अरूण चतुर्वेदी मौखिक रूप से जिला कलेक्टरों और प्रशासकों को निर्देश दे रहे हैं एवं सम्पूर्ण प्रक्रिया में देरी करने के लिये जिम्मेदार हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को मिलने वाला 3000 करोड़ रूपये का बजट इसलिये रोक दिया, क्योंकि प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव नहीं हुये हैं, इसीलिये आनन्-फानन् राज्य सरकार अब प्रदेश में पंचायत राज चुनाव इस बजट को लेने हेतु कराना चाहती है जबकि पूरी प्रक्रिया नियम विरूद्ध चल रही है और भाजपा के नेता जिनका इस प्रक्रिया से संबंध व सरोकार नहीं है, ऐसे नेता श्री राजेन्द्र राठौड़ और श्री अरूण चतुर्वेदी मौखिक रूप से जिला कलेक्टरों और प्रशासकों को निर्देश दे रहे हैं एवं सम्पूर्ण प्रक्रिया में देरी करने के लिये जिम्मेदार हैं।
राज्य सरकार के प्रपत्र के बावजूद दिनांक 8 जनवरी, 2026 को वार्डों का सीमांकन की अंतिम सूची प्रकाशित होनी थी और आज तक जारी इसलिये नहीं हुई क्योंकि भाजपा के ये नेता अभी भी अपनी ओर से वार्डों एवं पंचायत समितियों के सीमांकन हेतु निर्देश दे रहे हैं, जनभावनाओं के विरूद्ध इस प्रकार का सीमांकन कराना चाहते हंैं जिससे कांग्रेस के उम्मीदवार कम संख्या में जीतें, कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के वार्ड बड़े बनाये जा रहे हैं, जहॉं से दो प्रतिनिधि चुन सकते हैं,
ऐसे मतदाताओं को एक ही वार्ड में रखा जाने का कार्य किया जा रहा है, जबकि आपत्ति देने की समय सीमा निकल चुकी है और जहॉं आपत्तियां नहीं आई, वहॉं वार्डों में किसी प्रकार बदलाव नहीं किया जाना चाहिये। उन्होंने भाजपा की प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि वार्डों एवं पंचायत समितियों के पुनर्सीमांकन के लिये आपत्ति लेने की अंतिम तिथि निकलने के लम्बे समय के बावजूद आज दिन तक वार्डों एवं पंचायत समितियों की सीमांकन की अंतिम सूची प्रकाशित क्यों नहीं हुई है?
डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में एसआईआर चल रही है, एक ओर चुनाव आयोग ने एसआईआर के माध्यम से मतदाता सुची की शुद्धीकरण की प्रक्रिया अपनाते हुये 41 लाख मतदाताओं के नाम एएसडी के तहत् हटाने का निर्णय लिया है और इसका प्रकाशन फरवरी, 2026 में दिनांक 24 को हो जायेगा, ऐसी परिस्थिति में पुरानी मतदाता सूची जिसे अशुद्ध बताया जा रहा है, से पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव कराने का औचित्य समझ से परे है। सरकार के निर्णय कौन ले रहा है,
डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में एसआईआर चल रही है, एक ओर चुनाव आयोग ने एसआईआर के माध्यम से मतदाता सुची की शुद्धीकरण की प्रक्रिया अपनाते हुये 41 लाख मतदाताओं के नाम एएसडी के तहत् हटाने का निर्णय लिया है और इसका प्रकाशन फरवरी, 2026 में दिनांक 24 को हो जायेगा, ऐसी परिस्थिति में पुरानी मतदाता सूची जिसे अशुद्ध बताया जा रहा है, से पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव कराने का औचित्य समझ से परे है। सरकार के निर्णय कौन ले रहा है,
कौन पंचायतों एवं जिला परिषदें के वार्डों के सीमांकन की अंतिम सूची रोकने के लिये मौखिक निर्देश दे रहा है, यह बात मुख्यमंत्री को बतानी चाहिये। मुख्यमंत्री का ध्यान गर्वनेन्स पर नहीं है, पंचायत राज चुनाव की प्रक्रिया को मुख्यमंत्री समझ नहीं पा रहे हैं, केवल दिल्ली से आई पर्ची के अनुसार प्रदेश की भाजपा सरकार काम कर रही है। ऐसी परिस्थिति में प्रदेश की जनता विकास से वंचित हो गई है।
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