अनियंत्रित खानपान और प्रदूषण बना युवाओं में बीमारी की बड़ी वजह
० योगेश भट्ट ०
नई दिल्ली : हृदय रोग आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह है तथा हार्ट से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले समय में इसकी गंभीरता को देखते हुए यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन खुद को आधुकनिक तकनीक से लैस कर रहा है, जहां मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. अजय अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी ने कहा कि युवा यह मानकर चलते हैं कि उन्हें हार्ट की बीमारी नहीं हो सकती, लेकिन यह सोच खतरनाक है। समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि आज हार्ट अटैक की उम्र तेजी से कम हो रही है। हम आजकल 20 के अंतिम और 30 की उम्र के मरीजों में भी हार्ट अटैक और गंभीर कोरोनरी ब्लॉकेज के मामले तेजी से देख रहे हैं। पहले के मुकाबले अब ये मामले केवल पारंपरिक जोखिम कारकों तक सीमित नहीं हैं।
डॉ. हरीश भाटिया, सीनियर कंसल्टेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार आज की युवा पीढ़ी में सांस से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, ई-सिगरेट का चलन, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने से अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
नई दिल्ली : हृदय रोग आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह है तथा हार्ट से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले समय में इसकी गंभीरता को देखते हुए यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन खुद को आधुकनिक तकनीक से लैस कर रहा है, जहां मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
युवाओं में हृदय रोग एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। पहले जहां हार्ट अटैक के मामलों में 40 साल से कम उम्र के लोग 10 में 1 होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा दुनिया भर में बढ़कर 5 में 1 हो गया है। जिम में बहुत ज़्यादा वर्कआउट, मैराथन के दौरान अचानक गिरना, जरूरत से ज्यादा तेल मसाले वाला खाना, मानसिक तनाव और अनियमित रूटीन इसके बड़े कारण बनते जा रहे हैं। कई मामलों में युवा खुद को सुरक्षित मानकर लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकता है।
वायु प्रदूषण, खासकर पीएम 2.5, हृदय और ख़ून की नली पर गंभीर असर डाल रहा है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है और कम उम्र में ही हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। यह जोखिम अब युवाओं और किशोरों में भी लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी बीमारी की पहचान महत्वपूर्ण है। करीब 30% लोगों में 40 की उम्र तक वैरिकोज वेन्स की समस्या देखी जाती है और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से इसके मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में इसके इलाज में आधुनिक तकनीकों से बड़ा बदलाव आया है।
इस विषय पर डॉ. धीरज झाम्ब, डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जरी ने कहा, “हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन आज हमारे पास उन्नत तकनीक और आधुनिक सर्जिकल विकल्प मौजूद हैं। यथार्थ अस्पताल में एंजियोप्लास्टी से लेकर ओपन हार्ट सर्जरी तक हर तरह का इलाज पूरी तैयारी के साथ किया जा रहा है। युवाओं में हार्ट से जुड़ी परेशानियों के बढ़ने के कारण अब किसी को ये नहीं सोचना चाहिए कि ये उम्र से जुड़ी बीमारी है। अगर युवाओं को भी दिल से जुड़ी किसी तरह की कोई समस्या हो तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
वायु प्रदूषण, खासकर पीएम 2.5, हृदय और ख़ून की नली पर गंभीर असर डाल रहा है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है और कम उम्र में ही हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। यह जोखिम अब युवाओं और किशोरों में भी लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी बीमारी की पहचान महत्वपूर्ण है। करीब 30% लोगों में 40 की उम्र तक वैरिकोज वेन्स की समस्या देखी जाती है और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से इसके मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में इसके इलाज में आधुनिक तकनीकों से बड़ा बदलाव आया है।
इस विषय पर डॉ. धीरज झाम्ब, डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जरी ने कहा, “हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन आज हमारे पास उन्नत तकनीक और आधुनिक सर्जिकल विकल्प मौजूद हैं। यथार्थ अस्पताल में एंजियोप्लास्टी से लेकर ओपन हार्ट सर्जरी तक हर तरह का इलाज पूरी तैयारी के साथ किया जा रहा है। युवाओं में हार्ट से जुड़ी परेशानियों के बढ़ने के कारण अब किसी को ये नहीं सोचना चाहिए कि ये उम्र से जुड़ी बीमारी है। अगर युवाओं को भी दिल से जुड़ी किसी तरह की कोई समस्या हो तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
डॉ. अजय अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी ने कहा कि युवा यह मानकर चलते हैं कि उन्हें हार्ट की बीमारी नहीं हो सकती, लेकिन यह सोच खतरनाक है। समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि आज हार्ट अटैक की उम्र तेजी से कम हो रही है। हम आजकल 20 के अंतिम और 30 की उम्र के मरीजों में भी हार्ट अटैक और गंभीर कोरोनरी ब्लॉकेज के मामले तेजी से देख रहे हैं। पहले के मुकाबले अब ये मामले केवल पारंपरिक जोखिम कारकों तक सीमित नहीं हैं।
खराब खान-पान, प्रोसेस्ड और अत्यधिक तैलीय भोजन का अधिक सेवन, नींद की कमी, लगातार मानसिक तनाव, धूम्रपान, वेपिंग और वायु प्रदूषण—विशेषकर पीएम 2.5—कम उम्र में ही धमनियों में वसा जमने (एथेरोस्क्लेरोसिस) की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं. सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों में भी एनसीआर में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर युवाओं और किशोरों में ये बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं। प्रदूषण, पीएम 2.5 के लंबे समय तक संपर्क,
धूम्रपान, वेपिंग और बदलती लाइफस्टाइल के कारण अस्थमा, सांस फूलना, लगातार खांसी और फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी जैसे लक्षण कम उम्र में ही सामने आने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आज के युवा अक्सर शुरुआती लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। समय पर जांच, सही सलाह और जीवनशैली में सुधार से इन बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. हरीश भाटिया, सीनियर कंसल्टेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार आज की युवा पीढ़ी में सांस से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, ई-सिगरेट का चलन, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने से अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
डॉ. भाटिया ने युवाओं को स्वच्छ वातावरण, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को भी बेहद जरूरी बताया। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन में एंजियोप्लास्टी, ओपन हार्ट सर्जरी, वैरिकोज वेन्स के आधुनिक इलाज समेत हृदय रोगों के पूरे स्पेक्ट्रम का समग्र इलाज उपलब्ध कराया जाता है, ताकि मरीजों को समय पर सही और सुरक्षित उपचार मिल सके।
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