नारी केवल शक्ति का रूप नहीं, बल्कि वह समाज की शिल्पी है : बीके ऊषा दीदी

० संवाददाता द्वारा ० 
आबू रोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मनमोहिनीवन स्थित ग्लोबल ऑडिटोरियम में रेडियो मधुबन द्वारा महिलाओं के लिए कार्यक्रम एवं स्नेह मिलन आयोजित किया गया। इसका विषय था "स्वतंत्र स्वर: हर नारी का अधिकार, नशा मुक्त परिवार"। इसके माध्यम से समाज में महिलाओं की सशक्त भागीदारी और नशामुक्त समाज की नींव रखने का आह्वान किया गया। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका राजयोगिनी उषा दीदी ने आध्यात्मिक सशक्तिकरण पर कहा कि नारी केवल शक्ति का रूप नहीं, बल्कि वह समाज की शिल्पी है। जब एक नारी मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वतंत्र होती है, तो वह पूरे परिवार को व्यसनों से मुक्त कर एक स्वस्थ समाज का निर्माण करती है। मेडिकल विंग के सचिव डॉ. बनारसीलाल शाह ने स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से 'नशा मुक्त परिवार' की अनिवार्यता को समझाया, ताकि आने वाली पीढ़ी शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सके।
सीडीपीओ योशिता कल्ला ने सरकारी योजनाओं और महिलाओं के कानूनी अधिकारों पर कहा कि "स्वतंत्र स्वर" का अर्थ है कि हर महिला को अपने जीवन के निर्णय लेने का पूरा अधिकार होना चाहिए। वनरक्षक अंजू चौहान ने पर्यावरण संरक्षण और अनुशासन में महिलाओं की भूमिका की सराहना की। कालिका पेट्रोलिंग टीम निर्भया स्क्वॉड की सुलोचना बहन ने महिला सुरक्षा और डिजिटल सतर्कता के व्यावहारिक टिप्स साझा किए।
रेडियो मधुबन की प्रोडक्शन हेड बीके कृष्णा बहन ने बताया कि कैसे रेडियो मधुबन सामुदायिक स्तर पर महिलाओं की आवाज़ को मंच प्रदान कर रहा है। संचालन आरजे बीके आरुषि बहन ने किया। सेवानिवृत्त सीबीईओ भोपाल राम पुरोहित, एसएलआरएम प्रेम कुमार ने ग्रामीण विकास और शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान डिजिटल माध्यम से प्रभावी संदेश देने के लिए विशेष वीडियो दिखाए गए। इसमें 'नशा मुक्ति जागरूकता' पर आधारित एक फिल्म दिखाई गई, जिसमें नशे के दुष्प्रभावों और उससे उबरने के तरीकों को दर्शाया गया। साथ ही, महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए समर्पित 'हिंसा को नो' प्रोजेक्ट के बारे में भी वीडियो दिखाया गया।
महिलाओं के मानसिक और शारीरिक तालमेल को बढ़ाने के लिए विशेष खेल आयोजित किए गए। इसमें एकाग्रता बढ़ाने वाले खेल, श्वास आधारित गतिविधियां (जैसे अनुलोम-विलोम) और शरीर व मन के तालमेल के लिए 'बैलेंस गेम' खिलाए गए, जिसमें महिलाओं ने बहुत उत्साह दिखाया। वहीं बालिकाओं और महिलाओं ने मंच पर अपनी कला का जादू बिखेरा।

ग्रामीण महिलाओं ने अतिथियों से सीधा संवाद कर आत्मनिर्भरता की राह में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। अंत में समाज सेवा, सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

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