जयपुर में गणगौर की शाही सवारी ने रचा वैभव का इतिहास, निकलेगी बूढ़ी गणगौर
० आशा पटेल ०
जयपुर। जयपुर की सड़कों पर गणगौर महोत्सव 2026 की शाही सवारी ने ऐसा रंग जमाया कि पूरा शहर लोक संस्कृति, आस्था और सांस्कृतिक वैभव में डूबा नजर आया। जयपुर के सिटी पैलेस परिसर से रवाना हुई सवारी जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसा-वैसा जनसैलाब उमड़ता गया और गुलाबी नगरी में गणगौर उत्सव जीवंत हो गया।
जयपुर। जयपुर की सड़कों पर गणगौर महोत्सव 2026 की शाही सवारी ने ऐसा रंग जमाया कि पूरा शहर लोक संस्कृति, आस्था और सांस्कृतिक वैभव में डूबा नजर आया। जयपुर के सिटी पैलेस परिसर से रवाना हुई सवारी जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसा-वैसा जनसैलाब उमड़ता गया और गुलाबी नगरी में गणगौर उत्सव जीवंत हो गया।
नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर तान और “गौर माता की जय” के जयकारों के बीच सजी-धजी पालकियों में विराजी गणगौर माता के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। त्रिपोलिया गेट से लेकर छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक सवारी के मार्ग पर छतों, बालकनियों और सड़कों पर खड़े लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
गणगौर माता की सवारी निकलते समय अद्धभुत झलकियों को देखकर जयपुर वासी आनंद विभोर हो गए। उत्साहित दर्शक मोबाइल कैमरों में फोटो खींचते और वीडियो बनाते हुए नजर आए। जयपुर वीडियो के साथ ही देसी-विदेशी पर्यटक भी इस अद्वितीय सांस्कृतिक आयोजन को कैमरों में कैद करते नजर आए।शोभायात्रा में शामिल 210 लोक कलाकारों ने आयोजन को जीवंत बना दिया। कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चरी और घूमर जैसे लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं रावणहत्था, भपंग और शहनाई की धुनों ने पूरे वातावरण को सुरमयी बना दिया। इस बार 32 पारंपरिक लवाजमों की भव्य मौजूदगी ने सवारी को और भी आकर्षक बना दिया। सुसज्जित हाथी, ऊंट दल, घोड़े, विक्टोरिया कैरिज और विभिन्न बैंडों की धुनों के बीच पहली बार शामिल शंकर बैंड ने खास आकर्षण पैदा किया।रविवार को बूढ़ी गणगौर की शाही सवारी के साथ यह महोत्सव अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगा। पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार सिटी पैलेस से रवाना होकर पारंपरिक मार्ग त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार से गुजरते हुए तालकटोरा/पोंड्रिक पार्क तक पहुंचेगी।बूढ़ी गणगौर की सवारी को विशेष रूप से विदाई और परंपरा के चरम रूप में देखा जाता है, जिसमें लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का गहरा भाव दिखाई देता है। जयपुर एक बार फिर इस ऐतिहासिक परंपरा का साक्षी बनेगा।
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