झोला अभियान TEDx लुधियाना तक : डॉ. अनुभा पुंडीर ने दिया पर्यावरण बचाने का संदेश
० योगेश भट्ट ०
देहरादून : आज जब पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक के खतरे से जूझ रही है, ऐसे समय में प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने अनोखे अभियान से वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़ बुलंद की। डॉ. अनुभा पुंडीर ने TEDx लुधियाना (TEDx GNDEC) के मंच पर अपने “झोला अभियान” के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और व्यवहार परिवर्तन का सशक्त संदेश दिया।TEDx टॉक में डॉ. पुंडीर ने बताया कि प्लास्टिक और पॉलिथीन केवल पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। माइक्रोप्लास्टिक अब पानी, भोजन और हवा के माध्यम से हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे कपड़े का झोला अपनाएँ तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ पृथ्वी बनाई जा सकती है।डॉ. अनुभा पुंडीर वर्तमान में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही वे रघुकुल आर्यावर्त NGO की वाइस प्रेसिडेंट के रूप में समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं। एक योगाचार्या के रूप में वे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट (PDP) और व्यवहार परिवर्तन पर भी लगातार काम कर रही हैं।
उनका “Embrace Jhola” अभियान केवल एक पर्यावरण अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से वे लोगों को “Local and Sustainable Living” का संदेश दे रही हैं और युवाओं को प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
डॉ. पुंडीर को उनके सामाजिक और शैक्षिक योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें संयुक्त राष्ट्र और सार्क देशों द्वारा ‘करमवीर चक्र’, उत्तराखंड राष्ट्रीय रत्न, जेपी इंटरनेशनल अवॉर्ड तथा काशी हिंदी विद्यापीठ से मानद डी.लिट. की उपाधि प्राप्त हो चुकी है।
“धरती को बचाने के लिए हमें किसी बड़े आंदोलन का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि आज से ही अपने छोटे-छोटे कदम शुरू करने चाहिए। डॉ. अनुभा पुंडीर युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। एक प्रोफेसर, योगाचार्या और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो एक छोटा सा ‘झोला’ भी दुनिया को बदलने की शुरुआत बन सकता है।
देहरादून : आज जब पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक के खतरे से जूझ रही है, ऐसे समय में प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने अनोखे अभियान से वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़ बुलंद की। डॉ. अनुभा पुंडीर ने TEDx लुधियाना (TEDx GNDEC) के मंच पर अपने “झोला अभियान” के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और व्यवहार परिवर्तन का सशक्त संदेश दिया।TEDx टॉक में डॉ. पुंडीर ने बताया कि प्लास्टिक और पॉलिथीन केवल पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। माइक्रोप्लास्टिक अब पानी, भोजन और हवा के माध्यम से हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे कपड़े का झोला अपनाएँ तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ पृथ्वी बनाई जा सकती है।डॉ. अनुभा पुंडीर वर्तमान में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही वे रघुकुल आर्यावर्त NGO की वाइस प्रेसिडेंट के रूप में समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं। एक योगाचार्या के रूप में वे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट (PDP) और व्यवहार परिवर्तन पर भी लगातार काम कर रही हैं।
उनका “Embrace Jhola” अभियान केवल एक पर्यावरण अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से वे लोगों को “Local and Sustainable Living” का संदेश दे रही हैं और युवाओं को प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
डॉ. पुंडीर को उनके सामाजिक और शैक्षिक योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें संयुक्त राष्ट्र और सार्क देशों द्वारा ‘करमवीर चक्र’, उत्तराखंड राष्ट्रीय रत्न, जेपी इंटरनेशनल अवॉर्ड तथा काशी हिंदी विद्यापीठ से मानद डी.लिट. की उपाधि प्राप्त हो चुकी है।
“धरती को बचाने के लिए हमें किसी बड़े आंदोलन का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि आज से ही अपने छोटे-छोटे कदम शुरू करने चाहिए। डॉ. अनुभा पुंडीर युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। एक प्रोफेसर, योगाचार्या और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो एक छोटा सा ‘झोला’ भी दुनिया को बदलने की शुरुआत बन सकता है।
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