मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी,जयपुर के फर्जी हस्ताक्षर व सील का उपयोग कर आय-व्यय प्रमाण दिया गया
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर। राजस्थान कॉपरेटिव सोसायटी एक्ट के तहत् 21/12/2017 को हिन्दुस्तान स्काउट एण्ड गाईड जिला उदयपुर का पंजीकरण किया गया, तत्पश्चात् 19/02/2018 को इस संस्था के क्षेत्राधिकारों में संशोधन करते हुये राजस्थान राज्य संस्था सहकारिता विभाग में पंजीकृत हुई और 22/11/2024 को सहकारिता विभाग ने संस्था की कार्यकारिणी की सूची प्रस्तुत की गई जिसके अनुसार मदन दिलावर संस्था के अध्यक्ष बने और अन्य पदाधिकारियों के साथ नरेन्द्र औदिच्य सचिव पद पर आसीन हुये।
जयपुर। राजस्थान कॉपरेटिव सोसायटी एक्ट के तहत् 21/12/2017 को हिन्दुस्तान स्काउट एण्ड गाईड जिला उदयपुर का पंजीकरण किया गया, तत्पश्चात् 19/02/2018 को इस संस्था के क्षेत्राधिकारों में संशोधन करते हुये राजस्थान राज्य संस्था सहकारिता विभाग में पंजीकृत हुई और 22/11/2024 को सहकारिता विभाग ने संस्था की कार्यकारिणी की सूची प्रस्तुत की गई जिसके अनुसार मदन दिलावर संस्था के अध्यक्ष बने और अन्य पदाधिकारियों के साथ नरेन्द्र औदिच्य सचिव पद पर आसीन हुये।
यह संस्था भारत स्काउट एण्ड गाईड की तर्ज पर पंजीकृत हुई। राजस्थान सरकार एवं शिक्षा विभाग की नीति के अनुसार जिले के सभी विद्यालयों में स्काउट/गाईड गतिविधियों को संचालन किया जाना आवश्यक है और संस्थान द्वारा स्काउट गाईड के शिविर आयोजित किये जाते हैं। इस संस्था के अध्यक्ष मदन दिलावर जो वर्तमान में राजस्थान सरकार में मंत्री है के संरक्षण में संस्था चल रही है तथा संस्था के सचिव पर बेहद गम्भीर आरोप हैं।
संस्था में कोई परिवार का सदस्य नहीं होना चाहिये, किन्तु सचिव नरेन्द्र औदित्य ने अपनी पुत्रवधु रंजना औदिच्य को जिला ऑर्गेनाईजर बनाया है। हिन्दुस्तान स्काउट एण्ड गाईड संस्था ने जिलों में शिविर लगाये। शिविरों में 10/01/2024 से 14/01/2024 पॉंच दिवसीय शिविर जयपुर में जिसका पंजीकरण शुल्क 1250 रूपये था, तीन दिवसीय शिविर जयपुर में 20/07/2024 से जिसका पंजीकरण शुल्क 200 रूपये और शिविर शुल्क 600 रूपये पॉंच दिन का, 23/11/2024 से 27/11/2024 तक जयपुर में शिविर लगाया गया जिसका शुल्क 2200 रूपये प्रति व्यक्ति था,
पॉंच दिन का शिविर दिनांक 15/03/2025 से लगाया जिसमें शुल्क प्रति व्यक्ति 1750 रूपये था। जयपुर में चाकसू के रा. बा. उ. मा. वि. में 08/03/2025 से पॉंच दिवसीय शिविर लगाया, किन्तु यह शिविर पॉंच दिन की बजाए मात्र एक दिन का लगा और पॉंच दिन के हिसाब से जितने पैसे इकट्ठे किये गये थे उसका बिल बाउचर लगाया गया और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर कर बिल उदयपुर भेजा गया, जहॉं से भुगतान प्राप्त होता है।
पहला आरोप है कि चाकसू में शिविर मात्र एक दिन का लगा, वह भी आवासीय नहीं लगा, क्योंकि उस वक्त 10वीं की बोर्ड परीक्षा चल रही थी, इस परीक्षा के दौरान कोई शिविर नहीं लग सकता। शिविर हेतु संस्था के खाते में 300 रूपये जमा होना अनिवार्य है, पैसे ज्यादा लिये वह अलग आरोप है, किन्तु 300 रूपये तो न्यूनतम संस्था के खाते में जमा होना आवश्यक है, किन्तु एक रूपया भी संस्था में खाते में इस शिविर हेतु जमा नहीं हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश से यह शिविर आयोजित हुआ, स्कूल छात्रों के फण्ड से 20-20 रूपये काटे गये, यह भी प्रमाणित है,
लेकिन इन शिविरों के माध्यम से घपले होने लगे और नियुक्तियों के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला हुआ, तब इस भ्रष्टाचार की शिकायत इस संस्था के जिला ऑर्गेनाईजर अजय कुमावत ने की, जिसमें गम्भीर आरोप लगे कि संस्था के सचिव नरेन्द्र औदिच्य, समन्वय सहायक सचिव विजय दाधीच, एसओसी गाईड कविता जैन, एएसओसी मनोज त्रिवेदी बिना सक्षम अनुमति के मनमाना शुल्क वसूल लगाकर शिविर में अवैध वसूली कर रहे हैं। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये।
डोटासरा ने कहा कि इसी संस्था के जिला ऑर्गेनाईजर ने संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जयपुर सम्भाग को लिखित में शिकायत की है कि बिना सक्षम स्वीकृति के शिविरों में मनमाना शुल्क निर्धारण कर अवैध वसूली हो रही है, चाकसू में आयोजित पॉंच दिवसीय शिविर दर्शाकर वास्तविकता में एक दिन आयोजित कर शेष राशि का गबन किया गया, इसके साथ ही सबसे गम्भीर आरोप यह है कि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जयपुर के फर्जी हस्ताक्षर व सील का उपयोग कर आय-व्यय प्रमाण दिया गया,
डोटासरा ने कहा कि इसी संस्था के जिला ऑर्गेनाईजर ने संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जयपुर सम्भाग को लिखित में शिकायत की है कि बिना सक्षम स्वीकृति के शिविरों में मनमाना शुल्क निर्धारण कर अवैध वसूली हो रही है, चाकसू में आयोजित पॉंच दिवसीय शिविर दर्शाकर वास्तविकता में एक दिन आयोजित कर शेष राशि का गबन किया गया, इसके साथ ही सबसे गम्भीर आरोप यह है कि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जयपुर के फर्जी हस्ताक्षर व सील का उपयोग कर आय-व्यय प्रमाण दिया गया,
जबकि उक्त अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके थे, यह स्पष्ट जालसाजी है। इसके अतिरिक्त कार्मिकों को धमकी देकर स्वयं के निजी बैंक खातों में चारों संस्था के अधिकारियों ने धनराशि जमा करवाई। सीएसआर फण्ड से 60 लाख रूपये फर्जी बिल बाउचर के माध्यम से गबन किये जाने का उल्लेख भी इस पत्र में किया गया। अजय कुमावत ने आरोप लगाया है कि आरटीआई में सूचना मांगने पर आज तक इस संदर्भ में कोई सूचना नहीं दी गई है। डीएलईडी के शिविर के लिये 13000 बच्चों को 300 रूपये शुल्क निर्धारित किया गया, क्योंकि यह आवश्यक है।
इसमें बिना प्रशिक्षण कराये ही सर्टिफिकेट दे दिये गये और राशि प्राप्त कर ली। इस संस्था के चारों अधिकारियों के निजी बैंक खातों में विभिन्न मद का पैसा गया, चाहे वह प्रशिक्षण का हो अथवा अन्य मद का हो। दर्पण पत्रिका के नाम पर बड़ी धनराशि प्राप्त की गई, जबकि उसका प्रकाशन छोटी संख्या में 10-20 प्रतियां ही छपवाई गई। जिलों में संस्था चलाने के लिये जो बजट दिया जाता है उसमें 30 से 40 प्रतिशत कमीशन के रूप में यह चार अधिकारी अपने निजी खातों में लेते थे।
इसी संस्था के पदाधिकारी ने आरोप लगाये हैं और लिखित में सरकार को शिकायत की है, जिसके अनुसार एक लाख रूपये प्रतिवर्ष तो स्टीकर बांटने के नाम पर लिये जाते थे। जिला ऑर्गेनाईजर अजय कुमावत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाये हैं कि कर्मचारियों का मानसिक उत्पीडऩ कर धमकी दी जाती है, नौकरी के नाम पर ठगी की गई, भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया गया, बिना विज्ञप्ति के गुप्त एवं पक्षपात नियुक्तियां की गई, कोर कमेटी द्वारा अवैध निर्णय लिये गये, फर्जी प्रमाण पत्र वितरण हुये, दोषियों पर कार्यवाही के स्थान पर संरक्षण एवं प्रमोशन दिया गया।
इन सबके साथ सबसे गम्भीर आरोप यह लगाये गये कि शिकायकर्ता अजय कुमावत से 92400 रूपये नरेन्द्र औदिच्य राज्य सचिव ने, 7300 रूपये विजय दाधीच समन्वय सहायक सचिव ने, 594960 रूपये मनोज त्रिवेदी एएसओसी ने, कुल 694660 रूपये अपने-अपने निजी खाते में ट्रांसफर करवाये। इसी प्रकार लोकेश शेरावत सिंह से 30000 रूपये निजी खाते में नरेन्द्र औदिच्य ने अपने खाते में ट्रांसफर करवाये, पूर्व जिला प्रभारी कृष्ण कुमार मीणा से 12062 रूपये नरेन्द्र औदिच्य ने, 27638 रूपये विजय दाधीच ने, 12062 रूपये कविता जैन ने, 212238 रूपये मनोज त्रिवेदी एसओसी ने अपने निजी खाते में डलवाये।
इसी प्रकार एएसओसी एपीओ मनीष शेरावत से 190834 नरेन्द्र औदिच्य ने, 751844 विजय दाधीच ने, 267618 रूपये कविता जैन ने अपने निजी खाते में प्राप्त किये। महेन्द्र गोरा पूर्व जिला प्रभारी से 38000 रूपये नरेन्द्र औदिच्य ने अपने निजी खाते में प्राप्त किये और पूर्व जिला प्रभारी कुलदीप कुमार गोयल से 106200 रूपये विजय दाधीच ने निजी खाते में प्राप्त किये,
इस प्रकार कुल 2343156 रूपये चारों अधिकारियों ने अपने-अपने निजी खातें में डरा-धमकाकर प्राप्त किये। जब इन अधिकारियों द्वारा निजी खाते में पैसे लेने पर आपत्ति दर्ज करवाई गई क्योंकि यह पैसे संस्था के खाते में जमा होने चाहिये थे, तो धमकाकर आपत्तिकर्ताओं जिनसे पैसे अधिकारियों ने अपने निजी खाते में लिये को पद से हटा दिया गया।
डोटासरा ने शिविर आयोजन आदेश भी दिखाये जो कि कार्यालय आदेश सहभागिता शुल्क आदि के लिये निकाले गये, सरकारी आदेश से पंजीकरण हेतु विद्यालयों से भी पैसा लिया गया है। जो जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र हंस 31/05/2024 को एक वर्ष पूर्व रिटायर हो गये थे, उनके हस्ताक्षर से 12/03/2025 को रिपोर्ट बनाई गई। मंत्री संस्था के लिये कह रहे हैं कि सेवा नियम नहीं बने हैं किन्तु सरकार के अधिकारियों ने जिसमें विशिष्ट शासन सचिव शिक्षा ग्रुप 4, संयुक्त विधि परामर्शदात्री,
डोटासरा ने शिविर आयोजन आदेश भी दिखाये जो कि कार्यालय आदेश सहभागिता शुल्क आदि के लिये निकाले गये, सरकारी आदेश से पंजीकरण हेतु विद्यालयों से भी पैसा लिया गया है। जो जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र हंस 31/05/2024 को एक वर्ष पूर्व रिटायर हो गये थे, उनके हस्ताक्षर से 12/03/2025 को रिपोर्ट बनाई गई। मंत्री संस्था के लिये कह रहे हैं कि सेवा नियम नहीं बने हैं किन्तु सरकार के अधिकारियों ने जिसमें विशिष्ट शासन सचिव शिक्षा ग्रुप 4, संयुक्त विधि परामर्शदात्री,
वरिष्ठ लेखा अधिकारी ने एक जॉंच रिपोर्ट बनाई थी, जिसमें दर्ज है कि संस्था के कर्मचारियों के लिये सेवा नियम बने हुये जो रिपोर्ट के साथ संलग्र वर्णन दिया गया है। इस रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि संस्था के लिये अनुदान नियम भी पारित हो चुके हैं। अब मंत्री को यह जवाब देना चाहिये कि सरकारी अधिकारी तो कह रहे हैं कि सेवा नियम बने हुये हैं और वे इसे नकार हैं तो सही कौन है।
यदि नियम नहीं बने हैं तो धनराशि कैसे ली जा रही है और 24-25 के बजट में चार करोड़ रूपये कैसे स्वीकृत हो गये और डेढ़ करोड़ रूपये जारी भी हो गये और यदि बने हैं तो मंत्री झूठ क्यों बोल रहे हैं, जबकि इस संस्था की ऑडिट होनी चाहिये और संस्था के खाते में कितने पैसे यह भी जानकारी होनी चाहिये। ऐसा नहीं होना बड़ी बेईमानी का सूचक है। संस्थान द्वारा खाल प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर व मोहन लगाई जाती है,
उसके पश्चात् बांटे जाते हैं, जबकि प्रमाण पत्र पर नाम इत्यादि भरने के बाद ही हस्ताक्षर व मोहर लगाई जानी चाहिये। सरकार के प्रगति प्रतिवेदन के पेज नम्बर 129, 130 और 131 पर जो विवरण दर्ज है उसमें हिन्दुस्तान स्काउट एण्ड गाईड संस्थान का महिमा मण्डन किया गया है और कितनी राशि मद में मिली जिक्र है। यदि संस्था के सेवा नियम नहीं बने होते और स्वयं का बैंक खाता नहीं होता तो राजस्थान विधानसभा में पेश प्रगति प्रतिवेदन में इसका जिक्र कैसे हो सकता है।
डोटासरा ने इस अवसर पर यूपीआई के माध्यम से निजी खातों में जमा हुई धनराशि की रसीदें दिखाई। कार्मिकों को किस प्रकार धमकाया गया, इसका नमूना ऑडियो सुनाकर प्रस्तुत किया गया। आश्चर्य की बात है कि मदन दिलावर के पीए जो बंशीवाल है, हर कैम्प में एक दिन के लिये जाते हैं, जबकि उनका वहॉं कोई काम नहीं है, इसके भी प्रमाण उपलब्ध हैं। जो वित्तीय घोटाला हुआ वह मात्र एक जयपुर जिले का है, लेकिन दु:ख का विषय है कि सरकार का मंत्री इस संस्था का अध्यक्ष हो,
डोटासरा ने इस अवसर पर यूपीआई के माध्यम से निजी खातों में जमा हुई धनराशि की रसीदें दिखाई। कार्मिकों को किस प्रकार धमकाया गया, इसका नमूना ऑडियो सुनाकर प्रस्तुत किया गया। आश्चर्य की बात है कि मदन दिलावर के पीए जो बंशीवाल है, हर कैम्प में एक दिन के लिये जाते हैं, जबकि उनका वहॉं कोई काम नहीं है, इसके भी प्रमाण उपलब्ध हैं। जो वित्तीय घोटाला हुआ वह मात्र एक जयपुर जिले का है, लेकिन दु:ख का विषय है कि सरकार का मंत्री इस संस्था का अध्यक्ष हो,
उसमें इस तरह के बड़े वित्तीय घोटाले कैसे हो सकते हैं। इसकी जॉंच होनी चाहिये। मंत्री से केवल इतनी मांग है कि अजय कुमावत जिला ऑर्गेनाईजर ने जो शिकायत वित्तीय घोटालों एवं अन्य भ्रष्टाचार की की है, उसकी निष्पक्षता से जिस एजेन्सी से मंत्री चाहे जॉंच कराये, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाये और सच्चाई जनता के सामने आ सके। यदि मंत्री की संस्था पर इतने बड़े वित्तीय घोटाले के आरोप लग रहे हैं,
उनका पीए शिविरों में मौजूद रहता है तो इन आरोपां की जॉंच क्यों नहीं करवाई जा रही है और जॉंच ना करवाकर मंत्री अनर्गल व अनुचित भाषा का उपयोग मुझ गोविन्द सिंह डोटासरा के लिये क्यों कर रहे हैं।
डोटासरा ने कहा कि शिक्षा विभाग में एक दर्जन से ज्यादा गड़बडिय़ों की जानकारी मिली है जिन्हें समय पर विधानसभा में उठाकर गर्वनेन्स की पोल तथ्यों सहित खोली जायेगी। मंत्री की संस्था पर गम्भीर आरोप हैं, उन आरोपों पर निष्पक्षता से जॉंच करवाकर तथ्यों सहित जानकारी आमजनता के सामने रखी जानी चाहिये।
डोटासरा ने कहा कि शिक्षा विभाग में एक दर्जन से ज्यादा गड़बडिय़ों की जानकारी मिली है जिन्हें समय पर विधानसभा में उठाकर गर्वनेन्स की पोल तथ्यों सहित खोली जायेगी। मंत्री की संस्था पर गम्भीर आरोप हैं, उन आरोपों पर निष्पक्षता से जॉंच करवाकर तथ्यों सहित जानकारी आमजनता के सामने रखी जानी चाहिये।
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