राममनोहर लोहिया,शहीद भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु के विचार को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प

० आशा पटेल ० 
नई दिल्ली। राम मनोहर लोहिया की 116वीं जयंती तथा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 95वें शहादत दिवस के अवसर पर दिल्ली के टी. एन. वाजपेई हॉल में समता सम्मेलन मे आये प्रतिनिधियों का स्वागत आल इंडिया रेल्वे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने किया। समता सम्मेलन मे 15 राज्यों के 500 प्रतिनिधि शामिल हुए।
सम्मेलन का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुदर्शन रेड्डी द्वारा किया गया। जस्टिस सुदर्शन रेड्डी ने संविधान में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के महत्व पर बल देते हुए कहा कि सभी मौलिक अधिकारों को समग्रता में देखा जाना चाहिए। उन्होंने लोहिया जी के विचार को याद करते हुए कहा कि “सत्ता हाथ में हो तो दिल में नम्रता बनी रहनी चाहिए। अध्यक्षता आईटीएम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति रमाशंकर सिंह ने की।
शिक्षा की गारंटी पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता विजय प्रताप ने की, मुख्य वक्ता के रूप में हैदराबाद से आए रमेश पटनायक उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून बनने के बावजूद सभी को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
छात्र सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुधीर क्रांतिकारी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रोशन मिहिर ने भी अपने विचार रखे।
स्वास्थ्य की गारंटी विषयक सत्र की अध्यक्षता जेएनयू की प्रोफेसर रितु प्रिया ने की। मुख्य वक्ता के रूप में जन स्वास्थ्य अभियान (इंडिया) के संयोजक अमूल्य निधि ने कहा कि स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाकर सभी वर्गों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं के व्यावसायीकरण और अस्पतालों के निजीकरण को रोकना चाहिए।
रोजगार की गारंटी पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता बिहार के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक आलोक मेहता ने की। मुख्य वक्ता प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि असंगठित क्षेत्र में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभावी नीतियों के अभाव में युवाओं में हिंसा, नशाखोरी और मानसिक अवसाद की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि संविधान सभा में मूलभूत आवश्यकताओं की गारंटी पर पर्याप्त संशोधन नहीं हो सके थे, लेकिन आज देश के पास लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का बजट है। उन्होंने सुझाव दिया कि 2% कॉर्पोरेट टैक्स और उत्तराधिकार टैक्स के माध्यम से 100 लाख करोड़ रुपये तक संसाधन जुटाए जा सकते हैं। इसलिए अब समय आ गया है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी को मौलिक अधिकार बनाया जाए।
सम्मेलन को जेएनयू के छात्र नेता अरविंद यादव, डॉ. राधाकृष्णन, दिल्ली विश्वविद्यालय के स्पर्श जाटव, ग्वालियर से किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव शत्रुघन यादव, लखनऊ के आलोक, गीग वर्कर्स के प्रतिनिधि प्रेम तथा सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की युवा अध्यक्ष रूमान मेक्की ने भी संबोधित किया।
“साफ पानी–साफ हवा की गारंटी” एवं पर्यावरण संकट विषयक सत्र की अध्यक्षता महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. चितरंजन मिश्रा ने की।

 मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद् सौम्य दत्ता रहे। इस सत्र में भिवानी से स्टैंड विद नेचर के डॉ. लोकेश, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रियांशु विद्रोही, अनुराग, कर्नाटक के पूर्व विधायक विश्वनाथ, अलीबाबा और कानपुर के ओम द्विवेदी ने अपने विचार रखे। खुले सत्र की अध्यक्षता कर्नाटक सरकार के योजना आयोग के उपाध्यक्ष बी. आर. पाटील ने की। उन्होंने कहा की सरकारों से नीतियों में परिवर्तन कराना जन आंदोलन के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान के समक्ष चुनौतियों को रेखांकित किया।

 समाजवादी पार्टी के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन ने कहा कि वर्तमान सरकार पूंजीवाद और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिसका मुकाबला समाजवादी विचारों को अपनाकर और जनसंघर्ष के माध्यम से ही किया जा सकता है। लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिना संघर्ष के कोई परिवर्तन संभव नहीं है। केवल सरकार या पार्टी बदलने से स्थिति नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि पूंजीवाद और साम्राज्यवाद का गठजोड़ देश की संप्रभुता के लिए चुनौती बन रहा है।

 किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी न मिलना, बढ़ती बेरोजगारी और असमानता गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की संपत्ति कुछ पूंजीपतियों के हाथों में केंद्रित होती जा रही है और संसदीय बहस का समय घट रहा है, जिससे लोकतंत्र सीमित हो रहा है। इन चुनौतियों का समाधान जनआंदोलन से ही संभव है।

सम्मेलन में सर्व सेवा संघ (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष रामधीरज, किसान संघर्ष समिति के ग्वालियर संभाग के संयोजक एड विश्वजीत रतौनिया, छिंदवाड़ा से सज्जे चंद्रवंशी, कर्नाटक राष्ट्र सेवा दल के अलीबाबा, बीड से प्रो. सुशीला ताई मोराळे, हिंद मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष कालप्पा, सागर के संदीप ठाकुर, छात्र नेता सागर राणा, पूर्व सांसद अखलाक अहमद, 

मेजर हिमांशु, दिव्या वाल्मीकि, मुंबई से जैनुद्दीन खान, चरण सिंह राजपूत, नरेंद्र प्रताप कटारिया, ऊषा विश्वकर्मा, आदित्य यादव, दीपक मिश्रा तथा अन्य प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। समता सम्मेलन का प्रस्ताव किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने रखा। संकल्प पत्र अरुण कुमार श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया। 

टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
साधुवाद एंव बधाई

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