ट्राईक्लिप की मदद से वॉल्व लीकेज कम हो सकता है,मरीज के दैनिक जीवन में सुधार आ सकता है
नई दिल्ली, ग्लोबल हैल्थकेयर लीडर, एबॉट ने भारत में ट्राईक्लिप ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टी.ई.ई.आर) सिस्टम पेश किया। यह डिवाईस ट्राईकस्पिड रिगर्गिटेशन (टी.आर) या ट्राईकस्पिड वॉल्व के लीकेज को ठीक करती है।ट्राईक्लिप को पैर की नस के माध्यम से अंदर पहुँचाकर लीफलेट्स या टिश्यू के फ्लैप्स को आपस में क्लिप कर दिया जाता है।
इस प्रकार, ट्राईक्लिप की टी.ई.ई.आर टेक्नोलॉजी द्वारा ट्राईकस्पिड वॉल्व रिपेयर हो जाता है और ओपन हार्ट सर्जरी किए बिना ही खून सही दिशा में बहने लगता है। इस विधि में हृदय के बाईं ओर लीक होने वाले माईट्रल वॉल्व को रिपेयर करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी और प्रमाणित माईट्राक्लिप डिवाईस की मदद ली जाती है।
ट्राईक्लिप में एक विशेष डिलीवरी सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जो हृदय के दाईं ओर पहुँचने के लिए बनाया गया है। टाईक्लिप लगवाने वाले लोगों को हॉस्पिटल में केवल एक ही दिन रुकना पड़ता है, जिसके बाद वो ठीक होकर घर वापस जा सकते हैं।
ट्राईकस्पिड वॉल्व हृदय के दाहिने एट्रियम से दाहिने वेंट्रिकल की ओर बहने वाले खून को नियंत्रित करता है। ट्राईकस्पिड रिगर्गिटेशन (टी.आर) तब होता है, जब वॉल्व ठीक से बंद नहीं हो पाता है और खून हृदय में वापस पीछे की ओर रिसने लगता है। टी.आर के कारण हृदय को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिसकी वजह से मरीज को अधिक थकान होने लगती है और उसकी साँस फूलने लगती है।
ट्राईकस्पिड वॉल्व हृदय के दाहिने एट्रियम से दाहिने वेंट्रिकल की ओर बहने वाले खून को नियंत्रित करता है। ट्राईकस्पिड रिगर्गिटेशन (टी.आर) तब होता है, जब वॉल्व ठीक से बंद नहीं हो पाता है और खून हृदय में वापस पीछे की ओर रिसने लगता है। टी.आर के कारण हृदय को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिसकी वजह से मरीज को अधिक थकान होने लगती है और उसकी साँस फूलने लगती है।
अगर टी.आर. का इलाज न किया जाए, तो इसकी वजह से एट्रियल फिब्रिलेशन (हृदय की अनियमित धड़कन) या फिर हृदय फेल होने तक की संभावना होती है। जिन लोगों को इलाज के बाद भी लगातार टी.आर के लक्षण बने हुए हों और जिनका शरीर सर्जरी की इजाजत न देता हो, उनके लिए ट्राईक्लिप एक अच्छा विकल्प है, जो व्यक्ति को बेहतर जीवन प्रदान कर सकता है और हार्ट फेल होने की संभावना को कम कर सकता है।
टी.आर भारत में वृद्धों और रुमेटिक हार्ट डिज़ीज़, एट्रियल फिब्रिलेशन, पल्मोनरी हाईपरटेंशन एवं अन्य वॉल्व समस्याओं वाले मरीजों की एक आम समस्या है, जिसका निदान कम हो पाता है। अभी तक प्रकाशित हुए रिव्यू और ईकोकार्डियोग्राफी पर आधारित डेटा से प्रदर्शित होता है कि नियमित कार्डियेक प्रक्रियाओं में टी.आर के गंभीर मामले अक्सर देखने में आते हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी समय के साथ बढ़ती चली जाती है। इसलिए भारत में इस बीमारी का इलाज किए जाने की बड़ी जरूरत है।
भारत में एबॉट के कंट्री मैनेजर, स्ट्रक्चरल हार्ट बिज़नेस, सुधीर मिराजकर ने कहा, ‘‘ट्राईकस्पिड रिगर्गिटेशन के मरीजों के लिए इलाज के विकल्प लंबे समय से बहुत सीमित रहे हैं, जिसका असर उनके जीवन पर पड़ता है। भारत में ट्राईक्लिप की शुरुआत केयर के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इससे मरीजों को एक मिनिमली इन्वेज़िव विकल्प उपलब्ध हुआ है, जो लक्षणों के साथ इलाज के नतीजों में काफी सुधार ला सकता है। भारत में हमारे स्ट्रक्चरल हार्ट थेरेपी के विकल्पों में ट्राईक्लिप को शामिल करके हम कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के मरीजों को बेहतर जीवन प्रदान करने वाले समाधान लाए हैं।
लंबे समय से ट्राईकस्पिड वॉल्व पर अन्य हार्ट वॉल्व के मुकाबले कम ध्यान दिया जाता रहा है। इसका कारण यह है कि इसमें समस्या के लक्षण बहुत धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अब तक इसके इलाज के विकल्प सीमित थे। लेकिन ट्राईकस्पिड वॉल्व हृदय के कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके टिश्यू के कोमल फ्लैप हृदय की हर धड़कन के साथ गति करते हैं। यह अपने चौड़े और असमतल आकार के साथ हृदय के दाईं ओर स्थित होता है,
टी.आर भारत में वृद्धों और रुमेटिक हार्ट डिज़ीज़, एट्रियल फिब्रिलेशन, पल्मोनरी हाईपरटेंशन एवं अन्य वॉल्व समस्याओं वाले मरीजों की एक आम समस्या है, जिसका निदान कम हो पाता है। अभी तक प्रकाशित हुए रिव्यू और ईकोकार्डियोग्राफी पर आधारित डेटा से प्रदर्शित होता है कि नियमित कार्डियेक प्रक्रियाओं में टी.आर के गंभीर मामले अक्सर देखने में आते हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह बीमारी समय के साथ बढ़ती चली जाती है। इसलिए भारत में इस बीमारी का इलाज किए जाने की बड़ी जरूरत है।
भारत में एबॉट के कंट्री मैनेजर, स्ट्रक्चरल हार्ट बिज़नेस, सुधीर मिराजकर ने कहा, ‘‘ट्राईकस्पिड रिगर्गिटेशन के मरीजों के लिए इलाज के विकल्प लंबे समय से बहुत सीमित रहे हैं, जिसका असर उनके जीवन पर पड़ता है। भारत में ट्राईक्लिप की शुरुआत केयर के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इससे मरीजों को एक मिनिमली इन्वेज़िव विकल्प उपलब्ध हुआ है, जो लक्षणों के साथ इलाज के नतीजों में काफी सुधार ला सकता है। भारत में हमारे स्ट्रक्चरल हार्ट थेरेपी के विकल्पों में ट्राईक्लिप को शामिल करके हम कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के मरीजों को बेहतर जीवन प्रदान करने वाले समाधान लाए हैं।
लंबे समय से ट्राईकस्पिड वॉल्व पर अन्य हार्ट वॉल्व के मुकाबले कम ध्यान दिया जाता रहा है। इसका कारण यह है कि इसमें समस्या के लक्षण बहुत धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अब तक इसके इलाज के विकल्प सीमित थे। लेकिन ट्राईकस्पिड वॉल्व हृदय के कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके टिश्यू के कोमल फ्लैप हृदय की हर धड़कन के साथ गति करते हैं। यह अपने चौड़े और असमतल आकार के साथ हृदय के दाईं ओर स्थित होता है,
जिसकी शारीरिक संरचना हर व्यक्ति के लिए काफी अलग होती है। इसका कार्य चारों ओर स्थिर हार्ट चैंबर के आकार और गति से जुड़ा होता है, यानी एक सूक्ष्म सा परिवर्तन भी वॉल्व के काम को प्रभावित कर सकता है। इन कारणों से इसका इलाज करना बहुत जटिल और चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए आज के समय में इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने और इनोवेशन लाने की बहुत अधिक जरूरत है।
अमेरिका में अनुमोदन प्रक्रिया के अंतर्गत यू.एस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने ट्राईलुमिनेट पाइवोटल ट्रायल के नतीजों की समीक्षा की। यह दुनिया का पहला रैंडमाईज़्ड और नियंत्रित क्लिनिकल अध्ययन था, जिसमें गंभीर टी.आर के मरीजों में मेडिकल थेरेपी की तुलना में ट्राईक्लिप सिस्टम की सुरक्षा व प्रभावशीलता का आकलन किया गया। इन मरीजों को ओपन-हार्ट सर्जरी का मध्यम और बहुत ज्यादा जोखिम था।
अमेरिका में अनुमोदन प्रक्रिया के अंतर्गत यू.एस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने ट्राईलुमिनेट पाइवोटल ट्रायल के नतीजों की समीक्षा की। यह दुनिया का पहला रैंडमाईज़्ड और नियंत्रित क्लिनिकल अध्ययन था, जिसमें गंभीर टी.आर के मरीजों में मेडिकल थेरेपी की तुलना में ट्राईक्लिप सिस्टम की सुरक्षा व प्रभावशीलता का आकलन किया गया। इन मरीजों को ओपन-हार्ट सर्जरी का मध्यम और बहुत ज्यादा जोखिम था।
इन नतीजों में सामने आया कि जिन मरीजों का इलाज ट्राईक्लिप सिस्टम से किया गया, उनमें से 90 प्रतिशत के टी.आर ग्रेड में प्रत्यक्ष सुधार हुआ, जो 30 दिनों में गंभीर या बहुत ज्यादा से मध्यम या कम ग्रेड तक आ गया। यह सुधार एक साल तक स्थिर बना रहा। इन परीक्षणों में बहुत ज्यादा अनुकूल सुरक्षा प्रोफाईल भी सामने आया। 98 प्रतिशत मरीजों को 30 दिनों तक बड़ी समस्याओं से बचाव मिला।
उनके जीवन में काफी सुधार हुआ। ट्राईलुमिनेट पाइवोटल स्टडी के दो वर्षीय नतीजों में सामने आया कि एबॉट ट्राईक्लिप सिस्टम ने हार्ट फेल होने के कारण अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं में 28 प्रतिशत की कमी ला दी, तथा ट्राईकस्पिड रिगर्गिटेशन और जीवन की गुणवत्ता में काफी ज्यादा सुधार देखने को मिला।

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