प्रशांत सिन्हा "जल योद्धा " सम्मान से सम्मानित
० योगेश भट्ट ०
बंगलुरू। पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पर्यावरणविद् एवं लेखक डॉ. प्रशान्त सिन्हा को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर द्वारा बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग में जल योद्धा सम्मान 2025 से नवाजा गया।
यह सम्मान सरकरीटेल डाट काम द्वारा आयोजित किया गया था, जबकि आर्ट ऑफ लिविंग, बेंगलुरु ने इसकी मेजबानी की। कार्यक्रम में नीति आयोग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा महाराष्ट्र सरकार (साझेदार राज्य) का सहयोग प्राप्त हुआ। ज्ञान साझेदार के रूप में एसोचैम, आईआईटी रुड़की और व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन ने योगदान दिया, जबकि इज़राइल और फिनलैंड जैसे देश इसके साझेदार थे।
'जल योद्धा सम्मान' एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार है, जो भारत भर में जल संरक्षण, सतत जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति असाधारण प्रतिबद्धता दिखाने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों को दिया जाता है। यह सम्मान पारंपरिक एवं नवीन प्रथाओं को मान्यता देकर जल संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन को गति प्रदान करता है। इस अवसर पर डॉ. प्रशान्त सिन्हा ने कहा, "यह सम्मान मेरे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के प्रति प्रोत्साहन है। जल संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है, और मैं इस दिशा में और सक्रिय रहूंगा।
बंगलुरू। पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पर्यावरणविद् एवं लेखक डॉ. प्रशान्त सिन्हा को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर द्वारा बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग में जल योद्धा सम्मान 2025 से नवाजा गया।
यह सम्मान सरकरीटेल डाट काम द्वारा आयोजित किया गया था, जबकि आर्ट ऑफ लिविंग, बेंगलुरु ने इसकी मेजबानी की। कार्यक्रम में नीति आयोग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा महाराष्ट्र सरकार (साझेदार राज्य) का सहयोग प्राप्त हुआ। ज्ञान साझेदार के रूप में एसोचैम, आईआईटी रुड़की और व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन ने योगदान दिया, जबकि इज़राइल और फिनलैंड जैसे देश इसके साझेदार थे।
'जल योद्धा सम्मान' एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार है, जो भारत भर में जल संरक्षण, सतत जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति असाधारण प्रतिबद्धता दिखाने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों को दिया जाता है। यह सम्मान पारंपरिक एवं नवीन प्रथाओं को मान्यता देकर जल संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन को गति प्रदान करता है। इस अवसर पर डॉ. प्रशान्त सिन्हा ने कहा, "यह सम्मान मेरे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के प्रति प्रोत्साहन है। जल संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है, और मैं इस दिशा में और सक्रिय रहूंगा।
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