मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम : एक प्रणाली और संरचना-आधारित ढांचे की ओर’’ व्हाइट पेपर जारी
० आशा पटेल ०
जयपुर। राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर में "मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम : एक प्रणाली और संरचना- आधारित ढांचे की ओर" शीर्षक पर व्हाइट पेपर जारी किया गया। यह श्वेत पत्र फोरम फॉर लर्निंग एंड एक्शन विथ इनोवेशन एंड रिगर अर्थात FLAIR द्वारा लिखा गया है।दिल्ली स्थित यह संगठन भारत में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहा है। इस अवसर पर फ्लेर के मार्गदर्शक डॉ. राज कुमार भंडारी ने बताया कि डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों में अनेक चुनौतियां हैं यह श्वेत पत्र न केवल उनमें मौजूद खामियों का विश्लेषण है, बल्कि उनके समाधान में प्रक्रियात्मक और मूल, दोनों ही तरह के वैज्ञानिक और नैदानिक साक्ष्यों का प्रस्तुतीकरण है।
इस अवसर पर साइकिएट्री विशेषज्ञ डॉ राघव शाह, डॉ संजय जैन तथा शिक्षाविद डॉ नीरा माथुर पूर्व प्रिंसिपल एस एम एस मेडिकल कॉलेज, डॉ कान्ता आहूजा पूर्व कुलपति राजस्थान यूनिवर्सिटी, राजस्थान अस्पताल के वाईस प्रेजिडेंट डॉ सर्वेश अग्रवाल एवं अनेक गणमान्य विशेषज्ञ उपस्थित थे। डॉ नीरा माथुर ने इस कदम को एक प्रशंसनीय पहल बताते हुए कहा कि इस पर कार्य करने पर मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में इन्नोवेटिव बदलाव का रास्ता बनेगा।
डॉ कान्ता आहूजा के अनुसार यह एक परामर्श-आधारित मॉडल से परे प्रो एक्टिव मॉडल पेपर है। वहीँ डॉ राघव का यह मानना रहा कि ऐसी प्रणालि से समस्याओं की पहचान और उसके समाधान अधिक शीघ्रता से होंगे। डॉ सर्वेश ने यह महसूस किया की इस डॉक्युमेंट में गोपनीयता सुनिश्चित रहे, और साथ साथ बड़ी आबादी के बीच कुशलतापूर्वक काम कैसे हो सकेगा इसका विस्तारपूर्वक बयान प्रस्तुत है।
जयपुर। राजस्थान हॉस्पिटल, जयपुर में "मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम : एक प्रणाली और संरचना- आधारित ढांचे की ओर" शीर्षक पर व्हाइट पेपर जारी किया गया। यह श्वेत पत्र फोरम फॉर लर्निंग एंड एक्शन विथ इनोवेशन एंड रिगर अर्थात FLAIR द्वारा लिखा गया है।दिल्ली स्थित यह संगठन भारत में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहा है। इस अवसर पर फ्लेर के मार्गदर्शक डॉ. राज कुमार भंडारी ने बताया कि डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों में अनेक चुनौतियां हैं यह श्वेत पत्र न केवल उनमें मौजूद खामियों का विश्लेषण है, बल्कि उनके समाधान में प्रक्रियात्मक और मूल, दोनों ही तरह के वैज्ञानिक और नैदानिक साक्ष्यों का प्रस्तुतीकरण है।
इस अवसर पर साइकिएट्री विशेषज्ञ डॉ राघव शाह, डॉ संजय जैन तथा शिक्षाविद डॉ नीरा माथुर पूर्व प्रिंसिपल एस एम एस मेडिकल कॉलेज, डॉ कान्ता आहूजा पूर्व कुलपति राजस्थान यूनिवर्सिटी, राजस्थान अस्पताल के वाईस प्रेजिडेंट डॉ सर्वेश अग्रवाल एवं अनेक गणमान्य विशेषज्ञ उपस्थित थे। डॉ नीरा माथुर ने इस कदम को एक प्रशंसनीय पहल बताते हुए कहा कि इस पर कार्य करने पर मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में इन्नोवेटिव बदलाव का रास्ता बनेगा।
डॉ कान्ता आहूजा के अनुसार यह एक परामर्श-आधारित मॉडल से परे प्रो एक्टिव मॉडल पेपर है। वहीँ डॉ राघव का यह मानना रहा कि ऐसी प्रणालि से समस्याओं की पहचान और उसके समाधान अधिक शीघ्रता से होंगे। डॉ सर्वेश ने यह महसूस किया की इस डॉक्युमेंट में गोपनीयता सुनिश्चित रहे, और साथ साथ बड़ी आबादी के बीच कुशलतापूर्वक काम कैसे हो सकेगा इसका विस्तारपूर्वक बयान प्रस्तुत है।
इस वाइट पेपर का मुख्य उद्देश्य स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रशिक्षण केंद्र और कार्यस्थल जैसी संस्थागत सेटिंग्स में मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेत दिखते ही उन पर एक्शन लेने का एक्शन प्लान है

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