राजस्थान सरकार बिना कारण पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के चुनाव नहीं करवा रही : कांग्रेस
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेशभर में संगठन बढ़ाओ-लोकतंत्र बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत् ब्यावर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जनजागरण हेतु जनसभा का आयोजन किया गया जिसे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित जिलाध्यक्ष किशोर चौधरी व स्थानीय नेताओं ने सम्बोधित किया।इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि संगठन की मजबूती पार्टी के लिये आवश्यक है, समस्त कार्य मजबूत संगठन के द्वारा ही सम्पन्न किये जाते हैं, देश को आजाद कराने से लेकर आज के स्वर्णिम भारत के निर्माण में कांग्रेस के मजबूत संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज कांग्रेस संगठन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है कि केन्द्र में बैठी हुई सत्ता संविधान की पालना नहीं कर रही है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संविधान को बचाने के लिये संघर्ष करना आवश्यक हो गया है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने देश में संविधान देकर सबको समानता का अधिकार दिया था और वोट का अधिकार देकर जनप्रतिनिधि चुनने का भी अधिकार दिया था जिसे भाजपा द्वारा छीना जाकर लोकतंत्र पर प्रहार किया जा रहा है। बाबा साहेब के संविधान में दलितों को, पिछड़ों को, आदिवासियों को उन्नति के अवसर प्रदान करने के लिये आरक्षण दिया गया, किन्तु संविधान को कुचला जा रहा है, लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं, विडम्बना और दुर्भाग्य है कि जिस पंचायती राज की स्थापना 1959 में पं. जवाहर लाल नेहरू ने राजस्थान में की थी उसके चुनाव भी भाजपा की सरकार नहीं करवाकर लोकतंत्र पर प्रहार कर रही है।
देश में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गॉंधी ने संविधान में 73वां व 74वां संशोधन कर पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के चुनाव पांच वर्ष में कराने का प्रावधान किया, 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया गया, संविधान के अनुच्छेद 243ई तथा 243यू में स्पष्ट प्रावधान है कि जिस प्रकार संसद एवं विधानसभा के चुनाव अनिवार्य है उसी प्रकार वर्ष 1993 के पश्चात् नगर निकाय एवं पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव भी 5 वर्ष में करवाना अनिवार्य है,
केवल पिछली बार कोरोना महामारी होने के कारण वैश्विक स्तर पर जारी गाईड लाईन की पांच आदमी भी एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते थे, ऐसी परिस्थिति में ही केवल चुनाव आगे बढ़े थे, जिसके लिये कांग्रेस तत्कालीन सरकार ने उच्चतम न्यायालय से इजाजत ली थी, अन्यथा सभी चुनाव समय पर सम्पन्न हुये। दु:ख का विषय है कि राजस्थान की भाजपा सरकार बिना कारण पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद समय पर चुनाव नहीं करवा रही है।
राजस्थान में भाजपा की सरकार अलोकतांत्रिक है, क्योंकि इस सरकार का तो गठन भी अलोकतांत्रिक तरीके से हुआ था, जिसे मुख्यमंत्री बनाया उसके नाम पर वोट नहीं मांगे गये थे और ना बताया गया था कि यह मुख्यमंत्री बन सकते हैं। भाजपा का लोकतंत्र में विश्वास नहीं है और लोकसभा चुनावों में भाजपा संविधान बदलने के लिये 400 सीटें जिताने की गुहार लगा रही थी, जनता ने 240 पर समेट दिया, लेकिन लोकतंत्र में फिर भी भाजपा का विश्वास नहीं रहा,
संविधान में प्रावधान है कि लोकसभा में सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिये आमंत्रित किया जाता है, उस दल के सांसदों की बैठक में संसदीय दल का नेता प्रधानमंत्री के रूप में चुना जाता है, किन्तु सब जानते हैं कि भाजपा की संसदीय दल की बैठक नहीं हुई, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीधे अपने प्रभाव से गठबंधन की बैठक बुलाकर साम-दाम-दण्ड-भेद के आधार पर खुद को प्रधानमंत्री घोषित करवा दिया। इसी प्रकार राजस्थान में केन्द्रीय मंत्री के हाथ पर्ची भिजवाकर पूर्व मुख्यमंत्री से खुलवाई, उनका अपमान करते हुये पर्ची से मुख्यमंत्री भी घोषित कर दिया।
इस पर्ची सरकार ने ढाई वर्ष के शासन में राजस्थान का बेड़ा गर्क कर दिया, भाजपा को जवाब देना चाहिये कि पर्ची से तो सरकार का गठन कर दिया, किन्तु अब पांच वर्ष का पंचायत राज एवं नगर निकाय का समय समाप्त होने के बावजूद राजस्थान में चुनाव क्यों नहीं करवाये जा रहे हैं। सरकार कह रही है कि ओबीसी आयोग ने रिपोर्ट नहीं दी, यह सरकार की विफलता है, विकल्प नहीं। 2022 में माननीय उच्चतम न्यायालय का आदेश आ गया था कि ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट लेना ओबीसी आरक्षण के लिये आवश्यक है,
ऐसे में भाजपा की राजस्थान सरकार ने अपने गठन के साथ ही ओबीसी आयोग को गठित कर रिपोर्ट क्यों नहीं ली। ओबीसी आयोग का गठन देरी से किया गया, उन्हें संसाधन नहीं दिये गये, जानबूझकर चुनाव नहीं कराने की मंशा से सरकार ने या तो आयोग में ऐसी नियुक्ति की जो आयोग का काम नहीं जानते थे अथवा सरकार ने अपनी चुनाव ना कराने की मंशा के अनुसरण में आयोग का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया। राजस्थान की भाजपा सरकार केवल इसलिये चुनाव नहीं करवाना चाहती है कि चुनाव हो गये तो प्रदेश में इन चुनावों में भाजपा की बुरी तरह हार हो जायेगी।
डोटासरा ने कहा कि सभी कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता खेतों में किसानों के बीच जाये, गरीबों की बस्तियों में जायें, छोटे व्यापारियों के पास जायें और जिस व्यक्ति के साथ अन्याय और अत्याचार हो रहा है, उस व्यक्ति के साथ खड़े होकर उसके हक, अधिकारों एवं तकलीफों को दूर करने के लिये मजबूती से उसका साथ दें।
डोटासरा ने कहा कि सभी कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता खेतों में किसानों के बीच जाये, गरीबों की बस्तियों में जायें, छोटे व्यापारियों के पास जायें और जिस व्यक्ति के साथ अन्याय और अत्याचार हो रहा है, उस व्यक्ति के साथ खड़े होकर उसके हक, अधिकारों एवं तकलीफों को दूर करने के लिये मजबूती से उसका साथ दें।
कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता आमजनता के बीच रहकर उनकी दु:ख-तकलीफों को दूर करने के लिये कार्य करेंगे तो 2028 में निश्चित रूप से भाजपा के कुशासन से जनता को मुक्ति मिलेगी तथा कांग्रेस की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकेगा। सभी कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को एकजुटता के साथ प्रिय नेता श्री राहुल गॉंधी के नेतृत्व में उनके दिखाये मार्ग पर बिना डरे मजबूती के साथ कार्य करना होगा और देश, लोकतंत्र, संविधान को बचाने के लिये लोगों के बीच जाना होगा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मजबूती के साथ संविधान बचाओ का नारा दिया और भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।
राजस्थान की सरकार प्रदेश के विकास के लिये कोई कार्य नहीं कर रही है, कांग्रेस शासन में मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना जैसी बहुत सारी फ्लैगशिप योजनायें लागू हुई थी लेकिन भाजपा सरकार के शासन में एक भी फ्लैगशिप योजना लागू नहीं हुई है। कांग्रेस समाज के सभी वर्गो को साथ लेकर उनके विकास और उत्थान के लिये कार्य करती है,
कांग्रेस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को एकजुटता के साथ कार्य करना होगा, वरिष्ठों को भी मौका मिलता है और युवा को भी अवसर है, सभी के सामंजस्य से पार्टी का संगठन मजबूत बना है। कांग्रेस पार्टी देश में और प्रदेश में लोकतंत्र बचाने के लिये हर सम्भव संघर्ष करने के लिये तैयार है, लोगों के वोट का अधिकार किसी को छीनने नहीं दिया जायेगा।
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