हिन्दु- अध्ययन केन्द्र की स्थापना से राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 को बल मिलेगा

० योगेश भट्ट ० 
यी  दिल्ली ।  शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि जब जर्मनी तथा अमेरिका जैसे अनेक देशों में अनेक हिन्दु-अध्ययन केन्द्र हैं तो भारत में इसे खुलना ही चाहिए था । उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री जी राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के अनुसार सभी भारतीय भाषाओं को महत्त्व देकर उन भाषाओं को प्रोत्साहित करना चाहते हैं क्योंकि अपनी भाषा में अभिव्यक्त की नीजता बनी रहती है । भाषा विकास के इसी क्रम में यहां पर यह केन्द्र स्थापित किया गया है । सरकार सभी भारतीय भाषाओं को महत्त्व देना चाहती है । 

उन्होंने कहा कि 'हिन्दु- अध्ययन केन्द्र ' की स्थापना से राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 को बल मिलेगा ।सीएसयू , दिल्ली के पुरी स्थित श्री सदाशिव परिसर में शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार के निर्देशन तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी की अध्यक्षता में हिन्दु- अध्ययन केन्द्र ' की स्थापना की कल्पना की गयी थी उसका पुरी परिसर में उद्घाटन किया गया । कुलपति प्रो वरखेड़ी वेद के वैश्विक महत्त्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही यह पावन सांस्कृतिक क्षेत्र वेद तथा उनके अंगों के अध्ययन अध्यापन के लिए महत्वपूर्ण भू भाग रहा है ।अतः नई शिक्ष नीति - 2020 में जो प्राचीन मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का उन्नयन करने की बात की गयी है ,उस उद्देश्य की पूर्ति में यह महत्त्वपूर्ण केन्द्र भी राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देगा । वस्तुत: यह केन्द्र हिन्दू जीवन पद्धति ,आचार विचार तथा विविध कलाओं के संबर्धन के साथ साथ विश्व शान्ति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगी ।

कुलपति प्रो वरखेड़ी ने शिक्षा मंत्री ,भारत सरकार को इसलिए भी धन्यवाद दिया कि उनके तथा उनकी सरकार ने सीएसयू की विविध योजनाओं की अनुदान राशि को दुगुनी कर दी है । इससे संस्कृत भाषा तथा साहित्य का समुचित विकास होगा । अतः इस योजना को प्रभावी तथा व्यापक ढंग क्रियान्वयन करने के लिए इनको पहली बार डिजिटाइजेशन भी किया जा रहा है। सान्दीपिनी राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान , उज्जैन के सचिव प्रो विरुपाक्ष जड्डीपाल ने कहा कि वेदों को आधुनिक विधाओं से जोड़ने की बात आज बहुत ही प्रासंगिक है ।

संस्कृति मंत्री, ओडिशा सरकार अश्विनि कुमार पात्र( पुरी क्षेत्र) तथा ब्राह्मगिरि क्षेत्र के विधायक क्रमशः श्री जयन्ति कुमार षडड्गी और  ललितेन्दु विद्याधर महापात्र ने भी इस केन्द्र की स्थापना को लेकर बड़ा ही हर्ष जताया ।  षड्षंगी ने कहा कि संस्कृत हमारी माटी की मूल भाषा है और श्री महापात्र ने संस्कृत को अधिक से अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही ।

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