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डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, केंद्रीय कानून मंत्री और उप मुख्यमंत्री ने पदक एवं डिग्रियां प्रदान की

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० आशा पटेल ०  जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि विधि शिक्षा प्रत्यक्षतः समाज से जुड़ी शिक्षा है। इसका उपयोग विद्यार्थी जरूरतमंदों, पीड़ित और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए करें। उन्होंने विधि शिक्षा में राष्ट्र और समाज हितों को सदा अग्रणी रखने और इस शिक्षा में उच्च संवैधानिक मूल्यों के साथ राजस्थान को अग्रणी किए जाने का आह्वान किया। बागडे डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि वि वि के तृतीय दीक्षांत समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीक्षांत विद्यार्थियों के प्राप्त ज्ञान के संस्कार का उत्सव दिन है। तैत्तिरीय उपनिषद् में शिक्षा समाप्ति पर आचार्य की दीक्षांत शिक्षा का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में जब शिक्षा पूरी हो जाती थी तो गुरु अपने शिष्य को अंतिम उपदेश देते थे। यह उपदेश सत्य की राह पर चलने, धर्म का आचरण करने और अपनी प्राप्त शिक्षा का अहंकार नहीं पालने से जुड़ा होता था। यही दीक्षांत समारोह हैं। राज्यपाल ने डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर को याद करते हुए कहा कि बॉम्बे विधानसभा में वर्ष 1938 में उन्होंने कहा था कि "मैं चाहता हूं कि समस्त लोग पहले भारतीय हों, और अंततः भारतीय...

प्रतिवर्ष आयोजित होगी न्यू इंडिया फाउंडेशन की बुक फेलोशिप

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली | भारत में गंभीर गैर-काल्पनिक लेखन और शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए न्यू इंडिया फाउंडेशन (NIF) ने घोषणा की है कि उसकी बुक फेलोशिप अब वर्ष 2026 से द्विवार्षिक (दो वर्ष में एक बार) के बजाय प्रतिवर्ष आयोजित की जाएगी। इसके अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया हर वर्ष खुलेगी और लगभग तीन माह तक जारी रहेगी। पिछले लगभग दो दशकों से भारत की स्वतंत्रता-उपरांत यात्रा, सामाजिक परिवर्तन, राजनीति, संस्कृति और समकालीन विषयों पर गंभीर विमर्श को प्रोत्साहित करने वाली NIF बुक फेलोशिप अब और अधिक लेखकों, शोधकर्ताओं तथा विचारकों तक पहुंच बना सकेगी। यह फेलोशिप केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि चयनित फेलोज़ को मासिक वित्तीय सहयोग, संपादकीय मार्गदर्शन, विशेषज्ञ परामर्श (मेंटरशिप) तथा बौद्धिक समुदाय का सहयोग भी प्रदान करती है। यही कारण है कि इसे भारत की सबसे प्रतिष्ठित लेखन फेलोशिपों में गिना जाता है। फाउंडेशन के अनुसार, यह परिवर्तन भारत में उभरते विमर्शों, नए शोध विषयों और बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्यों के अनुरूप अधिक सक्रिय और समावेश...

साहित्यकार,कवि एवं पत्रकार स्व. श्रीकांत वर्मा को भारत रत्न देने की माँग

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0  प्रो रवि शर्मा 'मधुप' एवं राजीव रंजन 0 नई दिल्ली। देश के प्रख्यात साहित्यकार, कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा की 40वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हॉल में ‘विश्व हिंदी परिषद’ एवं ‘श्रीकांत वर्मा ट्रस्ट’ द्वारा ‘श्रीकांत वर्मा स्मरांजलि’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्य, पत्रकारिता और बौद्धिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने स्व. श्रीकांत वर्मा के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनकी वैचारिक विरासत पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आरंभ संचालक डॉ. हर्षबाला शर्मा द्वारा स्व. श्रीकांत वर्मा के जीवन, साहित्यिक अवदान, पत्रकारिता तथा राजनीतिक योगदान के परिचय से हुआ। इसके उपरांत विशिष्ट अतिथियों, वरिष्ठ साहित्यकारों एवं वर्मा परिवार के सदस्यों द्वारा स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए स्व. श्रीकांत वर्मा के साहित्यिक अवदा...

पंडित नेहरू के पंचायती राज के सपने को कांग्रेस ने मजबूत किया : डोटासरा

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Qutub Mail Correspondent अजमेर/पुष्कर। संगठन सृजन अभियान के तहत पुष्कर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पंचायती राज को लेकर दिए गए योगदान को याद करते हुए कहा कि पंडित नेहरू का सपना था कि देश में लोकतंत्र गांव की पहली सीढ़ी से प्रारंभ हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए देश में लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का कार्य किया, जो अपने आप में एक मिसाल है। डोटासरा ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू की पंचायती राज की परिकल्पना लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर आधारित थी, ताकि गांवों में सत्ता सीधे जनता के हाथों में सौंपी जा सके। वे गांवों को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास और सामाजिक न्याय की मजबूत रीढ़ मानते थे। उन्होंने कहा कि नेहरू चाहते थे कि पंचायतें कृषि, शिक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं, जिससे ग्रामीण भारत से गरीबी और असमानता को दूर किया जा सके। उन्होंने याद दिलाया कि 2 अक्टूबर 1959 को प्रधानमंत्री नेहरू ने राज...