युवा सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस : COP30 से युवाओं को संभालनी होगी जलवायु नेतृत्व की कमान

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर, जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अब केवल वैश्विक समझौतों और नीतिगत घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय ठोस और प्रभावी ज़मीनी कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक है। यह विचार देश-विदेश के शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और स्थिरता क्षेत्र के अग्रणी विचारकों ने द्वितीय युवा सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान व्यक्त किए।

“Beyond COP30: Empowering Youth for Climate Action” विषय पर आयोजित इस ऑनलाइन सम्मेलन का आयोजन Voices of Bharat: Yuva for Sustainability (Sustainability Karma पहल) द्वारा लोक संवाद संस्थान के सहयोग से तथा जामिया मिलिया इस्लामिया के सेंटर फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप के साथ किया गया। वक्ताओं ने कहा कि COP30 ने वैश्विक प्रतिबद्धताओं को दोहराया है, किंतु नीतियों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए युवाओं को नेतृत्व, संसाधन और संस्थागत समर्थन देना अत्यंत आवश्यक है।

सम्मेलन में संबोधित करने वाले प्रमुख स्थिरता एवं नीति विशेषज्ञों में प्रो. के. जी. सुरेश (निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली; पूर्व महानिदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान–IIMC एवं पूर्व कुलपति, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय), प्रो. बिजयलक्ष्मी नंदा (प्राचार्य, मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय), संतोष जयराम (एडजंक्ट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, स्कूल ऑफ सस्टेनेबल फ्यूचर्स, अमृता विश्व विद्यापीठम),

 एरिक सोलहाइम (पूर्व कार्यकारी निदेशक, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम–UNEP), रिचर्ड रेखी (वाइस चेयरमैन, ग्रांट थॉर्नटन भारत), संदीप चंदना (चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, टेक महिंद्रा) तथा स्निग्धा कला (डिप्टी जनरल मैनेजर – निवेश एवं व्यवसाय विकास, ब्लूलीफ एनर्जी) शामिल रहे। अन्य वक्ताओं में राजेन्द्र भानावत (IAS), ट्रस्टी, फाउंडेशन फॉर एजुकेशन एंड डेवलपमेंट; राजीव टिकू एवं कल्याण सिंह कोठारी, क्रमशः कन्वीनर एवं को-कन्वीनर, युवा फॉर सस्टेनेबिलिटी;

 नैना गौतम, संपादक, सस्टेनेबिलिटी कर्मा; डॉ. मनीषा पंडित, सीनियर मैनेजर, युवा फॉर सस्टेनेबिलिटी; डॉ. सीमा अग्रवाल, प्राचार्य, कनोरिया पीजी महिला महाविद्यालय; प्रो. शाहिद रसूल, कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा प्रो. ऋचा यादव, हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि शामिल रहे। इसके साथ ही देशभर से आए 10 युवा सस्टेनेबिलिटी स्टोरीटेलर्स ने भी अपने अनुभव और नवाचार साझा किए।

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