नारायणा हॉस्पिटल,द्वारा विश्व पार्किंसंस दिवस पर कई खुलासे
० आशा पटेल ०
जयपुर। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर ने विश्व पार्किंसंस दिवस के अवसर पर “पार्किंसन? अब नहीं रोकेगा आपके कदम” शीर्षक से एक टॉक शो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्किंसंस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके आधुनिक उपचार विकल्पों को सामने लाना रहा। इस दौरान पार्किंसंस रोग के बढ़ते प्रभाव, शुरुआती पहचान के महत्व और उन्नत उपचार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जयपुर। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर ने विश्व पार्किंसंस दिवस के अवसर पर “पार्किंसन? अब नहीं रोकेगा आपके कदम” शीर्षक से एक टॉक शो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पार्किंसंस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके आधुनिक उपचार विकल्पों को सामने लाना रहा। इस दौरान पार्किंसंस रोग के बढ़ते प्रभाव, शुरुआती पहचान के महत्व और उन्नत उपचार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
पार्किंसंस एक गंभीर मस्तिष्क विकार है जो समय के साथ बिगड़ता है और व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों ने बताया कि हालांकि यह एक दीर्घकालिक बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और सही देखभाल से मरीज एक सक्रिय और संतुलित जीवन जी सकते हैं।
नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर, जहाँ डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है, जो इसे न्यूरोलॉजिकल देखभाल में एक उत्कृष्ट केंद्र बनाता है। पिछले दो वर्षों में नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर में 3000 से अधिक पार्किंसंस मरीजों का सफल उपचार किया गया है। इसके साथ ही अस्पताल में 16 डीप ब्रेन स्टिमुलेशन प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं, जो उन्नत न्यूरोलॉजिकल देखभाल और विशेषज्ञता का प्रमाण है।
डॉ. वैभव माथुर, कंसलटेंट - न्यूरोलॉजी, मूवमेंट डिसऑर्डर एंड डी बी एस स्पेशलिस्ट, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर, ने कहा, "डीप ब्रेन स्टिमुलेशन उन मरीजों के लिए एक प्रभावी उपचार विकल्प है, जिन पर दवाइयों का असर सीमित हो जाता है। इसमें दिमाग के विशेष हिस्सों में इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो नियंत्रित इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।
अब एडवांस तकनीक के रूप में एडैप्टिव डीबीएस भी उपलब्ध है, जो मरीज के दिमाग के सिग्नल्स को रियल-टाइम में समझकर खुद ही अपनी सेटिंग्स को एडजस्ट करता है। इससे उपचार अधिक सटीक और व्यक्तिगत बनता है, जिससे मरीजों को बेहतर राहत और जीवन की गुणवत्ता में सुधार मिलता है।"
यह भी बताया गया कि DBS पारंपरिक रूप से फिक्स्ड सेटिंग्स पर काम करता है, जबकि A-DBS एक स्मार्ट तकनीक की तरह मरीज की स्थिति के अनुसार स्वतः प्रतिक्रिया करता है। यह आधुनिक तकनीक पार्किंसंस के इलाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बलविंदर सिंह वालिया, फैसिलिटी डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर, ने कहा, "नारायणा हॉस्पिटल जयपुर में हमारा उद्देश्य मरीजों को उन्नत और गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करना है। इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से हम लोगों को जागरूक करना चाहते हैं ताकि वे समय पर इलाज लें और पार्किंसंस को एक बाधा नहीं, बल्कि एक प्रबंधनीय स्थिति के रूप में देखें।"
यह भी बताया गया कि DBS पारंपरिक रूप से फिक्स्ड सेटिंग्स पर काम करता है, जबकि A-DBS एक स्मार्ट तकनीक की तरह मरीज की स्थिति के अनुसार स्वतः प्रतिक्रिया करता है। यह आधुनिक तकनीक पार्किंसंस के इलाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बलविंदर सिंह वालिया, फैसिलिटी डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल जयपुर, ने कहा, "नारायणा हॉस्पिटल जयपुर में हमारा उद्देश्य मरीजों को उन्नत और गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करना है। इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से हम लोगों को जागरूक करना चाहते हैं ताकि वे समय पर इलाज लें और पार्किंसंस को एक बाधा नहीं, बल्कि एक प्रबंधनीय स्थिति के रूप में देखें।"
डॉ. प्रदीप कुमार गोयल, क्लिनिकल डायरेक्टर, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर, ने कहा, "पार्किंसंस रोग के प्रबंधन में शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि लक्षणों को समय रहते पहचाना जाए और उपचार शुरू किया जाए, तो बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है और मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है। हमारा प्रयास है कि मरीज और उनके परिजन इस बीमारी से जुड़े भ्रम और डर से बाहर आएं।
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