शहादत 12 कहानियांे का संग्रह

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली ।  लेखक कर्नल सी. एम. नौटियाल का 12 कहानियों का संग्रह जिसमें वास्तविक घटनाओं पर केन्द्रित कहानियां सम्मलित है । पहली कहानी के नाम पर ही शीर्षक शहादत रखा गया है। तत्पश्चात लाड़ो, गोधाम पंचधाम, गुमशुदा, कन्यादान, डायन, महत्वाकांक्षा, तोहफा, आरजू, बेवफा, जन्नत, ऋण एक से बढ़कर एक कहानियां 152 पेजों में सम्मलित है। यद्यपि जीवन स्वयं में एक कहनी है जिसमें मनुष्य जीवन के रंगमंच पर कई किरदारों को निभाते हुए अदृश्य परिवेश में चला जाता है, बचती है वहां भी सिर्फ कहानी ही
कर्नल सी. एम. नौटियाल की रचना धार्मिता की मूल प्रेरणा स्त्रोत उनकी स्वर्गीय पत्नी पुष्पा नौटियाल ही है जिसकी प्रेरणा उन्हें प्रतिपल प्रोत्साहित करती रहती हैं। यह कहानी संग्रह शहादत भी उन्हें ही समर्पित है।
यद्यपि इन कहानियों में कई कहानियां शहादत, गुमशुदा, ऋण प्रचलित प्रचारित व प्रसारित हैं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समाज के मध्य लेकिन लेखक का अपना नजरिया है, इन शीर्षकों के माध्यम से समाज में मानवीय संवेदनाओं को पुन: जागृत करना इसमें वह भिन्न-भिन्न चरित्रों के माध्यम से सफल होते नजर आते हैं।

12 कहानियों के इस संग्रह में लाडो, तोहफा, बेवफा, जन्नत कहानियां बहुत हद तक एक पाठक के रूप में हमें बरवस सोचने-विचारने को मजबूर करती है कि वर्तमान परिवेश में भी किन्नर समाज के प्रति लोगों का नजरिया बदला नहीं है। वहीं तोहफा कहानी में आर्मी परिवेश में देश की सुरक्षा एवं सेवा के लिए किसी भी हद तक जाने में कोई गुरेज नहीं की प्रेरणा मिलती है।बेवफा कहानी में हम समझ पातें हैं कि अति महत्वांकाक्षायें स्वयं को ही नहीं परिवार को भी बर्वादी के कगार पर ला खड़ा करती है।

जन्नत कहानी में भारत-पाकिस्तान के परिवेश से रूबरू होते हुए बालसुलभ चेष्टाओं से भी भली भांति वाकिफ हो पाते हंैं ।जहां तक भाषा शैली वाक्य विन्यास शब्द संयोजन का सवाल है, कहानियों के माध्यम से लेखक का पूरा फोकस उत्तराखंड के परिपे्रक्ष पर केन्द्रित रहता है, जो उनकी अपनी माटी अपनी थाली के प्रति जबावदेही भी तय करता है।

उनके लेखन के प्रति अटूट आस्था व साधना का परिणाम है कि वे निरंतर लेखन कार्य में संलग्न रहते हुए 20 किताबें प्रकाशित कर चुके हैं। पाठक भी प्रतीक्षारत रहते है कि अगली किताब किस विषय पर आने वाली है। इस प्रकार का जुनून पाठक और लेखक के रिश्ते को और भी प्रगाढ़ कर देता है, जो किसी भी लेखक के लिए सबसे बड़ी पूंजी होती है। यही उनकी साहित्य साधना की सबसे बड़ी सफलता को प्रभावित करेगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

IFWJ के पत्रकारों का सिस्टम के विरुद्ध अनिश्चितकालीन धरना

ईद मिलन एवं सैफी सम्मान समारोह में दिखी एकता की मिसाल,संस्थाओं को किया गया सम्मानित

ईद मिलन एवं सैफी सम्मान समारोह 5 अप्रैल को दिल्ली में

स्वर्ण जयंती पर ‘उत्कर्ष’ अनुशासन, शिष्टाचार और उत्कृष्टता का संगम

फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने सशक्त नारियों में सिलाई मशीन वितरित की

उत्तराखंडी फिल्म “कंडाली” का पोस्टर विमोचन समारोह दिल्ली में होगा आयोजित

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन,सामाजिक सुरक्षा को लेकर उठी आवाज

जयपुर बाल महोत्सव में 15 अप्रैल तक कर सकते है फ्री रजिस्ट्रेशन

30+ स्टार्टअप्स,एक विज़न : हेल्थ एक्सचेंज 2026 से हेल्थ इनोवेशन को नई दिशा

आर्च कॉलेज ऑफ डिज़ाइन का 26वाँ स्थापना दिवस : वूमेन शिल्पियों को एक्सीलेंस अवार्ड