13,14,15 सितम्बर को प्रगतिशील लेखक संघ का राष्ट्रीय सम्मेलन होगा जयपुर में

• विभिन्न राज्यों से हिन्दी, उर्दू और 20 से अधिक भारतीय भाषाओं के लेखक लेंगे भाग • ब्रिटेन, कनाड़ा, अमेरिका, नेपाल आदि से भी जुटेंगे लेखक गुलाबी शहर में।  37 साल बाद अपने आपको दोहराएगा इतिहास इससे पहले जयपुर में 1982 में हुआ था अधिवेशन। विभिन्न भारतीय भाषाओं के पोस्टर हुए जारी।


जयपुर। देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठन 'प्रगतिशील लेखक संघ' का राष्ट्रीय सम्मेलन 37 साल बाद जयपुर में होने जा रहा है। आगामी 13, 14, 15 सितम्बर 2019 को होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। देश के लगभग 20 राज्यों के साथ ही ब्रिटेन, कनाड़ा, अमेरिका, नेपाल आदि कई देशों के प्रगतिशील परंपरा से जुड़े 400 से अधिक लेखक-कलाकार–बुद्धिजीवी इसमें भाग लेंगे। | इस सम्मेलन में तमिल, तेलुगू, मलयालम, पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली, उड़िया, असमिया, मणिपुरी आदि 20 से अधिक भाषाओं के लेखक शामिल होंगे। विभिन्न भारतीय भाषाओं के पोस्टर आज जयपुर में जारी किए गए।


 गौरतलब है कि प्रगतिशील लेखक संघ का गौरवशाली इतिहास रहा है। जिसकी स्थापना 1936 में मुंशी प्रेमचंद की अध्यक्षता में हुई थी। देश के अनेक महान लेखक इस संगठन से जुड़े रहे हैं, जिनमें कैफी आजमी का नाम भी शामिल है। महान शायर कैफी आजमी का यह जन्म शती वर्ष होने के कारण प्रगतिशील लेखक संघ का राष्ट्रीय सम्मेलन उन्हें समर्पित रहेगा। उनकी पत्री अभिनेत्री शबाना आजमी और गीतकार दामाद जावेद अख्तर को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है।


 उल्लेखनीय है कि स्वाधीनता आंदोलन के समय लेखकों को स्वातंत्रय-चेतना से जोड़कर जनता के लिए लिखने की प्रेरणा देने के लिए प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) की पहली बैठक 1935 में लंदन में हुई थी, बाद में 1936 में लखनऊ में लेखक संघ की स्थापना के लिए पहला सम्मेलन हुआ ।।, जिसकी अध्यक्षता मुंशी प्रेमचंद ने की थी। कालांतर में हिंदी और भारतीय भाषाओं के सभी बड़े लेखक इस आंदोलन से जुड़ते चले गए, जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर हसरत मोहानी, जोश मलीहाबादी, फैज अहमद फेज, प्रो. अहमद अली, कृश्न चदर, सआदत हसन मंटो, राजेंदर सिंह बेदी, अमृता प्रीतम, गजाज लखनवी, साहिर लुधियानवी, कैफी आजमी, भीष्म साहनी, विजयदान देथा, फिराख गोरखपुरी, इस्मत चुगताई, बलराज साहनी, नामवर सिंह, राहुल सास्कृत्यायन आदि प्रमुख हैं। इनके अलावा सभी भारतीय भाषाओं में प्रतिशील आंदोलन का पिछले आठ दशकों से गहरा प्रभाव रहा और सभी भाषाओं में अनेक महत्वपूर्ण लेखक प्रगतिशील परंपरा के वाहक बने। राजस्थान में भी कन्हैया लाल सेठिया, गजानंद वर्मा, जनकवि गणेशी लाल व्यास 'उस्ताद', मनुज देपावत, मदन डागा, रांगेय राघव, हरीश भादाणी, लक्ष्मीकुमारी चंडावत आदि लेखकों ने प्रगतिशील परंपरा का नेतृत्व किया।


प्रगतिशील लेखक संघ का राष्ट्रीय सम्मेलन इससे पहले 1982 में जयपुर के रवींद्र मंच पर हुआ था जिसमें देश-विदेश के अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकार आए थे।


इस राष्ट्रीय सम्मेलन को विशिष्ट बनाने के लिए राजस्थान प्रलेस की टीम जुटी हुई है। तीन दिन के सम्मेलन में देश, दुनिया, साहित्य और समाज के विभिन्न मुद्दों पर लेखक विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श करेंगे। इसके साथ ही नृत्य, संगीत, नाटक, सिनेमा के माध्यम से भी शामों को सजाया जाएगा।


 


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