दुनिया भर में बहरेपन की समस्या से पीड़ित 466 मिलियन लोगों में से 34 मिलियन बच्चें हैं


नयी दिल्ली - ब्रेट ली का अनुरोध बच्चों की सुनने की क्षंमता को स्वस्थ रखने पर दिया जाये ध्यान, भारत में 63 मिलियन से ज्यादा लोग बहरेपन की समस्याओं से पीड़ित. हर साल भारत में पैदा होने वाले एक लाख बच्चों से ज्यादा या हर पांच मिनट में एक बच्चे को जन्म से ही सुनने में समस्याएं होती हैं।  भारत में जनम लेने वाले हर एक हज़ार बच्चों में से चार बच्चों को बहरेपन की गंभीर समस्या होती है। 


विश्व स्वस्थ संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में बहरेपन की समस्या से पीड़ित 466 मिलियन लोगों में से 34 मिलियन बच्चें हैं.विश्व स्वस्थ संगठन का अनुमान है की यह समस्या अगर इसी तरह से बढ़ती रही तो वर्ष 2050 तक विश्व भर में यह संख्या दुगुनी हो कर 900 मिलियन से भी जयदा होगी।  नयी दिल्ली के ऑल इण्डिया इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस [ एम्स ] के सहयोग से लिटिल थियटर ग्रुप आडिटोरियम में आयोजित किये गए इस विशेष कार्यक्रम में कॉक्लियर के ग्लोबल हियरिंग एम्बेस्डर और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाडी ब्रेट ली ने बच्चों के माता पिता और सरकार, अधिकारीयों से अनुरोध किया की बहरेपन की समस्याओं पर खसकर बच्चों में सुनने की समस्याओं पर जियादा ध्यान दिया जाये।  

 

एनसीआर के सभी अस्पतालों में यूनिवर्सल न्यूबोर्न हियरिंग स्क्रीनिंग [ UNHS ] को अनिवार्य करने पर ब्रेट ली लोगों के बीच च्चर्चा और जागरूकता को बढ़ावा दे रहे हैं।  दिल्ली में सुनने की क्षमता के स्वास्थय से जुडी चर्चा में ब्रेट ली के साथ दिल्ली के कई एक्सपर्ट और सीनियर ऑफिसर्स - प्रोफ़ेसर डॉ० एस० सी० शर्मा [ ENT स्पेशलिस्ट AIIMS ] और प्रोफ़ेसर अलोक ठाकर [ ENT स्पेशलिस्ट AIIMS ] भी उपस्थित रहे। 

इस अवसर पर ब्रेट ली ने कहा कि पीड़ितों की संख्या इतनी ज्यादा होने के बावजूद सुनने की क्षमता को स्वस्थ रखने के बारे में जागरूकता अभी भी काफी कम है।  पिछले पांच सालों से मैं भारत के विभिन्न क्षेत्रों जाकर जागरूकता बढ़ा रहा हूँ, बहरेपन की समस्याओं से बच्चों के भविष्य पर कितने बुरे असर हो सकते हैं उनके बारे में जानकारी दे रहा हूँ।  यूएसए ,सिंगापुर ,आस्ट्रेलिया और यूके की तरह UNHS को अनिवार्य कर देना चाहिए। 

 

2002 में 58वे नेशनल सेम्पल सर्वे में भारतीय परिवारों में विकलांगता के बारे में सर्वेक्षण किया गया और पाया गया कि बहरेपन की समस्या यह दूसरी सबसे जियादा पाई जाने वाली विकलांगता है।  साथ यह भी पाया गया कि ग्रहणशीलता में कमी का यह सबसे बड़ा कारन है।  2011 की जनगणना के अनिसार दिल्ली में 34000 से जियादा लोग गंभीर बहरेपन से पीड़ित थे। वर्तमान में उपलब्ध सर्वे की ताज़ा जानकारी के अनुसार यह संख्या काफी जीयदा हो सकती है। 

बचपन में ही जल्द से जल्द सुनने की क्षमता  जांच करवाना जरुरी है इस मुद्दे पर जोर देते हुए प्रोफ़ेसर डॉ० एस० सी० शर्मा [ ENT स्पेशलिस्ट AIIMS  ] ने बताया कि सुनने की क्षमता यह मनुष्य की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक है और अगर इसमें कोई कमी हो तो सौभाग्य से उस पर इलाज किये जा सकते हैं।  जन्म से ही बेहरा बच्चा अपनी पूरी ज़िन्दगी वैसे ही गुजारता हुआ देखना बहुत दुखदायक होता है। ब्रेट ली ने कहा कि किसी को भी जिंदगी भर सन्नाटा न सहना पड़े।  समस्या की जल्द से जल्द पहचान और समय पर सही इलाज से यह बच्चे भी अपनी जिंदगी का पूरा मजा ले सकते हैं।  

 

इस मुद्दे पर जोर देते हुए प्रोफ़ेसर अलोक ठाकर [ ENT स्पेशलिस्ट AIIMS ] ने कहा कि बच्चा 6 महीने का होने से पहले ही जल्द से जल्द निदान कर के सही इलाज किये जाएँ तो बच्चे का भाषिक विकास बेहतर होता है। 61 सरकारी प्रसूति केंद्रों में यूनिवर्सल न्यूबोर्न हियरिंग स्क्रीनिंग [UNHS] को लागू  प्रयासों में केरल बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और डॉ शर्मा मानते हैं कि दिल्ली भी इसी तरह आगे बढ़ सकता है।  आज हमारे देश में केरल यह एकमात्र राज्य है जहां सभी सरकारी अस्पतालों में UNSH को 98% सफलता मिली है।  

 

 

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