विश्वविद्यालय में गीता पारायण का भव्य कार्यक्रम मनाया जा रहा है

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली - कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा है कि विश्व लोकप्रियता तथा उसके आकर्षण के अनूठे केन्द्र बिन्दु ,दर्शन ,आध्यात्म तथा जीवन प्रबंधन चिन्तन के अनुपम व्यक्तित्व भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का ज्ञान मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को दी थी । प्रो वरखेड़ी ने आगे कहा कि गीता जयन्ती के इसी पावन दिवस पर दुनिया के इस प्रख्यात ग्रन्थ गीता का वाचन करने वालों के जीवन में सदा सुख,शान्ति व समृद्धि होती है। लेकिन इसका भी ध्यान रहे कि इस जयन्ती का आयोजन सर्वदा गीता वाचन तथा पाठन का प्रतीकात्मक संदेश है ।

 संस्कृत विद्या अपनी अथाह ज्ञान राशि तथा पारायण संस्कार के कारण आज जीवन्त है जो मानव जीवन के विविध क्षेत्रों के द्वारों के लिए मार्ग प्रशस्त करती है।यह तोष का विषय है कि संस्कृत अनुरागी समाज विशेष कर गुरुकुलीय परम्परा का इसके संबर्धन तथा वैश्विकोन्मुखीकरण में महनीय योगदान है । इस विद्या के उन्नयन में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय Central Sanskrit University भी तत्पर होकर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है जिसमें हमारे छात्र छात्राओं की सक्रियता सर्वथा श्लाघनीय है । ऐसा वैज्ञानिक मानते हैं संस्कृत के सस्वर पाठ से शास्त्र तो मन मस्तिष्क में जीवन्त तो रमता ही है । 

साथ ही साथ शिराओं तथा धमनियों की भी स्वस्थ बनते हैं । इसका बहुत बड़ा कारण इसकी देवनागरी की लिखावट तथा उसका उच्चारण महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है । यही कारण है इस जयन्ती को सोत्साह मनाने के लिए विश्वविद्यालय में गीता पारायण का भव्य कार्यक्रम मनाया जा रहा है ।

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