महिला क सम्मान ही उनकी बाह्य जगत के सम्मान को भी सुनिश्चित करता है -प्रो वरखेड़ी

० योगेश भट्ट ० 
 जयपुर, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने अन्ताराष्ट्रिय महिला दिवस पर कहा कि महिला का घर में सम्मान ही उनकी बाह्य जगत के सम्मान को भी सुनिश्चित करता है और इस भावना से ही वैश्विक स्तर पर इस विश्व दिवस की सार्थकता साबित हो सकती है । वरखेड़ी ने यह बात केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जयपुर परिसर में चल रहे अखिल भारतीय संस्कृत नाट्य महोत्सव के दौरान अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस से जुड़े एक समारोह में यह वक्तव्य दिया । उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की यह आधी आबादी पितृ सत्तात्मक समाज के टूटते बंधन से अब यह स्त्री समाज पुरुष प्रधान समाज का कदापि मुखापेक्षी नहीं दिखता है ।

 स्त्री समाज की आत्मनिर्भरता इसलिए भी बहुत ही अधिक बढ़ी है क्योंकि देश के विविध क्षेत्रों के विकास में वे अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही हैं । साथ ही साथ उन्होंने अपनी पहचान गृह पत्नी की जगह अब गृह निर्माणकर्त्री के रूप में भी बनाया है । उन्होंने यह भी कहा कि सीएसयू के हिमाचल प्रदेश स्थित परिसर में इस वर्ष महिला अध्ययन केन्द्र का नाम पूर्व केन्द्रीय मन्त्री तथा इस विश्वविद्यालय की उन्नति में अहर्निश सेवा करने वाली और नारी सशक्तिकरण के ज्वलन्त प्रतीक श्रीमती सरोजनी महिषी महिला अध्ययन केन्द्र ,सीएसयू के गठित समिति ने रखा है । 

 भारतीय संस्कृति में अर्धनारीश्वर की जो आध्यात्मिक तथा दार्शनिक स्थान प्राचीन काल से ही रहा है । स्त्री सम्मान के इस प्रबल भावनाको सिंचित करने में में शिक्षण संस्थानों की महत्त्व की भूमिका होनी चाहिए जिससे लोकल से वोकल की भावना और सुदृढ़ होगी । प्रो बनमाली बिश्बाल ,डीन अकादमी ने कहा कि सीएसयू स्त्री विमर्श के गुणात्मक चिन्तन को ले कर अग्रसर है । प्रो मदन मोहन झा ,डीन छात्र कल्याण का भी मानना था कि छात्राएं भी अपने विश्वविद्यालय के उत्कर्ष करने में संलग्न हैं ।

ये छात्र छात्राएं आगे चल कर व्यापक स्तर पर महिला सम्मान तथा इस भावना को और संबलित करेंगी । कार्यक्रम निदेशक ,प्रो मधुकेश्वर भट ने इस बात पर जोर देते यह कहा कि भारतीय सभ्यता में स्त्री तथा पुरुष विकास रुपी रथ के दो चक्कों की तरह समादृत हैं । लेकिन बाह्य आक्रमण आदि के कारण इसके मूल्यबोध में अवश्य स्खलन थोड़ा दिखा । लेकिन समय आ गया है कि भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ वेद तथा पुराणों आदि में जो महिला को एक अजस्र शक्ति के रूप में मान्यता रही है ,

उसे भारतीय ज्ञान परम्परा से पुनर्पाठ करने की आवश्यकता है ,ताकि औपनिवेशिक मिथक का परिमार्जन हो सके । कुलसचिव प्रो आर.जी. मुरली कृष्ण ने कहा कि संस्कृत अपने संस्कारों के कारण स्वत: स्त्री सम्मान की बातों से स्फूर्त दिखती है । उपनिदेशक,प्रशासन,श्री कृष्ण कुमार के.टी.ने भी इस दिवस पर प्रसन्नता जताया । केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,जयपुर के निदेशक प्रो सुदेश शर्मा ने भी अन्ताराष्ट्रिय महिला दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला और अपने परिसर के महिला समाज तथा छात्र छात्राओं के योगदानों पर हर्ष जताया ।

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