रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हेतु MSME इकाइयों को दिया जाएगा बढ़ावा

० आशा पटेल ० 
जयपुर। भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स (बीसीसी, कोलकाता), राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री एवं रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में “रक्षा उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में एमएसएमई में उपलब्ध अवसर“ विषय पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। कार्यक्रम में राजस्थान चैम्बर के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने राजस्थान में रक्षा उत्पादन के विस्तार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि देश में लगभग 6.3 करोड़ MSME उद्यम हैं जिनका देश की GDP में लगभग एक तिहाई एवं निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अतः इस अनुपात को बढ़ाने के लिए गुणात्मक विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरण बनाने वाली इकाइयों को राजस्थान में प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है।

मुख्य वक्ता रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विकास के अतिरिक्त सचिव अनुराग बाजपेयी ने रक्षा उत्पादन में एमएसएमई को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत उपायों पर प्रकाश डाला। बाजपेयी ने प्रतिभागियों को अपने वर्चुअल उद्बोधन में भारत सरकार द्वारा विभिन्न रक्षा उत्पादन हेतु दी जाने वाली रियायतों तथा संभावनाओं के बारे में विचार रखे। अतिथि वक्ता रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप योजना अधिकारी (सामान्य) लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक सिंह नेगी ने कहा कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में MSME's को बढ़ाने की भारत सरकार की आगामी 10 वर्षों में संभावना, आयोजना तथा विकसित भारत की 2047 तक रक्षा उत्पादन में सहभागिता के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

आयुध भूषण बीसीसी की रक्षा उपसमिति के अध्यक्ष डॉ. राजीव चक्रवर्ती ने कहा कि रक्षा उत्पादन में DRDOकी भूमिका, योजनाओं तथा MSME का DRDO से Tie up के बारे में तथा लाभ के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की। वरिष्ठ सलाहकार एयरोस्पेस बलप्रीत सिंह ने सत्र की थीम का परिचय देते हुए एयरोस्पेस क्षेत्र के संभावनाओं तथा रक्षा मंत्रालय द्वारा विधिक तथ्यों तथा उससे संबंधित नियमों के फ्रेमवर्क की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। 
कर्नल राजीव तलवार कंसलटेंट र्स्पाटन इनिशियेटिव द्वारा बताया गया कि गत युद्धों में हथियारों की कमी तथा तकनीकी रूप से सक्षमता नहीं होने के कारण सैनिकों को अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2014 के पश्चात आयुध कारखानों द्वारा आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा से इनोवेशन तथा स्टार्टअप द्वारा 100 प्रतिशत तक स्थानीय स्तर पर हथियारों का निर्माण किया जा रहा है। जिससे दूसरे देशों से निर्यात कम हो सके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री अजिताभ शर्मा IAS, प्रमुख सचिव, उद्योग विभाग राजस्थान सरकार ने कहा कि स्थानीय Stake Holders के साथ चर्चा कर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में लगी हुई MSME's इकाइयों को सहभागिता के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर राजस्थान चैंबर के सदस्य, विभिन्न MSME इकाइयों के प्रमुख तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अंत में राजस्थान चैम्बर के उपाध्यक्ष ज्ञानप्रकाश ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में कार्यरत या आगे आने वाली इकाइयों की सहभागिता हेतु राजस्थान सरकार के साथ नीति निर्माण एवं MSME को जोड़ने में सहयोग करेगा

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