केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय में आकादमिक समझौता

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली -  केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के बीच एक मेमोरेंडम औफ अंडरस्टैंडिंग किया गया । इसमें सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुकान्त कुमार सेनापति भी उपस्थित रहे । साथ ही साथ विशेष आमन्त्रित अतिथि के रुप में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय , दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो रमेश कुमार पाण्डेय भी उपस्थित रहे । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो वरखेड़ी ने की ।
इस आकादमिक समझौता का (मेमोरेंडम औफ अंडरस्टैंडिंग) लक्ष्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संकाय सदस्यों ,शोध छात्र तथा आकादमिक संसाधनों आदि का आपसी उन्नयन करना तथा अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आदि का आयोजन भी करना होगा । यह समझौता पांच वर्षों के लिए किया गया है । कुलपति प्रो वरखेड़ी ने प्रसन्नता अभिव्यक्त करते कहा कि वर्तमान सरकार सबका साथ सबका विकास की बात जो कहती हैं 

,उसी को लक्ष्य में रख केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली देश के विविध राज्यों में अवस्थित शैक्षणिक संस्थानों विशेष कर पारम्परिक विश्वविद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ ऐसे नवाचारी उपक्रम को मूर्त रुप दे रहा है ,ताकि संस्कृत विद्या का बहुआयामी युगीन अर्थवत्त सिद्ध हो सके । प्रो वरखेड़ी ने यह भी कहा कि यह बहुत ही हर्ष का विषय है केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय इस तरह का उपक्रम गुजरात राज्य में प्रथम बार करने जा रहा है ।

कुलपति प्रो सेनापति ने कहा कि भारत सरकार ने भारतीय ज्ञान परम्परा (आई. के .एस.) को प्रकाश में लाने का जो सार्थक प्रयास कर रही है । उसी दिशा में सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय भी , सोमनाथ ट्रस्ट के सहयोग से आगे बढ़ना चाह रहा है । आगे प्रो सेनापति ने यह भी कहा कि इस लक्ष्य की पूर्ति में कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी के मार्गदर्शन में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी । उन्होंने कहा कि ऐसाआकादमिक करार अभी तक सोलह संस्थानों से किया जा चुका है जिनमें चार विदेशों की संस्थानों से भी गयी है ।

प्रो रमेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली अपने यशस्वी कार्यो से न केवल भारत ,अपितु दुनिया से जुड़ता दिख रहा है और इसके कुलपति प्रो वरखेड़ी इसके लिए बौद्धिक तथा भौतिक दोनों संसाधनों को संस्कृत के विकास के उपलब्ध करवाने में सजगता से लगे हैं । कुलसचिव ,प्रो आर.जी. मुरली कृष्ण ने इस ऐतिहासिक आकादमिक समझौता के कार्यक्रम का परिचयात्मक चर्चा के साथ अतिथियों का वाचिक स्वागत किया तथा डा विजय दाधीच ने मंच का संचालन किया ।

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