दिल्ली के पालम गांव एक्सटेंशन के लोगों का जीवन बना नरक : सोलंकी

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली - पालम गांव की सड़कों की बदहाली पर पूरे इलाके के लोग अपने आप को बेबस समझने लगे हैं क्योंकि इनकी सुध लेने वाला कोई भी संबंधित संस्था व जन प्रतिनिधि आगे नहीं आ रहे है। सन 2022 में पाइप लाइन डालने के बाद सीवर के मेंन होल की ऊंचाई बढ़ा दी गई ताकि सड़क को लेवल में किया जाए लेकिन सड़क कटिंग का फंड पता नही कहां गया जबकि सड़क नहीं बना और वाहन गिरते पड़ते चलते रहे हैं यहां तक स्थानीय निवासियों की कई शिकायतो के बाद भी पानी की लाइन डालने के बाद भी घरों से कनेक्शन नहीं दिया गया है 

जिससे पुरानी लाइन से सीवर का पानी पीने को लोग मजबूर। अब आलम ये है कि जी 23, पालम एक्सटेंशन से सत्यनारायण मंदिर तक लोग पैदल भी नहीं चल सकते और स्कूटर मोटर साइकिल का गिरना आम बात हो गया है। शिव मंदिर धर्मशाला के पीछे सीवर लाइन नीचे कर दी और सत्यनारायण मंदिर एवम अन्य गलियों में ऊंची डाली गई जिससे यह लगभग 200 मीटर के टुकड़े की वजह से ग्राम वासियों का जीना रहना दुर्भर हो रखा है जिसके लिए उन्होंने कई बार दिल्ली जल बोर्ड एसीई एम 9 को शिकायत की एवम इसका टेंडर भी छुटा लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ जिससे स्थानीय निवासियों की जिंदगी नरकीय व दयनीय बनी हुई है।

स्थानीय निवासी, रामकिशन भवरिया ने बताया हम सालों से इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों को करते आ रहे हैं फिर भी इस पर कोई करवाई नहीं हुई अब इससे बच्चे बुजुर्ग अस्थमा का शिकार बनते जा रहे है एवम रहना दुर्भर हो गया है। अंबेडकर भवन के प्रधान व आरडब्ल्यूए प्रधान किशन कुमार तवंर ने बताया कि इस समस्या से गांव के सभी निवासियों को कष्ट उठाना पड़ रहा है।

पालम गांव निवासी समाज सेवी फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के चेयरमैन रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि 1400 वर्ष पहले अस्तित्व में आए 52 गांवों के बीच विख्यात गांव जहां दादा देव के प्राकट्य के बाद से ही सुर्खियों में रहा है तथा इसी गांव की जमीन में द्वारका उपनगर को बसाया गया है, दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारी पालम गांव के प्रति इतने उदासीन क्यों है।

उन्होंने कहा कि लगभग साठ हजार आबादी वाले इस शहरी गांव को अभी तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सड़कें जर्जर है।सीवर जाम व ओवर फ्लो रहता है एवम जल बोर्ड के सभी संबंधित अधिकारी किसी की नहीं सुनने की कसमें खा रखे हैं तथा चयनित जन प्रतिनिधि इन मामलों में आंखे कान बंद कर रखे हैं। सोलंकी ने जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सोमनाथ भारती एवम जल मंत्री आतिशी से मांग की है कि इस गांव की गंभीर समस्या का तत्काल समाधान कराया जाए।

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