राष्ट्रवाद के बिना राम राज्य की परिकल्पना नहीं की जा सकती : शैलेंद्र ठाकुर

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली - "राष्ट्रवाद" संस्था द्वारा दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में "राष्ट्रवाद से राम राज्य" गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रवाद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रितेश तोमर ने की। इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में पवन सिन्हा , शैलेंद्र ठाकुर , सुनील भराला ( राज्यमंत्री उतर प्रदेश सरकार ) रहे ।
मुख्य वक्ता शैलेंद्र ठाकुर ने राष्ट्रवाद की देश को जरूरत क्यों है, बताते हुए प्रधानमंत्री की राष्ट्रवादी सोच, उनके चरित्र और कार्यपद्धति का उदाहरण देकर उनके संघर्ष को विस्तार से बताया। 
आज पूरा विश्व भारत की तरफ आशा और विश्वास से देख रहा है और मोदी जी से कह रहा है कि आप पूरे विश्व की अगुवाई करो।  शैलेंद्र ठाकुर ने भाजपा सरकार की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला, साथ ही राम राज्य की विशेषता बताई। वर्तमान भारत के भविष्य को राम के चारित्र के साथ- साथ इजराइल के हाइफा युद्ध में भारत का इजराइल की आजादी में योगदान, महाराणा प्रताप के स्वाभिमानी संघर्ष को विस्तार से बताया ।  ठाकुर ने बताया कि राम राज्य की अवधारणा आधुनिक युग में आदर्श शासन या सर्वोत्कृष्ट शासन के रूप में है।

राम राज्य ही वास्तविक लोकतंत्र है, जहाँ कमजोर से कमजोर नागरिक के लिए भी त्वरित और सरलता से न्याय उपलब्ध हो परन्तु आधुनिक समय में राष्ट्रवाद के बिना राम राज्य की परिकल्पना करना संभव नहीं है क्योंकि राष्ट्रवाद ही वह विचारधारा है जिसमें लोगों की किसी राष्ट्र या देश के प्रति समर्पण और निष्ठा निहित है। जब देश के नागरिकों में राष्ट्र के प्रति समर्पण और निष्ठा की भावना होगी तो एक स्वस्थ, ईमानदार समाज की स्थापना हो सकती है , जो राम राज्य की स्थापना की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम होगा। श्री शैलेंद्र ठाकुर ने कहा कि स्मरण रहे, राष्ट्रवाद में समर्पण और निष्ठा किसी भी व्यक्तिगत हित से सर्वोपरि और महत्वपूर्ण है।

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