हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की सच्ची वाहक हैं : सुमित्रा गुहा

० योगेश भट्ट ० 
फरीदाबाद - सुप्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से अलंकृत विदुषी सुमित्रा गुहा के सुमधुर हंस ध्वनि ट्रस्ट ने उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा अंश आयोजित एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल फरीदाबाद सेक्टर-19 एवं संस्कार भारती हरियाणा के सहयोग से स्कूल के सभागार मे शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारत सरकार की संयुक्त संस्कृति सचिव (आईएआरएस) अमिता प्रसाद सरभाई, 
सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. दयानंद वत्स भारतीय विशेष विशिष्ठ अतिथि, डीपीएस फरीदाबाद के प्रिंसिपल शिक्षाविद् अनिल कुमार एवं नवनियुक्त प्रिंसिपल संगीता चक्रवर्ती,संस्कार भारती के मंत्री विजय ने विशिष्ठ अतिथि के रुप में उपस्थित होकर दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया उसके पश्चात विदुषी सुमित्रा गुहा के शिष्यों द्वारा गुरु वंदना प्रस्तुत किया गया। विदूषी सुमित्रा गुहा ने सभी अतिथियों ओर प्रस्तुति दे रहे सभी कलाकारों को शाल, स्मृति चिन्ह ओर पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर सुमित्रा गुहा की शिष्याओ सुचिष्मिता चटर्जी, रीना माथुर एवं डॉ रूमा गांगुली द्वारा विदुषी सुमित्रा गुहा का राग हंसध्वानी में रचा हुआ द्रुत तीनताल का बंदिश (कैसे जाऊं तुम्हरे पास) पेश किया उसके पश्चात उन्हीं का रचा हुआ एक प्रसिद्ध मीरा भजन (मैं तो सावरे रंग रांची) प्रस्तुत किया एवं तीनों शिष्याओ का गायन सराहनीय था। उसके पश्चात विदुषी सुमित्रा गुहा की युवा प्रतिभावान शिष्या रिया भट्ट ने उत्तराखंड का खूबसूरत लोक गीत प्रस्तुत किया।

 अमेरिका से पधारी सितार वादक रेशमा श्रीवास्तव (उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मानित) ने राग पुरिया धनश्री में अद्भुत प्रस्तुति दिया उसके बाद एक लोक संगीत भी प्रस्तुत करके दर्शकों को भावविभोर कर दिया।  पद्मभूषण सम्मानित पंडित साजन मिश्रा एवं उनके पुत्र स्वरांश मिश्रा ने राग चारुकेशी में दो बंदिश सुनाई। स्वरांश मिश्रा द्वारा रचित अघोरी चालीसा प्रस्तुत करके दर्शकों का भावविभोर कर दिया पंडित राजन सजन मिश्रा का गाया फिल्म गीत भी प्रस्तुत किया जिससे दर्शक आनंदित हो उठे। सुमन चटर्जी एवं आशीष मिश्रा तबले पर और हारमोनियम पर सुमित मिश्रा की संगत उत्कृष्ट थी।

कार्यक्रम का समापन विदुषी सुमित्रा गुहा द्वारा सभी कलाकारों को सम्मानित करने के साथ हुआ तथा उन्होंने कार्यक्रम को आंशिक रूप से प्रायोजित करने और समर्थन देने के लिए उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र तथा इस सुंदर अवसर पर सहयोग देने के लिए डीपीएस के प्रिंसिपल, उप-प्राचार्य और स्टाफ के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की तथा संस्कार भारती को उनके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भगवान कृष्ण का एक श्लोक साझा किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि जहां भी उनके भक्त उनके बारे में गाते हैं, वहां उनकी उपस्थिति सुनिश्चित होती है। विदुषी सुमित्रा गुहा और उनका संगठन भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय संगीत और अन्य प्रदर्शन कलाओं को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। यह उसी भावना से जुड़ा एक और प्रयास था।

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