जागते रहो भारत यात्रा' पहुंची जयपुर,गोकुल भाई की समाधि पर की पुष्पांजलि

० आशा पटेल ० 
जयपुर | महिला सुरक्षा एवं सम्मान के लिए समर्पित ' जागते रहो भारत यात्रा' दुर्गापुरा जयपुर स्थित समग्र सेवा संघ परिसर में पहुंची । राजस्थान के गांधीवादी गोकुल भाई भट्ट की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पण के बाद यात्रा टीम में शामिल सदस्यों राजेन्द्र कुमार यादव, इंसाफ खाँ जुनेजा एवं जम्मूबेन ने समग्र सेवा संघ के सदस्यों एवं जयपुर के जागरूक नागरिकों के साथ संवाद किया । वापी गुजरात की जम्मूबेन ने सुंदर गीत सुनाया । समग्र सेवा संघ के अध्यक्ष सवाई सिंह ने कहा कि सार्वजनिक मुद्दों से किनारा करने के दौर में आधी आबादी की चिन्ता करना स्वागत योग्य है।
 जागते रहो भारत यात्रा का नेतृत्व कर रहे हरियाणा से राजेन्द्र यादव ने बताया कि महिलाओं के साथ आए दिन होने वाले जघन्य अपराध की पीड़ा से उपजे संकल्प से नब्बे दिन के जागरण अभियान में सामुदायिक संस्थाओं का मिल रहा साथ हमारी शक्ति बन चुकी है। छत्तीसगढ़ की नौ साल की बालिका के शव के साथ हुए दुष्कर्म मामले में उच्च न्यायालय की टिप्पणी की इस अपराध के लिए सजा का कोई क़ानून नहीं है, सभ्य समाज को झकझोर देने वाली स्थिति है।
इस दर्द में देश भर में तीन महीने घूम घूम कर समाज और शासन को जगाना ही जागते रहो भारत यात्रा है। मुजीब आजाद ने कहा कि महिलाओं को पुरुष से नहीं पुरुष की पाशविक वृत्ति से सुरक्षा की जरूरत है। मोबाइल का अस्सी प्रतिशत डेटा पोर्नवेबसाइट पर खर्च होना हम सबके लिए गम्भीर चेतावनी है। देश के अलग अलग राज्यों से शामिल कृष्ण सिंह, जम्मूबेन, शरद शबल और इन्साफ प्रथम चरण की मुहिम का हिस्सा हैं। कहा कि । संवाद में समग्र सेवा संघ के अध्यक्ष सवाई सिंह, जन सम्प्रभुता संघ के अनिल यादव, उमेश चन्द शर्मा, गोपाल शरण, गोपाल मोदानी, मुजीब आजाद,राजेन्द्र कुम्भज,मंगल देव पारीक,मौसूफ खान, डॉक्टर अवध प्रसाद , कपिल सिंह सांखला, डॉक्टर अमित कुमार, एडवोकेट शशांक, दीपक धीर, रूपेंद्र सिंह चंपावत आदि ने भाग लिया।
 महिला सुरक्षा एवं सम्मान हेतु 8 मार्च को राजस्थान के माउन्ट आबू से प्रारम्भ की गई ये यात्रा देश के 20 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश,गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड, पंजाब , हरियाणा से होकर गुजरेगी तथा 7 जून को दिल्ली में 11000 किलोमीटर चलने के बाद इस यात्रा का समापन होगा । सामाजिक भागीदारी से संचालित की जा रही इस यात्रा का उद्देश्य समाज और शासन की स्मृति को जगाए रखते हुए दोनों स्तर पर भारत को इस अपराध से मुक्ति की युक्ति निकालने के लिए सोचने पर मजबूर करना और उस दिन की कल्पना करना है जब रात के अंधेरे में एक महिला अथवा बालिका निश्चिन्त भाव से घूम सकेगी।

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