जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के सरकारी कोष को लुटाने की घोषणा की गई : डोटासरा

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर। विधानसभा में वित्त एवं विनियोग विधेयक पर चर्चा पर मुख्यमंत्री के अभिभाषण पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए भाषण में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तारीफ केवल अपनी पर्ची को कायम रखने का प्रयास मात्र है। उन्होंने कहा कि एमएलए लेड फण्ड से आरएसएस द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर स्कूलों को पुर्नजीवित करने के लिए पहले 10 लाख रुपये राशि का प्रावधान गैर सरकारी संस्थान को सहायता उपलब्ध करवाने हेतु किया गया था जिसे बढ़ाकर 25 लाख करते हुए आम जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के सरकारी कोष को लुटाने की घोषणा की गई है।

 उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में सवा लाख पद खाली है उसमें से केवल 10 हजार पदों पर भर्ती की घोषणा ऊँट के मुंह में जीरे के समान है, इसी प्रकार अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संदर्भ में कोई घोषणा नहीं की गई जबकि इनकी समीक्षा के लिए समिति बना रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उपखण्ड, तहसील, उप तहसील, गिरदावर सर्किल, पटवार मण्डल आदि के पुर्नगठन के लिए सलाहकार समिति की घोषणा केवल इस आशय से की गई है कि आरएसएस व भाजपा के हारे हुए नेताओं को पर्दें के पीछे से दखल का मौका प्राप्त हो सके।

 उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी एवं करनी में अंतर है जिस कारण विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण एवं नॉन पेचेबल सड़कों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भाजपा विधायकों से तो लिए जा रहे है किन्तु जहां भाजपा विधायक नहीं है उन क्षेत्रों में विधानसभा चुनावों में हारे हुए भाजपा प्रत्याशी से प्रस्ताव लिए जा रहे है। उन्होंने कहा कि इन सड़कों हेतु प्रस्ताव विधायक से ही लिए जाएंगे, ऐसा कोई निर्देश सरकार ने जिलाधीश को प्रदान नहीं किया है जबकि विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा विधायकों से ही प्रस्ताव लिए जाने का कथन किया गया है।

 गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि राजस्थान को हरियाणा से यमुना का जल दिलवाने हेतु 100 दिन में डीपीआर बनाने की घोषणा भी मुख्यमंत्री ने ही की थी और स्वयं को भागीरथ बता कर स्वागत सम्मेलन करवाये थे किन्तु आज खुद की सरकार की पोल खोलते हुए प्रदेश की जनता को बताया कि 5 मार्च को हरियाणा सरकार द्वारा संयुक्त डीपीआर हेतु टास्क फोर्स का गठन हुआ है। उन्होंने कहा कि इस देरी के लिए मुख्यमंत्री ने आश्चर्यजनक एवं हास्यास्पद बहाना खोजा और अन्य प्रदेशों में व पार्टी कार्याें में व्यस्तता होने के कारण देरी होना बताया है।

 उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जानकारी नहीं है कि 1951 में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने आरएसएस के अभियान से परेशान होकर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दिया था और स्वयं बाबा साहेब ने अपने चुनाव की हार के लिए आरएसएस पर आरोप लगाये थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार प्रदेशवासियों को पट्टे नहीं दे रही है और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में सस्ती दर पर मिल रहे भू-खण्ड के पट्टों की योजना को भी समाप्त कर दिया गया है और अब पट्टों की जांच के लिए समिति का गठन करने की घोषणा से आमजन को पट्टा प्राप्त करने में एक बाधा और उत्पन्न कर दी है। 

उन्होंने कहा कि कॉन्स्टीट्यूशन क्लब का लोकार्पण पूर्ववर्ती सरकार द्वारा होने के बावजूद शुभारम्भ कार्यक्रम रखना उचित नहीं था किन्तु पूजा पाठ हेतु गृह प्रवेश कार्यक्रम से इसकी तुलना कहीं से भी तर्कसंगत प्रतीत नहीं होती है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने वैश्विक महामारी का सामना करते हुए प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रणी किया था किन्तु भाजपा सरकार के बजट घोषणाओं के अनुमानों के आधार पर ही मुख्यमंत्री अपनी पीठ थपथपाने का कार्य कर रहे है जबकि पिछले बजट की भी अनेक घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरी है।

 उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के शासन में करों में हिस्सेदारी, केन्द्रीय योजनाओं हेतु सहायता राशि के लिए प्रदेश के साथ केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा भेदभाव किया जाता था, किन्तु वास्तविकता यह है कि आज भी केन्द्र सरकार से कोई विशेष पैकेज राजस्थान की डबल इंजन सरकार प्राप्त करने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि राईजिंग राजस्थान और आईफा जैसे समारोह आयोजित कर राजस्थान सरकार ने प्रदेश की जनता के करोड़ों रुपये व्यर्थ खर्च कर दिए और इन आयोजनों में बदहाल व्यवस्थाओं पर मेहमानों ने ही सवालिया निशान भी उठाएं,

 उसके बावजूद मुख्यमंत्री इन आयोजनों को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे है और राईजिंग राजस्थान में एमओयू को लेकर जो तर्क मुख्यमंत्री दे रहे है जिसके तहत् सड़क किनारे डाबा खोलने वाले के साथ भी एमओयू करने को आतुर बता रहे है। यह राजस्थान की भाजपा सरकार की सोच और राईजिंग राजस्थान की वास्तविकता की पोल खोलने वाला कथन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने के कारण आचार संहिता लगने पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा गैस सिलेण्डर सब्सिडी का भुगतान नियमानुसार इस काल में नहीं हो सका जिसको लेकर मुख्यमंत्री अनर्गल आरोप पूर्ववर्ती सरकार पर लगा रहे है जबकि बजट और वित्तीय स्वीकृति पूर्ववर्ती सरकार द्वारा ही जारी हो चुकी थी।

 उन्होंने कहा कि वास्तविकता में भाजपा सरकार के शासन में वृद्धजन से लेकर समस्त सामाजिक सुरक्षा के तहत् दी जाने वाली पेंशन तीन से चार माह की देरी से दी गई है। उन्होंने कहा कि अभी गर्मियों में ही बिजली व पानी की अनुपलब्धता के कारण प्रदेशभर में हाहाकार मचा था तथा किसान आज भी सरकार द्वारा की गई एमएसपी पर बाजरे की खरीद की वादाखिलाफी से खिन्न है, आशा थी कि मुख्यमंत्री आज बाजरे की एमएसपी पर खरीद की घोषणा करते।

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