गोदरेज अवॉर्ड्स·साहित्यिक योगदान के लिए सीतांशु यशश्चंद्र और विनोद कुमार शुक्ल सम्मानित

० संवाददाता द्वारा ० 
मुंबई : गोदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप द्वारा 'लिटरेचर लाइव! द मुंबई लिटफेस्ट' का 16वां संस्करण संपन्न हुआ। इस आयोजन ने एक बार फिर मुंबई की पहचान भारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक राजधानी के रूप में मज़बूत की। तीन दिन चले इस उत्सव में भारत और दुनिया भर के 120 से अधिक प्रसिद्ध लेखकों, विचारकों और कलाकारों ने हिस्सा लिया।

गोदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप के चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर नादिर गोदरेज ने कहा, “साहित्य में हमारे समय की सच्चाई को समझने, सवाल करने, सुकून देने और जोड़ने की शक्ति होती है। लिटरेचर लाइव! द मुंबई लिटफेस्ट के माध्यम से हम सिर्फ कहानियों और विचारों का नहीं, बल्कि उस जिज्ञासा की भावना का उत्सव मनाते हैं जो नवाचार और प्रगति को प्रेरित करती है। हमें यह विश्वास दिलाता है कि रचनात्मकता चाहे वह विज्ञान में हो, व्यवसाय में या कला में अलग ढंग से सोचने के साहस से उत्पन्न होती है। 

उत्सव में नोबेल विजेता वेंकी रामकृष्णन, बुकर पुरस्कार विजेता शेहान करुणातिलका, पूर्व मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़, शशि थरूर, शोभा डे, जेरी पिंटो, ल्यूक कुटिन्हो, अनिंदिता घोष, स्वाति पांडे, परोमिता वोहरा और तारिणी मोहन सहित कई कलाकार शामिल हुए। एक विशेष इंस्टॉलेशन “लेटर्स टू द फ्यूचर” ने आगंतुकों को आने वाली पीढ़ियों के पाठकों और लेखकों के लिए अपनी आशाएँ साझा करने का अवसर दिया। इस वर्ष की चर्चाओं में विविधता, समावेशन, रचनात्मकता, भारतीय पहचान का विकास और सामाजिक बदलाव में कथाओं की शक्ति जैसे विषय प्रमुख रहे।

मुख्य आकर्षणों में गोदरेज लिटरेचर लाइव! अवॉर्ड्स भी शामिल रहा, जिसमें फिक्शन, नॉन-फिक्शन, बिज़नेस राइटिंग और नाटक लेखन में उत्कृष्टता को सम्मानित किया गया। उत्सव के सर्वोच्च सम्मान — पोएट लॉरेट अवॉर्ड और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सीतांशु यशश्चंद्र और विनोद कुमार शुक्ल को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किए गए।

फेस्टिवल की को- डायरेक्टर एमी फर्नांडीस ने कहा, “मुंबई लिटफेस्ट के 16वें संस्करण का यह आयोजन हर लिहाज से शानदार रहा। 15 वर्ष पहले पाठकों और लेखकों के एक छोटे से मिलन के रूप में शुरू हुआ था मुंबई लिटफेस्ट, और आज यह विचारों के एक जीवंत आदान-प्रदान में विकसित हो चुका है जो विधाओं और पीढ़ियों की सीमाओं को पार करता है। गॉदरेज इंडस्ट्रीज़ के सहयोग से हम इस भावना को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे साहित्य प्रासंगिक, समावेशी और मुंबई व दुनिया की सांस्कृतिक धड़कन से जुड़ा रहे।”

 इस वर्ष के लिटफेस्ट में एक्सेस फॉर ऑल संस्था की मदद से 15 से अधिक सत्रों को भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) में प्रस्तुत किया गया। संस्था ने बच्चों के लिए एक ज़ीन मेकिंग वर्कशॉप भी आयोजित की, जिसका उद्देश्य सहानुभूति और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना था। 

इसके अलावा, ओपन-एयर प्लाज़ा में एक सेंसरी-फ्रेंडली टेंट बनाया गया, जो न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों और अन्य प्रतिभागियों के लिए शांत और सहायक वातावरण प्रदान करता था — जिसमें स्पर्श-संवेदनशील सामग्री, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, शोर-नियंत्रण उपकरण और प्रशिक्षित सहयोगियों की मदद शामिल थी।

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