आत्मकथा "44 पिंजरे तोड़ के भागा कैदी" को राज्यपाल ने किया सम्मानित

० आशा पटेल ० 
लालसोट ( दौसा ) में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने प्रख्यात साहित्यकार प्रबोध कुमार गोविल को शिवना प्रकाशन सीहोर से प्रकाशित उनकी आत्मकथा "44 पिंजरे तोड़ के भागा कैदी" के लिए अनुराग साहित्य सम्मान समारोह में स्व.चिरंजी लाल तिवाड़ी स्मृति सम्मान 2025 से सम्मानित किया।
पुरस्कार स्वरूप उन्हें नकद राशि, शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। गोविल की आत्मकथा कुल चार खंडों में प्रकाशित हुई है। 528 पृष्ठीय इस अंतिम खंड में पहले के सभी खंड इज़्तिरार, लेडी ऑन द मून, तेरे शहर के मेरे लोग का समावेश है। मूल रूप से कथाकार, उपन्यासकार प्रबोध कुमार गोविल अब तक उपन्यास, कहानी,

 लघुकथा, कविता, संस्मरण निबंध नाटक बाल साहित्य आदि विधाओं में कई पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी कुछ किताबों के अंग्रेज़ी, उर्दू, सिंधी, असमिया, उड़िया, बांग्ला, मराठी तेलुगु राजस्थानी भाषाओं में अनुवाद भी प्रकाशित हुए हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी, बाल साहित्य अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान आदि से पहले भी सम्मानित किया जा चुका है।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि देश में विचार विभेद के चलते भ्रामक इतिहास लेखन भी हुआ है अतः आज के लेखकों की यह ज़िम्मेदारी है कि पाठकों को विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध कराएं ताकि साहित्य की गरिमा बनी रहे।

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