लोग जो मुझमें रह गए’ का इंडिया हैबिटैट सेंटर में हुआ लोकार्पण

० योगेश भट्ट ० 

नई दिल्ली। पाठकप्रिय युवा लेखक और यायावर अनुराधा बेनीवाल ने कहा कि यात्राएं आपको आज़ाद करती हैं। वे आदमी को उसकी बंधी-बंधाई जिंदगी के दायरों से बाहर नई अनदेखी अनजानी दुनिया से परिचित कराती है, जिससे आपकी दुनिया बड़ी होती है और आपका हौसला भी बढ़ता है, खुद पर भरोसा भी बढ़ता है।अनुराधा शुक्रवार शाम अपनी नई किताब ‘लोग जो मुझमें रह गए’ के लोकार्पण के मौके पर ये बातें कहीं। इस मौके पर उनसे सुपरिचित लेखक आलोचक सुजाता और मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने खासतौर पर बातचीत की। एक सवाल के जवाब में अनुराधा ने कहा ,

उन्होंने आगे कहा यात्राएं आपको आज़ाद करती हैं, वे आपको हदों को पार कर नई हदों तक पहुंचाती हैं ,आपके दायरे का विस्तार करती हैं,यात्रा का मतलब केवल एक जगह से दूसरी जगह जाना नही है। इसका मलतब उन लोगों, संस्कृतियों,रवायतों,मसलों को देखना –समझना और उनसे जुड़ना भी है ,जिनसे आप अब तक अनजान हैं। अनुराधा ने बताया कि इसीलिए उन्होंने अपनी नई किताब में उन लोगों को खासतौर पर जगह दी है जिनसे अपनी यायावरी के दौरान वे मिलीं और जिनकी जिंदगी के अनदेखे- अनजाने पहलुओं ने उनके दिल-दिमांग पर गहरी छाप छोड़ी। गौरतलब है कि ‘लोग जो मुझमें रह गए’ अनुराधा की दूसरी किताब है जो राजकमल प्रकाशन समूह के उपक्रम सार्थक से प्रकाशित हुई है। उनकी पहली किताब ‘आजादी मेरा ब्रांड’ भी यहीं से छपी थी,जिसने समकालीन साहित्य-जगत में खासी हलचल पैदा की थी।

कार्यक्रम में बातचीत के दौरान सुपरिचित लेखक आलोचक सुजाता ने कहा, ‘लोग जो मुझमें रह गए’ में अनुराधा ने जगहों के साथ-साथ वहां मिले लोगों के बारे में भी लिखा है। वे जिन जगहों से होकर गुजरी उन्हें शायद कोई भूल जाए पर उन जगहों पर जिन लोगों से वे मिली और जिनकी कहानियाँ उन्होंने दर्ज की उन्हें भूलना मुश्किल है। उनके एक सवाल पर अनुराधा ने कहा, यात्राओं में हमेशा आपको लोग मिलते हैं लोगों के साथ उनकी कहानियाँ मिलती हैं। तो मेरे पास ऐसी तमाम कहानियाँ हैं, जिनमें से कुछ मेने इस किताब में दर्ज की हैं। इसके लिए मुझे शोर्ट स्टोरी का फॉर्मट अच्छा लगा। वैसे ये फिक्शन नही था सच बातें थी,इसलिए एकदम कहानी भी नही हैं जो फिक्शन में होता है। उन्होंने कहा, यात्राओं में आप देखते हैं तो सवाल उठता है कि किसके के लिए देखते हैं,अपने लिए या दूसरों के लिए कि वे जान सकें कि आपने ये –ये चीजें देखी हैं।

अनुराधा ने कहा, यात्राएँ हमें महसूस करा देती हैं कि एक दुनिया के भीतर कई दुनियां हैं और एक देश के भीतर कई देश हैं। किसी का रहन –सहन या खानपान अलग हो सकता है पर वास्तव में हम सब एक हैं। विविधिताओं पर विशिष्टताओं को स्वीकार करना चाहिए। मीडियाककर्मी विश्लेषक विनीत कुमार ने कहा कि सुनना आजकल एक मुश्किल क्रिया है, लेकिन अनुराधा की किताब हमें सुनने के लिए विवश करती है।  इंडिया हैबिटैट सेंटर के गुलमोहर सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम मे श्रोताओं ने भी अनुराधा से कई सवाल पूछे। इससे पहले सुपरिचित रंगकर्मी प्रियंका शर्मा ने ‘लोग जो मुझमें रह गए’ के एक अंश का पाठ किया।कार्यक्रम में उपस्थित जनों का राजकमल प्रकाशन समूह के सीईओ आमोद महेश्वरी ने स्वागत किया। कार्यक्रम में राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी, संपादकीय निदेशक सत्यानन्द निरुपम विशेष रूप से उपस्थित थे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रताप नगर की 87 कॉलोनियों,औद्योगिक संकट और सांगानेर के विकास पर जनसुनवाई

स्पेशल ओलंपिक्स यूनिफाइड बास्केटबॉल 3x3 वर्ल्ड कप भारत ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

राजस्थान के सरकारी विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स हुए लामबंद

सांगानेर में सरकार की संवेदनहीनता से 87 कॉलोनियों पर संकट

कोटद्वार के चिल्लरखाल रोड निर्माण समस्या को लेकर 230 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दिल्ली पंहुचा पत्रकार

IFWJ के पत्रकारों का सिस्टम के विरुद्ध अनिश्चितकालीन धरना

पेंशनर सोसाइटी ने पेंशनर्स समस्या हल करने हेतु राज्यपाल से लगाई गुहार