महिला उद्यमी के सहयोग से 2030 तक भारत में 150 से 170 मिलियन रोजगार बढ़ेंगे

० नूरुद्दीन अंसारी ० 
ऽ विश्व बैंक की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार अर्थव्यवस्था की उत्पाद लाइन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देने से भारत का विकास दो अंकों में पहंुच सकता है ऽ हाल के एक अध्ययन से पता चलता है कि महिला उद्यमियों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद 18 प्रतिशत बढ़ाने की संभावना है ऽ महिला उद्यमी के सहयोग से 2030 तक भारत में 150 से 170 मिलियन रोजगार बढ़ेंगे

बंगलुरु, महिला उद्यमिता दिवस पूरी दुनिया में 19 नवंबर को मनाया जाता है। यह महिला उद्यमियों की उपलब्धियों का सम्मान करना है और अधिक से अधिक महिलाओं को उद्यमी बनने का हौसला देता है।
महिला उद्यमिता पूरी दुनिया में तेजी से उभर रही है। इसके कई लाभ हैं जैसे समाज पर सकारात्मक प्रभाव, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बेहतर होती सामाजिक-आर्थिक स्थिति। फिर भी महिला उद्यमी होने की अपनी तमाम चुनौतियाँ हैं जैसे कि फंड मिलने में कठिनाई, परिवार का समर्थन न होना, रोल मॉडल की कमी और कहीं आने-जाने में कठिनाई। हालांकि आज उनके लिए अवसर भी बढ़े हैं।
वाधवानी फाउंडेशन के भारत/एसई एशिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर संजय शाह ने महिला उद्यमिता दिवस 2022 पर बात करते हुए कहा, ‘‘महिलाओं की हमेशा से हमारे समाज में बुनियादी भूमिका रही है। लेकिन व्यापार जगत में उनकी भूमिका को अक्सर कम आंका जाता है। ऐसे में महिलाओं को उद्यमी बनने के दौरान काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वे फिर भी हमेशा विजयी रही हैं। महिला उद्यमी बढ़ने से कारोबार का माहौल बेहतर होता है और अन्य महिलाओं में भी उद्यमी बनने का हौसला बढ़ता है। इससे पूरी अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आती है। उद्यम जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के साथ यह अनुमान है कि 2030 तक भारत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 700 अरब डालर का योगदान और 150 से 170 मिलियन रोजगार दे पाएगा। 

महिला उद्यमी दिवस के अवसर पर हमें जिन्दगियां बदलने में महिला उद्यमियों के योगदान का सम्मान करना है। महिलाओं को बराबरी का दर्जा हासिल करने और आर्थिक विकास में योगदान देने के उनके प्रयासों की अहमियत समझते हुए यह प्रतिबद्धता करनी है कि महिलाओं को उद्यमी बनने के लिए जरूरी सभी संसाधन और उनके सपने साकार करने के लिए समर्थन देंगे  आज अधिक संख्या में इनक्यूबेटर और एक्सेलेरेटर सामने आ रहे हैं। ये विशेष रूप से शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को समर्थन और विकास करने का अवसर देते हैं और फिर उन्हें निवेश लायक बनाते हैं। ये महिला उद्यमियों को भी बड़ा अवसर देते हैं जो बिजनेस फ्रेमवर्क, मेंटरशिप और नेटवर्क और निवेशकों से संपर्क का लाभ उठा सकती हैं।

डिजिटल टेक्नोलॉजी का नया दौर महिला उद्यमियों को ऑनलाइन व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने का अधिक अवसर देता है। आज कई मल्टीपल सेलर सर्विसेज प्लेटफॉर्म हैं जिनके माध्यम से महिलाएं घर से ही न्यूनतम निवेश कर ई-कॉमर्स का काम शुरू कर सकती हैं। वाधवानी फाउंडेशन में वाधवानी आंटरप्रेन्यर के कार्यकारी उपाध्यक्ष राजीव वारियर कहते हैं, “उद्यमी महिलाएं सामाजिक और आर्थिक विकास की बड़ी शक्ति हैं। उन्हें खुद का व्यवसाय शुरू करने और फैलाने के लिए सशक्त किया जाए तो न केवल उन्हें और उनके परिवारों को बल्कि पूरे समुदाय और देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। 

वाधवानी फाउंडेशन और राष्ट्रीय उद्यमिता नेटवर्क पिछले दो दशकों से महिला उद्यमियों को सहयोग रहे हैं और हम आगे भी मेंटरशिप और नेटवर्किंग चैनल का विस्तार करंेगे, जरूरत के अनुसार संसाधन देंगे और महिलाओं को सबल बनाने का परिवेश बने इसके लिए नीति निर्माण की दिशा में भी काम करंेगे।’’
भारत में महिला उद्यमियों के लिए आज भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं पर धीरे-धीरे अवसर भी बढ़ रहे हैं। मेंटरशिप, सीड फंडिंग, सरकारी पहल और डिजिटल टेक्नोलॉजी सुलभ होने से भारत में महिला उद्यमियों के लिए स्टार्टअप शुरू करने का सबसे सुनहरा दौर भी यही है!

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