प्रभात, द टेंपल ऑफ आर्ट’ की सम्मोहक, संगीतमय प्रस्तुति ‘महाभारत’

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : बेंगलुरू के अग्रणी और विश्वप्रसिद्ध कला संस्थानों में से एक प्रभात, द टेम्पल ऑफ आर्ट ने नई दिल्ली में ‘महाभारत’ का शानदार और सम्मोहक लाइव प्रदर्शन कर मंच पर रंग जमा दिया। यह मंचन भारत और शरत के मार्गदर्शन में किया गया। संस्थान ने अभूतपूर्व मंचन की अपनी विरासत को मजबूत करते हुए अत्यधिक प्रतिभाशाली टीम के साथ महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध पर आधारित मशहूर मल्टीमीडिया डांस म्यूजिकल ‘18 डेज - डस्क ऑफ एन इरा’ पेश किया। इसका पहल दिन हाउसफुल देखा गया।
 इस शो में मीनाक्षी लेखी (भारत की संस्कृति राज्य मंत्री), चारु शर्मा (निदेशक, प्रो कबड्डी लीग), अनिल बैजल (दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर), प्रसून जोशी (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष), रंजना चोपड़ा (पर्यटन मंत्रालय), अभिनव प्रताप सिंह और सद्गुरु जग्गी वासुदेव जैसे खास दर्शक शामिल हुए। प्रभात, द टेम्पल ऑफ आर्ट ने मौलिक कोरियोग्राफी के संग दर्शकों से संवाद को असरदार बनाया है। इसमें ऑडियो-विजुअल शिल्प कौशल के साथ विशिष्ट प्रदर्शन दिखता है। समूह में 100 से अधिक कलाकार, पार्श्व गायक, एनिमेटर, योग विशेषज्ञ और तकनीशियन शामिल हैं और यह संस्थान आरंभ से ही कला के क्षेत्र में नया प्रतिमान बनाने में सफल रहा है।
दिल्ली के दर्शकों का उत्साह देख कर प्रभात, द टेंपल ऑफ आर्ट के कला निर्देशक और कालाकर भरत आर प्रभात और शरत आर प्रभात ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय राजधानी का उत्साह देख कर हमारी टीम रोमांचित है। यह 18 डेज़ की अपार क्षमता को भी उजागर करता है जिसमें एथनिसिटी, शास्त्रीय नृत्य, नाटक और संगीत का एक अद्भुत मिश्रण है। निकट भविष्य में हम पूरे भारत में इसकी सफलता की कहानी दोहराएंगे और दर्शकों को हमारे महाकाव्य ‘महाभारत’ का यादगार, जीवंत अनुभव प्रदान करेंगे।’’ इस डांस म्युजिकल में एनीमेशन, मार्शल आर्ट, लेविटेशन तकनीक, विभिन्न शास्त्रीय नृत्य रूप आदि शामिल हैं जो दर्शकों को संपूर्ण और सूचनाप्रद अनुभव के साथ मनोरंजन देंगे।

प्रभात, द टेम्पल ऑफ आर्ट का परिचय  प्रभात, द टेम्पल ऑफ आर्ट बेंगलुरु (भारत) का एक विश्वप्रसिद्ध कला संस्थान है। कथाकारांे का यह संगठन संत कवि पुरंदर दास (कर्नाटक संगीत के जनक) की महान विरासत से जुड़ा है। ये कथाकार अत्याधुनिक मंच तकनीकों के इस युग में मंच पर इतिहास रचने में सफल रहे हैं। इस ग्रुप में 100 से अधिक कलाकार, पार्श्व गायक, योग विशेषज्ञ, एनिमेटर और टेकनीशियन शामिल हैं। प्रभात 1930 से लगातार कला के क्षेत्र में योगदान दे रहा है। संगठन के योगदान को मान्यता देते हुए कर्नाटक सरकार ने इसे ‘कर्नाटक राज्योत्सव’ का सर्वाेच्च राजकीय सम्मान दिया है।

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