बासमती संग विश्व में महकेगा हाथरस का काला चावल

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली - भारत के बासमती चावल के बिना खाड़ी देशों में रात के भोजन की कल्पना नहीं की जा सकती है लेकिन अब सहकारी भारतीय ब्रांड के बेड़े में शामिल हाथरस का काला चावल भी विश्व में महकेगा। बिहार का स्वादिष्ट मखाना हो या फिर जम्मू प्रांत के प्रसिद्ध कलादी से बने स्वाद युक्त चीज़ बर्गर देश के कोने-कोने से अनगिनत सहकारी भारतीय ब्रांड और उत्पाद जल्द ही दुनिया भर में विदेशी ब्रांड के बीच बिकते नजर आयेगें।'नेशनल कोआपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड' भारत निर्मित स्वदेशी उत्पाद एवं असीमित वस्तुएं विदेशों में निर्यात कर देश के किसानों को आत्मनिर्भर और अर्थिक तौर पर मजबूत बनायेगा।

गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण के साथ सहकारी क्षेत्र की वस्तुओं को वैश्विक पहचान दिलाने और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में विश्व की विशालतम किसानों की सहकारी संस्था इंडियन फ़ारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) सहित भारत की पांच राष्ट्रीय संगठन कृषक भारतीय सहकारी लि.(कृभको),राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन सं.लि.(नेफेड), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम(एनसीडीसी), गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ जीसीएमएमएफ(अमूल) ने संयुक्त रुप से एक संगठित सहकारी समिति बनाने का बीड़ा उठाया है।

नेशनल कोआपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड से कृषि वस्तुओं के लिए आर्थिक वातावरण अधिक अनुकूल हो जाएगा, जिनकी वैश्विक मांग है। भारतीय वस्तुओं की वैश्विक मांग से न केवल देश के अन्नदातों की आय में वृद्धि होगी बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक विदेशी मुद्रा भी आएगी दोतरफा विकास के लिए सहकारी समितियां प्राथमिक व्यापारिक इकाई के रूप में कार्य करेंगी और देश के किसानों को निर्यात योग्य फसलों की खेती में मदद करेगी। नैनो उर्वरक (तरल) उत्पादन के क्षेत्र में विश्व की पहली किसानों की सहकारी संस्था,इफको हर साल अपने सदस्यों को 20 प्रतिशत लाभांश देती है। अमूल हर रोज लाखों महिलाओं का समर्थन करती है। वहीं नेफेड पारदर्शी तरीके से काम करते हुए छोटे और बड़े उत्पादक के प्रति किसी प्रकार का पक्षपात नहीं करता है।

नैनो उर्वरक (तरल) क्रांति के उदय ने पूरी दुनिया में कृषि प्रणाली को बदल दिया है । इफको के नैनो यूरिया (तरल) और अन्य उत्पाद दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और दुनिया में कहीं भी यूरिया की कमी की समस्या को हल करने की क्षमता रखता है,नैनो यूरिया (तरल) देश में फलते-फूलते खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को भी गति प्रदान करता है जो अमूल जैसे मजबूत एफएमसीजी ब्रांड के लिए वरदान साबित होगा, जिसने घरेलू स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है

यह यूपीआई और रुपे की तरह एक और मूक क्रांति को जन्म देगी जो न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि भारतीय कृषि को विश्व के मानचित्र पर स्थापित करेगी। सहकारिता इसी तरह कार्य करती है। इसके अधीन प्रत्येक सदस्य लाभ में अपना हिस्सा प्राप्त करते हैं। वे किसान जो पिछले दशकों के वैश्वीकरण के चमत्कार के लाभों से वंचित रहे हैं, वे नेशनल कोआपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड की छांव में अग्रणी के रूप में उभरेंगे।

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