इंटरनेट पर हिंदी पढ़ने वालों की संख्या में हर साल 94 फीसदी का इजाफा

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली । "विश्व के 260 से ज्यादा विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। 64 करोड़ लोगों की हिंदी मातृभाषा है। 24 करोड़ लोगों की दूसरी और 42 करोड़ लोगों की तीसरी भाषा हिंदी है। इस धरती पर 1 अरब 30 करोड़ लोग हिंदी बोलने और समझने में सक्षम हैं। 2030 तक दुनिया का हर पांचवा व्यक्ति हिंदी बोलेगा।" यह विचार नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की छमाही बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक एवं नराकास अध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी ने व्यक्त किए।
 इस अवसर पर आईआईएमसी के अपर महानिदेशक डॉ. निमिष रुस्तगी, डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह, उत्तरी क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, राजभाषा विभाग के उप निदेशक (राजभाषा) कुमार पाल शर्मा, नराकास के सदस्य सचिव डॉ. पवन कौंडल एवं सहायक निदेशक (राजभाषा) अंकुर विजयवर्गीय सहित 76 सदस्य कार्यालयों के कार्यालय प्रमुख एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 तकनीक में हिंदी का प्रसार तेजी से बढ़ा है। हिंदी की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इंटरनेट पर हिंदी पढ़ने वालों की संख्या हर साल 94 फीसदी बढ़ रही है, जबकि अंग्रेजी में 17 फीसदी। एक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2025 तक 30 करोड़ लोग इंटरनेट पर हिंदी का उपयोग करने लगेंगे। 2025 तक 9.7 करोड़ लोग डिजिटल पेमेंट के लिए हिंदी का उपयोग करने लगेंगे, जबकि 2016 में यह संख्या सिर्फ 2.2 करोड़ थी। सरकारी कामकाज के लिए 2016 तक 2.4 करोड़ लोग हिंदी का इस्तेमाल करते थे, जो 2025 में 10.9 करोड़ हो जाएंगे। यही हिंदी की बढ़ती ताकत है।

बैठक के दौरान सदस्य कार्यालयों की छमाही रिपोर्ट की समीक्षा भी की गई। भारतीय जन संचार संस्थान, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, दक्षिण दिल्ली-03 का अध्यक्ष कार्यालय है। नराकास दक्षिण दिल्ली-03 के अंतर्गत जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट), भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आई.आई.एफ.टी.), कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), 

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), केंद्रीय विद्यालय संगठन और सेबी जैसे 76 सदस्य कार्यालय आते हैं। यह सभी कार्यालय समय-समय पर राजभाषा सम्मेलन, संगोष्ठियों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से सरकारी कामकाज में राजभाषा हिन्दी के प्रति जागरुकता पैदा करने और उसके प्रयोग में गति लाने हेतु कार्य करते हैं।

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