4 अगस्त को होगा ‘बाघोदय’-आरआईसी में जुटेंगे बाघ संरक्षणवादी

० अशोक चतुर्वेदी ० 
जयपुरः नेशनल टाइगर प्रोजेक्ट के 50 वर्ष पूरे होने और सरिस्का में बाघ विस्थापित करने के 15 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बाघों के संरक्षण और संख्या में वृद्धि के नए उपाय खोजने के उद्देश्य के साथ वर्ल्ड वाइल्डर्नेस कांग्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूटीआई) और सरिस्का टाइगर फाउंडेशन (एसटीएफ) की ओर से 4 अगस्त को ‘बाघोदय’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) के मिनी ऑडिटोरियम-2 में होने वाले कार्यक्रम में पर्यावरण व बाघ संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत मशहूर हस्तियां बाघों से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श करेंगी। जयपुर में पहली बार ऐसा आयोजन होगा जब बाघ संरक्षण से जुड़ी इतनी विश्वस्तरीय शख्सियत एक मंच साझा करेंगी।
बाघोदय में हिस्सा लेने वालों में विश्व के अग्रणी संरक्षणवादी और आइयूसीएन के वाइल्डर्नेस स्पेशलिटी ग्रुप के अध्यक्ष और वर्ल्ड वाइल्डर्नेस कांग्रेस के वैश्विक अध्यक्ष वेंस जी. मार्टिन, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के अध्यक्ष और ताडोबा परियोजना में अपने काम के साथ-साथ महाराष्ट्र को भारत में शीर्ष बाघ राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए प्रसिद्ध प्रवीण परदेशी, प्रतिष्ठित वन्यजीव फिल्म निर्माता सुब्बैया नल्ला मुथु, संगीतकार शांतनु मोइत्रा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के महासचिव और सीईओ रवि सिंह, राजस्थान के पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, 

एसटीएफ के संस्थापक सचिव दिनेश दुरानी, वरिष्ठ वैज्ञानिक और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में एनिमल इकोलाॅजी और कंजर्वेशन बायलाॅजी के प्रमुख डाॅ. बिलाल हबीब, एस्ट्रल लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक कैरव इंजीनियर, प्रकृति संरक्षण के लिए सबसे कम उम्र में ग्रीन ऑस्कर विजेता रोहित कारू, ताड़ोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के सीसीएफ और फिल्ड निदेशक डाॅ. जितेन्द्र रामगावकर, आईसीआईसीआई फाउंडेशन के सीईओ अनुज अग्रवाल, मैन ऑफ वाइल्ड के नाम से मशहूर दौलत सिंह शक्तावत, आईसीआईसीआई बैंक के गवर्नमेंट बिजनेस प्रमुख सौरभ सिंह आदि का नाम शामिल है।

डब्ल्यूडब्ल्यूटीआई के चैयरमेन और एसटीएफ अध्यक्ष सुनील मेहता ने बताया कि नेशनल टाइगर प्रोजेक्ट के 50 वर्ष पूरे हो गए है, साथ ही विश्व में पहली बार जंगली बाघ को विस्थापित कर सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़ाने की पहल ने भी 15 साल पूरे कर लिए है। जश्न मनाने के साथ ही इस महत्त्वपूर्ण मौके पर यह विचार करना जरूरी है कि अब बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए क्या किया जा सकता है। 4 अगस्त को बाघोदय के मंच पर सभी विशेषज्ञ इस बात पर मंथन करेंगे कि किस तरह बाघों को सुरक्षित आवास मुहैया करवाया जा सके और किस तरह देश में इनकी संख्या तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार की जा सके।

सुब्बैया नल्ला मुथु, दिनेश दुरानी भी इस दौरान मौजूद रहे। बताया गया कि कार्यक्रम में मशहूर फिल्म निर्माता सुब्बैया नल्ला मुथु की फिल्म दिखायी जाएगी। इसी के साथ सुब्बैया नल्ला मुथु और शांतनु मोइत्रा द्वारा निर्मित बाघ एंथम का राजस्थानी वर्जन लाॅन्च किया जाएगा। हाल ही में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर पर यह एंथम लाॅन्च किया था। इसी के साथ वेंस जी. मार्टिन की ओर से बाघ संरक्षण नीति से जुड़ी प्रजेंटेशन दी जाएगी। स्कूली बच्चे भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेकर बाघ संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।

‘नेशनल टाइगर प्रोजेक्ट की सफलता से सीख लेते हुए व सरिस्का में बाघ विस्थापन के समय आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमें बाघ संरक्षण की दिशा में कदम उठाना बेहद जरूरी है। सरिस्का ने बड़ी सफलता हासिल की है, बाघोदय में सरिस्का को एक माॅडल के रूप में स्थापित करते हुए यह प्रयास किया जाएगा कि देश के अन्य अभ्यारण्य इससे सीख लेकर बाघ संरक्षण में कीर्तिमान स्थापित कर सके।’

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