हैदराबाद से आए शायरों के सम्मान में दिल्ली में मुशायरा

० इरफ़ान राही ० 
नई दिल्ली-अदबी तंजीम "सिलसिला" महफिल के ज़ेर-ए-एहतमाम रिवर सोसायटी क्लब (नई दिल्ली) में हैदराबाद से तशरीफ़ लाए शोरा जलील निजामी और तय्यब पाशा के एजाज़ में मुशायरा किया गया।मेहमान-ए-ख़ुसुशी की हैसियत से मारूफ शायर मंगल नसीम ने शिरकत की। इस मौके पर तालिब रामपुरी के शागिर्द हशमत भारद्वाज की शायरी के मजमू-ए "सफर में हूं" का रस्मे इजरा भी किया गया।

मुशायरे में सदारत उस्ताद शायर तालिब रामपुरी और निज़ामत फिलबदी के जादूगर प्रोफेसर अफज़ल मंगलौरी ने की। मुशायरे की कन्वीनर सपना एहसास ने तमाम मेहमानो के इस्तकबाल के साथ शानदार ज्याफत की। 

मशहूर शायर एवं अदीब प्रोफेसर अफजल मंगलोरी, मशहूर नाजिम-ए-मुशायरा, शायर मुइन शादाब हिंदी के प्रसिद्ध कवि, सुरेंद्र शिफर, एवं मशहूर शायरा सपना एहसास अदबी तंजीम सिलसिला की जानिब से शायर असलम जावेद को सम्मानित किया गया। इस मुशायरे के वरिष्ठ शायर एवं श्रोताओं से असलम जावेद ने खूब दुआएं और वाह वाही बटोरी है। चुनींदा शायरों के शेर प्रस्तुत हैं-

सूरज से बड़ी चीज है ये जर्रा ए नाचीज
जुगनू को कभी आग लगाते नहीं देखा।
तालिब रामपुरी

जाते हुए वो बोलकर एक ऐसा सच गया,
जो सच हर एक शख्स का चेहरा खुरच गया।
जनाब मंगल नसीम

कोई धोखा नहीं ऐसा जो न खाया हमने,
जिंदगी फिर भी तेरा साथ निभाया हमने।
तैय्यब पाशा कादरी

करेंगे गुफ्तगू हिंदी में लेकिन
लिखेंगें हाल-ए- दिल उर्दू जबा में।
जलील निजामी हैदराबादी

खुद पूर्ण होने का मुझको यकीन होने दो,
ये शाम आज की कुछ और हसीन होने दो,
सुगंध चांदनी मौसम में फिर बिखर जाए,
तुम अपने रूप का आंचल महीन होने दो।
प्रोफेसर अफजल मंगलोरी

कभी-कभी जो निदामत से होने लगती है,
तहे शऊर इबादत सी होने लगती है।
मोइन शादाब

सजी है बज्म मगर हमको उठ के जाना है,
हमारे बाद यहां जो किसी को आना है।
नासिर अजीज

बस यही इक ठिकाना है जावेद का,
दिल की बस्ती में आकर पता कीजिए।
असलम जावेद

ब्याज में खेत ना जेवर ना वो धन चाहता है
सूदखोर आज तो बेवा का बदन चाहता है।
राजीव रियाज प्रतापगढ़ी

लो मयस्सर है हमें अपना मुकद्दर देखना,
टूट कर गिरते हुए पत्तों का मंजर देखना।
हशमत भारद्वाज

ये तो चाहत ही नहीं मुझको खजाना चाहिए
हां मगर तेरी मोहब्बत जा विदाना चाहिए।
सुश्री सपना एहसास

कुछ ना कुछ तो बोला जाए,
खामोशी को तोड़ा जाए।
सुनने वाला खूब सुनेगा
चल उर्दू में बोला जाए।
नैना सुनैना

इसके अलावा मुशायरे में सरफराज अहमद फ़राज़, सुरेंद्र शर्मा, अनिल मीत वर्मा, अजय अज्ञात, डॉक्टर अमर पंकज, आलोक अविरल, कवि वीरेंद्र गोल्डी, चश्मा फारुकी, फौजिया अफजल एवं कवि कवित्रियों ने भी अपना कलाम सुनाया और वाह वाही बटोरी।

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