सर सैय्यद फाउंडेशन द्वारा हिमालया वेलनेस कंपनी के संस्थापक सैय्यद राशिद अहमद की याद में कार्यक्रम आयोजित

० संवाददाता द्वारा ० 
किताब के उर्दू एडिशन और बीस साल बाद सन 2020 में हिन्दी एडिशन के आने तक कि यादों को सांझा किया। अपनी वालिदा को याद करते हुए उनके घर मे बनाये गए उसूलों के बारे में बयान किया। इसके साथ ही अपने माता-पिता की याद में उनकी किताब में लिखी गयी कविताएं भी कार्यक्रम में सुनाई। 

नई दिल्ली/ सर सैय्यद फाउंडेशन द्वारा दिल्ली के तस्मिया हॉल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर की नामी गिरामी शख्सियतों ने शिरकत कर मरहूम सैय्यद राशिद अहमद को खिराजे अक़ीदत पेश किया। हिमालया वेलनेस कंपनी के संस्थापक और वर्तमान में कंपनी के मालिक डॉ. फ़ारूक़ के पिता मरहूम सैय्यद राशिद अहमद की याद में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें पद्मश्री अख्तरुल वासे, मानू यूनिवर्सिटी के पूर्व वाईस चान्सलर व फाउंडेशन के अध्यक्ष ख़्वाजा एम. शाहिद, मशहूर सीनियर पत्रकार सैय्यद मंसूर आग़ा, मासूम मुरादाबादी, और पारिवारिक सदस्य फर्रुख शहज़ाद ने खासतौर से शिरकत की।

अपने उद्घाटन भाषण में ख्वाजा शाहिद ने डॉ फ़ारूक़ के पिता के हवाले से उनके पिता की याद में लिखी किताब जिसका शीर्षक है आप याद आते हैं के बारे में चर्चा करते हुए, मरहूम सैय्यद राशिद की याद में रखे इस कार्यक्रम का मक़सद बयान किया। इसके बाद डॉ फ़ारूक़ ने बेहद भावुक अंदाज़ में अपने पिता को याद करते हुए, ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव के सफर को बयान किया। कि किस तरह 1980 में पिता की मृत्यु के बाद तमाम काम संभाले, 

और सन 2001 में इस किताब के उर्दू एडिशन और बीस साल बाद सन 2020 में हिन्दी एडिशन के आने तक कि यादों को सांझा किया। अपनी वालिदा को याद करते हुए उनके घर मे बनाये गए उसूलों के बारे में बयान किया। इसके साथ ही अपने माता-पिता की याद में उनकी किताब में लिखी गयी कविताएं भी कार्यक्रम में सुनाई। मासूम मुरादाबादी ने अपने भाषण में डॉ फ़ारूक़ की ज़िंदगी और उनके मरहूम पिता की यादों को हिस्सा बनाया, और बताया कि किस तरह डॉ फ़ारूक़ के किरदार में उनके पिता का बेहतरीन अक़्स झलकता है।

सीनियर पत्रकार सैय्यद मंसूर आग़ा ने अपने ख़िताब में डॉ. फ़ारूक़ के पिता की ज़िंदगी और उसपर पर लिखी किताब को एक सदी में पारिवारिक रिश्तों और परवरिश को बख़ूबी बयान किया। इसी कार्यक्रम के सिलसिले में देहरादून से शिरकत करने आये छोटे भाई फर्रुख शहज़ाद ने नज़्म सुनाकर इस यादगारी समारोह को और भी यादगार बना दिया।

पद्मश्री अख्तरुल वासे ने अपने भाषण में डॉ. फ़ारूक़ के मरहूम पिता को याद करते हुए किताब में लिखी सच्चाई और ईमानदारी भारी ज़िन्दगी पर रोशनी डाली, और बताया कि किस तरह 1930 में हिमालया कंपनी के शुरुवात से ही मरहूम सैय्यद राशिद अहमद जुड़े और 1980 तक कंपनी को एक बड़े नाम के रूप में स्थापित किया। एडवोकेट ख्वाजा शम्स,

 एडवोकेट असलम अहमद, एडवोकेट रईस अहमद, नूर नवाज़ खान, इदरीस कुरेशी, क़ाज़ी मोहम्मद मियां, फ़ारूक़ सिद्दीकी, ऐजाज़ गौरी आदि लोगों ने शिकरत की। इस कार्यक्रम का समापन एआईईएम के महासचिव अब्दुल रशीद के द्वारा मौजूद मेहमानों व वक्ताओं के शुक्रिया के साथ हुआ।

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