सिंधु समाज दिल्ली द्वारा भगवान झूलेलाल के चालिहा कार्यक्रम की घोषणा

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : सिंधु समाज दिल्ली राजेंद्र नगर में भगवान झूलेलाल के चालिहा कार्यक्रम की घोषणा की गई । इस अवसर पर सिंधु समाज दिल्ली के महासचिव नरेश बेलानी ने बताया कि सिंधी समाज के ईस्ट देवता भगवान झूलेलाल का चालिहा कार्यक्रम सिंधु समाज राजेंद्र नगर दिल्ली में 16 जुलाई से 25 अगस्त तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। नरेश बेलानी ने चालिहा कार्यक्रम के बारे में बताया कि15 अगस्त को सुबह स्वतंत्र दिवस मनाया जाएगा, 22 अगस्त को टीजड़ी मतलब करवा चौथ मनाया जाएगा जिसमें पत्नी अपने पति की आयु के लिए सजधज कर पूजा करेंगी, 24 अगस्त को भगवान झूलेलाल की नए पुराने राजेंद्र नगर, पटेल नगर क्षेत्र से शोभा यात्रा निकाली जाएगी

इस शोभा यात्रा को क्षेत्र में कई जगह सिंधी व गैर सिंधी लोग और संस्थाएं स्वागत करेगी। 25 अगस्त को थदड़ी का कार्यक्रम होगा जिसमें शीतला माता की पूजा की जाएगी उसके बाद रात को बेहराणा साहिब का यमुना नदी पर विसर्जन करने जाएंगे। तथा चालिहा कार्यक्रम के बाद 26 अगस्त को जन्माष्टमी के अवसर पर धूमधाम के साथ जन्माष्टमी मनाने का कार्यक्रम रहेगा। बेहराणा साहिब का यमुना नदी पर विसर्जन करने पर यमुना नदी के पर्यावरण के सवाल पर कार्यकारिणी सदस्य और पूर्व अध्यक्ष मनोहर करना ने कहा हम लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कोई मूर्ति नहीं बनाते हैं इस कारण पर्यावरण पर कोई असर नहीं होता है 

बस हम सब चालिहा के पहले दिन अखंड ज्योत जलाते हैं जो लगातार चालिहा के समापन तक जलता है। उस ज्योत के साथ मछली के खाने योग्य सामग्री जैसे आटा, फल, इत्यादि के साथ यमुना नदी पर विसर्जन करने जाते है। इसलिए विसर्जन पर पर्यावरण का कोई असर नहीं रहता। सिंधु समाज राजेंद्र नगर दिल्ली के कार्यकारणीय सदस्य अध्यक्ष जगदीश नागरानी, उपाध्यक्ष हरीश काकवानी, उपाध्यक्ष किशन झुरानी, अतिरिक्त महासचिव अशोक दीप टेकचंदानी, अतिरिक्त महासचिव कमल रामचंदानी, अतिरिक्त महासचिव जगदीश भाटिया, अतिरिक्त महासचिव सूरज प्रकाश, कोषाध्यक्ष कमल टेकचंदानी, इत्यादि लोग उपस्थित थे। पत्रकारों से बात करते हुए सिंधु समाज दिल्ली के समस्त कार्यकारणीय सदस्य ने बारी बारी से कहा आज़ादी के बटबारे के बाद सिंध, पंजाब और बंगाल के लोगों को अपने अपने प्रांत से सब कुछ छोड़कर खाली हाथ भारत में विस्थापित बनकर आना पड़ा।

 पंजाब और बंगाल के लोगों को तो अपना प्रांत मिला परन्तु सिंधुयों को प्रांत सहित कुछ भी नहीं मिला बस इस 75 वर्षों में प्रांत के यादों को ज़िंदा रखते हुए अपने आप को संभालने में गुजर गया क्योंकि हम सिंधी लोग खुद्दार और शांत स्वभाओ के रहे हैं इसलिए कभी भी हमने किसी से कुछ भी नहीं माँगा पर अब हम इतने सक्षम हो गए हैं अब हम सरकार से अपना हक़ मांग सकते हैं। अब हम चाहते है राजनीति में हमारी भी भागीदारी हो सके। और अपने सिंध प्रांत की याद में भव्य सिंधी भवन का निर्माण करें ताकि दुनिया में रहने वाले सिंधी लोग जब दिल्ली आए तो उनको एक छत के नीचे सब कुछ मिल जाए।

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