यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता : सोलंकी

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली। अपने इलाके में साफ सफाई और प्रदूषण रहित रखने के लिए सरकार हर साल लाखों रुपये खर्च कर जागरूकता अभियान चलाती है। लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद सरकारी अमला ही इलाके को प्रदूषित करें तो इसे क्या कहेंगे। मामला द्वारका सेक्टर 3 पॉकेट 16 स्थित आदर्श अपार्टमेंट के पास पालम ड्रेन है। यहां वर्षों से बरसाती नाले में सीवर का पानी चोरी छिपे बहाया जा रहा है। इससे न केवल बरसाती नाला प्रदूषित हो रहा है बल्कि आसपास में रहने वाले और वहां से गुजरने वाले लोग भी दुर्गंध से परेशान है। 

बाढ़ नियंत्रण विभाग के इस नाले को कोई और नहीं उन्हीं का दूसरा विभाग दिल्ली जल बोर्ड प्रदूषित करता आ रहा है। इस बात की शिकायत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन मधु विहार के प्रधान एवं फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के चेयरमैन रणबीर सिंह सोलंकी ने दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सोमनाथ भारती से की थी। इसके बाद सीवर का पानी नाले में गिरना बंद हो गया था। महज 1 महीने बंद रहने के बाद दोबारा से सुबह और रात के वक्त चोरी छिपे फिर से सीवर का पानी नाले में बहाया जा रहा है। इससे साफ जाहिर है कि इन कर्मचारियों को किसी का कोई डर नहीं है।

 वहीं अगर कोई आम आदमी ऐसा करता तो उस पर मोटा जुर्माना लगा दिया जाता। बहरहाल एक बार फिर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन मधु विहार के प्रधान एवं फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के चेयरमैन रणबीर सिंह सोलंकी जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सोमनाथ भारती से मिलकर शिकायत की है। भारती ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए इसे तुरंत रोकने का आदेश दिया है। अब देखना यह होगा कि बरसाती न्यायालय में सीवर का पानी गिरना कब बंद होगा।

 यमुना नदी को साफ करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है तथा इस कवायद में सरकार द्वारा लाखो रुपए के प्रोजेक्ट भी चल रहे है लेकिन यमुना की स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही है जिसका एक मुख्य कारण दिल्ली जल बोर्ड के कुछ अधिकारियों की लापरवाही है जो सीवर का पानी इन ड्रेनेज में छोड़ते रहते है जिससे इन ड्रेनो के आप पास रहने वाले एवम राहगीरों को आए दिन बदबू, बीमारी एवम यहां तक इलेक्ट्रॉनिक समान जैसे एयर कंडीशनर आए दिन खराब होते रहते हैं। शिकायत करने पर यह कुछ हफ्तों तक यह गंदा पानी ड्रेनों में छोड़ना बंद कर देते है लेकिन फिर अपनी लापरवाही एवम कर्तव्य हीनता का प्रदर्शन करते हुए सीवर का पानी ड्रेनों में छोड़ना शुरू कर देते है।

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