अप्रैल-जून तिमाही में, 43% नए लॉन्च और 38% बिक्री के साथ हाई-एंड हाउसिंग का दबदबा रहा


० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली : अप्रैल-जून की तिमाही में, भारत के प्रमुख हाउसिंग मार्केट में एक करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाली हाई-एंड हाउसिंग यूनिट्स के अनुपात में बिक्री और लॉन्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। आरईए इंडिया के स्वामित्व वाली प्रॉपर्टी ब्रोकरेज फर्म की इस “रियल इनसाइट: रेज़िडेंशियल अप्रैल-जून 2024” नामक त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन महीनों के दौरान भारत के आठ प्रमुख रेज़िडेंशियल मार्केट्स में लॉन्च की गई 43% यूनिट्स की कीमत एक करोड़ रुपये से ऊपर थी। इसके अलावा, इस प्राइस ब्रैकेट में आने वाली हाउसिंग यूनिट्स की तिमाही बिक्री में हिस्सेदारी 38% थी।

इस रिपोर्ट में अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, दिल्ली-एनसीआर (गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाज़ियाबाद और फरीदाबाद), एमएमआर (मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे) और पुणे के हाउसिंग मार्केट को शामिल किया गया है। डेटा के अनुसार, 30 जून को समाप्त हुई तिमाही में कुल 101,677 यूनिट्स लॉन्च की गईं, जिसमें पिछली तिमाही की तुलना में 1% की मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिस दौरान 1,03,020 इकाइयां लॉन्च की गई थीं। दूसरी ओर, मार्च तिमाही में 120,642 के मुकाबले 2024 की दूसरी तिमाही में 113,768 यूनिट्स बेची गईं।

आरईए इंडिया के सीएफओ, PropTiger.com के बिज़नेस हेड विकास वाधवा ने कहा, “पिछली कुछ तिमाहियों में बिक्री के साथ-साथ लॉन्च की संख्या के मामले में भी किफायती आवास की हिस्सेदारी पर असर पड़ा है, मुख्य रूप से ज़्यादा सुविधाएं देने वाले बड़े घरों की बढ़ती मांग के कारण। महानगरों में, निर्माण के खर्चों और ज़मीन की कीमतों में वृद्धि डेवलपर्स के लिए 45 लाख रुपये के बजट (किफायती श्रेणी) के भीतर घर वितरित करना चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। नतीजतन, इस सेगमेंट में कम लॉन्च हुए हैं। दूसरी ओर, संपत्ति की बढ़ती कीमतों का मांग पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। 

भले ही हाई एंड घरों की मांग में वृद्धि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक में नागरिकों की आय में वृद्धि का संकेत है, लेकिन किफायती घरों की घटती हिस्सेदारी दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के लिए चिंता का विषय है।”नई सप्लाई में केवल 15% यूनिट्स की कीमतें ही 45 लाख रुपये तक के प्राइस ब्रैकेट में थीं, जो देश में किफायती आवास के लिए सरकार द्वारा निर्धारित बेंचमार्क है। रिपोर्ट के अनुसार, 25% पर, यह प्रतिशत तिमाही बिक्री के मामले में तुलनात्मक रूप से अधिक था। वाधवा का विचार है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2024 में घोषित प्रमुख उपायों के कारण किफायती आवास की हिस्सेदारी बेहतर हो सकती है।

 वाधवा आगे कहते हैं, “ब्याज में सब्सिडी की योजना के साथ ही पीएमएवाई 2.0 की शुरूआत, कर संरचना में बदलाव के कारण वेतनभोगी वर्ग को मिलने वाली ज़्यादा सुलभ आय के साथ राज्यों द्वारा स्टांप शुल्क के संभावित सुव्यवस्थीकरण जैसी घोषणाएं देश में किफायती आवास की मांग को बढ़ाएंगी। सरकार महानगरों में किफायती आवास की सीमाओं में मदलाव करने पर भी विचार कर सकती है।” भले ही भारत 2013 और 2023 के बीच करोड़पतियों की संख्या में वृद्धि के मामले में चौथे स्थान पर रहा है, लेकिन उच्च नगरीयकरण दर और तेज़ी से बढ़ते मध्यम वर्ग वाली दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में घर खरीदने के मामले में किफायत अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।

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